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Tuesday, January 30, 2018

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का सार्ध शताब्दी महोत्सव सम्पन्न


श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का त्रिदिवसीय सार्ध शताब्दी महोत्सव अत्यंत उल्लासपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। स्थानीय जनों के अतिरिक्त जयपुर, चेन्नई, अहमदाबाद, दिल्ली, होसपेट, बेंगलुरु, मुम्बई, रायपुर, गोवा, वाराणसी, कच्छ, पुणे, चंद्रपुर, पटना,भागलपुर, अजीमगंज, जियागंज आदि स्थानों के गणमान्य व्यक्तियों ने पधार कर प्रभु भक्ति का लाभ लिया।

श्री महावीर स्वामी मंदिर कोलकाता 
26 जनवरी सायंकाल वीर मंडल, कोलकाता ने भक्ति संगीत पेश किया। वीर मंडल कोलकाता के प्रसिद्द मंडलों में से है जिनके संगीत की धूम पुरे भारत में है. साथ ही चेन्नई से पधारे श्री गौतम जैन व जयपुर से पधारे श्री प्रितेश शाह एवं ज्योति कोठारी ने भी स्थानीय कलाकारों श्री वीरेंद्र कोठारी, श्री किशोर सेठिया के साथ अपनी प्रस्तुति दी।

27 जनवरी प्रतिष्ठा दिवस के उपलक्ष्य में प्रातः काल सत्रह भेदी पूजा पढ़ाई गई, 9 वीं ध्वजपूजा के अवसर पर विधिवत शिखर पर ध्वज चढ़ाया गया। विधिकारक श्री मुल्तान चन्द जी सुराणा ने सम्पूर्ण विधि विधान सम्पन्न करवाया। परम पूज्या साध्वी श्री रत्ननिधि श्री जी, पुण्यनिधि श्री जी के सान्निध्य में होने वाले इस कार्यक्रम मे सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। श्री किशोर सेठिया, अंकित चोरडिया एवं मोहित बोथरा ने शास्त्रीय रागों पर आधारित पूजा पढ़ाई। श्रीमद राजचंद्र सत्संग मंडल, हम्पी, कर्नाटक ने भी भक्तिरस की सरिता बहाई। मंदिर की मुख्य ट्रस्टी 95 वर्षीया श्रीमती पुतुल कोठारी ने अत्यंत रुग्णावस्था के बाबजूद ध्वजारोहण में पधार कर अपने दृढ़ मनोवल का परिचय दिया।

कार्यक्रम संयोजक ज्योति कोठारी ने आगमों के उद्धरणों से पूजा, ध्वजारोहण एवं प्रभुभक्ति का महत्व समझाया। उन्होंने यह भी बताया की चतुर्थ दादागुरु देव श्री जिन चंद्रसूरी के विद्यागुरु, तानसेन के समकालीन उपाध्याय साधुकीर्ति उद्भट विद्वान व शास्त्रीय संगीत के ज्ञाता थे. सत्रह भेदी पूजा साधुकीर्ति की विशिष्ट रचना है जिसकी आजसे ४५० वर्ष पूर्व रचना की गई. उनकी प्रेरणा से भक्ति का ऐसा समां बांध की उपस्थित अपार जनमेदिनी झूम उठी और घंटों तक लोग प्रभु भक्ति में झूमते रहे। एक भी पैर ऐसा न था जो थिरका न हो। समारोह के विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय खरतरगच्छ प्रतिनिधि महासभा के अध्यक्ष 90 वर्षीय श्री मोतीलाल जी झाबक और मंत्री श्री संतोष जी गोलेच्छा भी नृत्य किये बिना न रह सके। पूजा के दौरान वासक्षेप, गुलाबजल, व पुष्प ही नही अपितु मोती की भी वर्षा की गई।

श्री मनीष जी नाहरमोहित जी सुराणा एवं अमित जी श्रीमाल ने परमात्मा की भव्य अंगरचना की. कार्यक्रम के दौरान तीनों दिन किये गए फूलों की आंगी की सभी ने भूरी भूरी प्रशंसा की. पूजन पश्चात् साधर्मी वात्सल्य का आयोजन किया गया.

सायंकाल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।  सर्वप्रथम श्रीमती रुमु लोढ़ा, चंद्रपुर ने मंगलाचरण कर कार्यक्रम की शुरुआत की. विशिष्ट अतिथियों ने भगवान् महावीर के प्राचीन चित्र के सामने दीप प्रज्वलन किया. केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य (केंद्रीय राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त) श्री सुनील जी सिंघी की अध्यक्षता में सभा प्रारम्भ हुई। श्री झाबक जी के अतिरिक्त जयपुर से पधारे हुए आगम मर्मज्ञ श्री सुरेन्द्र जी बोथरा, एसियाटिक सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रोफेसर अरुण बैनर्जी, इंडियन म्यूज़ियम, कोलकाता के निदेशक श्री राजेश पुरोहित विशिष्ट अतिथियों की पंक्ति को शोभायमान कर रहे थे।

 मंदिर के निर्माता परिवार के सदस्य डॉक्टर कुमार बहादुर सिंह, वयोवृद्ध श्री विमान जी श्रीमाल, बद्रीदास बहादुर मुकीम परिवार के वरिष्ठ सदस्य श्री चंचल कुमार सिंह मुक़ीम, कोलकाता पंचायती मंदिर के मंत्री श्री सुशील राय सुराणा, एवं खरतर गच्छ संघ, कोलकाता के अध्यक्ष श्री विनोद चन्द जी बोथरा  ने माल्यार्पण कर अतिथियों का स्वागत किया। सभी अतिथियों को सार्ध शताब्दी महोत्सव पर निकाले गए चांदी का सिक्का भी भेंट किया गया.

 न्यूयॉर्क से पधारे श्री इन्द्र रायचौधरी के सितार और वहीं से पधारे उच्छल बैनर्जी के तबले की जुगलबंदी में  राग खंबाज में प्रस्तुत दी। उनके साथ जर्मनी से पधारे ने गिटार में संगत किया. प्रस्तुति इतनी मनमोहक व सटीक थी कि उपस्थित श्रोतागण वाह वाह कर रहे थे और वन्स मोर वन्स मोर कर पुनः पुनः प्रस्तुति देने के लिए मजबूर कर रहे थे। श्री जिन दत्त सूरी महिला मंडल, कोलकाता ने भी एक भजन प्रस्तुत किया.

 इस अवसर पर आगम मर्मज्ञ विद्वतवर्य श्री सुरेंद्र जी बोथरा ने 'मौन की प्राचीर से" नाम की भगवान महावीर पर स्वरचित कविता का पाठ किया एवं उपस्थित श्रोताओं को आगम के कुछ गुढ़ रहस्य समझाये। श्री बोथरा जी अब तक अनेक आगमों का अंग्रेजी अनुवाद कर चुके हैं।

कुशल संस्कार कुंज के लगभग 40 बालक बालिकाओं ने मिलकर भगवान महावीर के जीवन की रूपरेखा प्रस्तुत की। नन्हे नन्हे बालकों की सुंदर एवं समयोपयोगी प्रस्तुति की सराहना किये बिना कोई नही रह सका।

इसके साथ ही इस दिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम  "बंगाल के जैन मंदिर: एक शोध परियोजना"का शुभारंभ भी किया गया। इंडियन म्यूजियम के निदेशक श्री राजेश पुरोहित ने परियोजना का शुभारम्भ करते हुए इस परियोजना में हर तरह का सहयोग देने का आश्वासन दिया।

 इस परियोजना के निदेशक जैन इतिहासज्ञ श्री डॉक्टर शिवप्रसाद जी ने महावीर स्वामी मंदिर एवं इसके निर्माता श्री सुखलाल जी जौहरी से संवंधित इतिहास की जानकारी दी। श्री दीपंकर वैरागी ने बंगाली भाषा मे भगवान महावीर पर कविता पाठ किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री सुनील जी सिंघी ने जैन समुदाय को अल्पसंख्यक समुदाय के दर्जे से मिलनेवाले लाभ बताते हुए कहा कि समाजके धरोहरों के संरक्षण में आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह कर रहा है। उन्होंने उपस्थित समुदाय से आग्रह किया कि सरकार द्वारा प्रदत्त सुविधाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने स्वयं को जिनशासन का सेवक बताते हुए इस सम्वन्ध में सभी प्रकार की सहायता करने का वचन दिया।  कार्यक्रम का संचालन गौतम दी जैन, चेन्नई ने किया एवं ज्योति कोठारी ने धन्यवाद अर्पित किया.

२८ तारिख प्रातःकाल स्नात्र पूजा, शांति स्नात्र एवं दोपहर को दादागुरु देव की पूजा पढाई गई. पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री श्री साधन पाण्डे की धर्मपत्नी श्रीमती शुप्ति पाण्डे विशेष अतिथि के रूप में पधारीं. वे पश्चिम बंगाल सरकार में एजुकेसन कमिटी की सदस्य भी हैं. उन्होंने वर्त्तमान समय की अशान्ति एवं भोगवाद के वातावरण से निकलने के लिए जैन धर्म को एक श्रेष्ठ मार्ग बताया. उन्होंने व्यक्तिगत बातचीत में जैन-जैनेतर सभी के लिए जैन धर्म की कक्षाएं प्रारम्भ करने की प्रेरणा दी और इस सन्दर्भ में सभी प्रकार का सहयोग देने का वादा किया.

इस प्रकार यह भव्य समारोह सानंद संपन्न हुआ.

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