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Friday, January 5, 2018

कोलकाता के प्राचीन जैन मंदिर

कोलकाता के प्राचीन जैन मंदिर 

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता १९ वीं एवं वीसवीं सदी में जैन धर्मावलम्वियों का प्रमुख केंद्र रहा है. इस समय में यहाँ अनेकों भव्य कलात्मक जैन मंदिरों का निर्माण हुआ. मुग़ल काल में मुर्शिदाबाद बंगाल की राजधानी थी एवं यह जैन समाज का प्रमुख केंद्र था परन्तु अंग्रेजों ने कोलकाता को अपना केंद्र बनाया और ब्रिटिश काल में जैनों की वस्ति भी मुर्शिदाबाद से धीरे धीरे कोलकाता पहुंचने लगी.

१९वीं सदी में लखनऊ से आये हुए श्रीमालोन का कोलकाता में वर्चस्व रहा और उनलोगों ने ४ जिनमंदिरों का निर्माण करवाया. आज् से दो सौ साल पहले सर्वप्रथम बड़ाबाजार (कलाकार स्ट्रीट) में टांक परिवार ने श्री शांतिनाथ स्वामी के मंदिर का निर्माण करवाया. यह मंदिर तुलपट्टी पंचायती मंदिर के नाम से विख्यात है. इसके साथ ही मानिकतल्ला में एक दादाबाड़ी का भी निर्माण करवाया गया था. यह पंचायती है और इसके निर्माता एवं निर्माण का समय ज्ञात नहीं है.

सन १८६७ में प्रसिद्द जौहरी राय बद्रीदास बहादुर मुकीम ने मानिकतल्ला में श्री शीतलनाथ स्वामी के  विश्वप्रसिद्ध मंदिर का निर्माण कराया. यह पारसनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह पूरा मंदिर बेल्जियम कांच से बना हुआ है. इसके एक वर्ष बाद शीतलनाथ मंदिर के सामने एवं दादाबाड़ी के दाहिनी ओर सन १८६८ में सुखलाल जौहरी ने श्री महावीर स्वामी के विशाल मंदिर का निर्माण कराया. यह कोलकाता के सभी मंदिरों में सबसे बड़ा है इसलिए लगभग सभी बड़ी पुजाएँ यहीं पर होती है. इस मंदिर के रंगमंडप में ४०० से ५०० लोग बैठ सकते हैं.  इसी वर्ष २६ से २८ जनवरी तक इस मंदिर का सार्ध शताब्दी महोत्सव (१५० वर्ष)  मनाया जा रहा है.

महावीर स्वामी मंदिर के निर्माण के कुछ वर्ष बाद खारड़ परिवार ने श्री चंदाप्रभु स्वामी के मंदिर का निर्माण करवाया।  यह मंदिर भी भव्य एवं कलात्मक है.  मानिकतल्ला स्थित तीनों मंदिरों की विशेषता ये है की तीनो ही मंदिर काफी ऊंचाई पर बने हुए हैं और कई सीढ़ियां चढ़कर मंदिर में पंहुचा जा सकता है. तीनो हीहै. मंदिरों में परमात्मा की मनोहारी मूर्तियां है.

मुर्शिदाबाद से आये हुए शहरवाली समाज ने भी कोलकाता में मंदिरों का निर्माण करवाया. इंडियन मिरर स्ट्रीट, धर्मतल्ला में नाहर परिवार द्वारा निर्मित कुमार सिंह हॉल के मंदिर का १०० वर्ष अभी अभी पूरा हुआ है. दुगड़ परिवार का घर देहरासर धर्मतल्ला के ही क्रीक रो में अवस्थित है.

इन प्राचीन मंदिरों के अलावा कैनिंग स्ट्रीट एवं हेसम स्ट्रीट का जैन मंदिर भी लगभग ५० वर्ष पुराना है. उसके बाद कोलकाता में पिछले २०-२५ वर्षों में भी अनेकों जिन मन्दिर का निर्माण हुआ है.

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