Pages

Friday, July 19, 2019

जैन धर्म में ऐसे क्या रीति रिवाज़ है जो और धर्मो से अलग है?


जैन धर्म में कुछ ये रिवाज हैं जो प्रायः अन्य धर्मों में नहीं पाए जाते.
१. रात्री भोजन का निषेध
२. जमीकंद जैसे आलू, प्याज, लहसन, गाजर, मूली आदि खाने का निषेध। इसमें से अन्य धर्मों में भी सिर्फ प्याज, लहसुन का निषेध है.
३. सामायिक एवं पौषध: इसमें कच्चे पानी, आग, बिजली आदि को छूने एवं बाहन प्रयोग व नहाने का निषेध होता है.
४. दिगंबर जैन साधु पूर्णतः नग्न रहते हैं और श्वेताम्बर साधु सफ़ेद कपडे पहनते हैं. परन्तु दोनों ही प्रकार के साधु किसी बाहन का प्रयोग नहीं करते, अग्नि का स्पर्श नहीं करते, धन/ संपत्ति नहीं रखते, जुते नहीं पहनते.
५. श्वेताम्बर जैन मंदिरों में कोई भी शुद्धि के साथ पूजा कर सकता है, स्त्री और शूद्र भी. व्यक्ति स्वयं भगवान् को छू कर सभी प्रकार की पूजा अर्चना कर सकता है इसके लिए किसी पण्डित या पुजारी की आवश्यकता नहीं.
६. अंतिम आराधना के रूप में सल्लेखना या संथारा करते हैं.

Vardhaman Infotech
A leading IT company in Jaipur
Rajasthan, India
E-mail: info@vardhamaninfotech.com 
allvoices

Thursday, July 18, 2019

जैन धर्म का संक्षिप इतिहास

 

जैन धर्म के तीर्थंकर 

जैन धर्म विश्व के प्राचीनतम धर्मों में से एक है. जैन आगमों के अनुसार यह एक शाश्वत धर्म है अर्थात यह सदा से रहा है. वर्त्तमान अवसर्पिणी काल में प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभदेव आदिनाथ ने जैन धर्म की पुनर्स्थापना की. वे प्रागैतिहासिक पुरुष थे. उनके पुत्र भरत चक्रवर्ती सम्राट हुए जिनके नाम से इस देश का भारतवर्ष नाम पड़ा. ऋषभदेव के बाद २३ और तीर्थंकर हुए जिनमे २३ वें श्री पार्श्वनाथ या पारसनाथ और २४वें श्री महावीर स्वामी ऐतिहासिक काल के हैं. २२वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ महाभारत काल में हुए और वे श्री कृष्ण के चचेरे भाई थे.

ह्रींकार- २४ तीर्थंकरों का बीज मन्त्र 

भगवान् महावीर 

महावीर स्वामी 


भगवान् महावीर का जन्म बिहार (तत्कालीन मगध) के क्षत्रियकुण्ड नगर में हुआ. उन्होंने ३० वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण की और साढ़े बारह वर्ष की घोर तपस्या के बाद केवल ज्ञान अर्जित किया. इसके बाद वे घूम घूम कर सत्य धर्म का प्रचार करने लगे. ३० वर्ष तक धर्म का प्रसार करने के बाद ७२ वर्ष की आयु में मध्यम अपापा (वर्त्तमान पावापुरी, बिहार) नगरी में भगवन महावीर का निर्वाण हुआ. उनके इंद्रभूति गौतम आदि ११ गणधर (प्रमुख शिष्य) हुए.

भगवान् महावीर की परंपरा 


भगवान् महावीर के शिष्यों में सम्राट श्रेणिक बिम्बिसार, श्रेष्ठि धन्ना एवं शालिभद्र, राजकुमारी चंदनबाला, महारानी चेलना, महारानी मृगावती, शूद्र कुल में उत्पन्न मेतार्य एवं हरिकेशवल आदि प्रमुख हुए. भगवन महावीर के बाद आर्य सुधर्मा, जम्बू, भद्रवाहु, स्थूलिभद्र, वज्रस्वामी, सिद्धसेन दिवाकर, हरिभद्र सूरी, कुन्दकुन्दाचार्य, हेमचंद्राचार्य, जिन दत्त सूरी, जिनप्रभ सूरी आदि प्रमुख आचार्य हुए.

Vardhaman Infotech
A leading IT company in Jaipur
Rajasthan, India
E-mail: info@vardhamaninfotech.com 
allvoices