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Thursday, December 15, 2016

जयपुर में खरतर गच्छीय मेरुरत्नसागर जी की दीक्षा संपन्न


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जयपुर के मानसरोवर स्थित मीरा मार्ग जैन मंदिर में खरतर गच्छीय प् पू गणिवर्य श्री मणिरत्न सागर जी महाराज एवं तपागच्छीय महत्तर साध्वी श्री सुमंगला श्री जी की शिष्या श्री कुसुमप्रभा श्री जी महाराज आदि ठाना  की निश्रा में बाड़मेर (हाल इरोड) निवासी श्री मोहनलाल जी बोथरा (पुत्र श्री आशुलाल जी एवं श्रीमती सीतादेवी) की छोटी दीक्षा संपन्न हुई. दीक्षा के पश्चात् दीक्षाप्रदाता गुरु गणिवर्य श्री मणिरत्न सागर जी ने  नवदीक्षित मुनि को श्री मेरुरत्नसागर का नाम दिया। नामकरण की बोली श्री महेश जी महमवाल ने ली. यह सभी कार्यक्रम खरतर गच्छाधिपति प् पू श्री मणिप्रभ सूरीश्वर जी महाराज की आज्ञा से संपन्न हुआ.

मेरुरत्नसागर जी को दीक्षा विधि कराते हुए गणिवर्य श्री मणिरत्न सागर जी 
मानसरोवर स्थित श्री आदिनाथ जिनमंदिर एवं निर्माणाधीन दादाबाड़ी प्रांगण में १० दिसम्बर २०१६, मौन एकादशी को प्रातः काल शुभ मुहूर्त में दीक्षा विधि प्रारम्भ हुई एवं गणिवर्य श्री ने स्वयं यह विधि सम्पूर्ण करवाई। सर्वप्रथम कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए मानसरोवर संघ के मंत्री श्री महेश जी महमवाल ने आगंतुकों का स्वागत किया एवं ऐसा शुभ अवसर प्रदान करने के लिए गणिवर्य श्री  का आभार व्यक्त किया।

मेरुरत्नसागर जी प्रवचन देते हुए साथ में गणिवर्य श्री मणिरत्न सागर जी
दीक्षार्थी भाई के धर्म के माता पिता बने श्री चिमन भाई रंजनबेन मेहता। यहाँ यह उल्लेखनीय है की श्री चिमनभाई स्वयं मुमुक्षु हैं.  उपस्थित श्री संघ द्वारा प्रदत्त ओघा गणिवर्य द्वारा दीक्षार्थी मुनि के हाथ में  प्रदान किया गया; ओघा ले कर नृत्य करते हुए मुनि के जयकारे से पूरा पंडाल गूंज उठा. कार्यक्रम संचालन ओसवाल परिषद्, जयपुर के मंत्री एवं खरतरगच्छ संघ के पूर्व मंत्री ज्योति कोठारी कर रहे थे।

मेरुरत्नसागर जी दीक्षा के वेश में 
इस अवसर को श्री अविनाश जी शर्मा द्वारा टीवी प्रोग्राम के लिए सूट किया गया.  मुल्तान खरतर गच्छ संघ के मंत्री श्री नेमकुमार जी जैन, मालवीयनगर संघ के मंत्री श्री मनोज बुरड़, नित्यानंदनगर संघ के अध्यक्ष श्री हरीश जी पल्लीवाल, श्यामनगर संघ के श्री विजय जी चोरडिया,  आदि जयपुर के विभिन्न संघों के पदाधिकारियों ने सभा को संबोधित किया एवं मुनि श्री के संयम ग्रहण की अनुमोदन की. इसके अतिरिक्त गुड मॉर्निंग अखबार के संपादक श्री सुरेंद्र जी जैन, मानसरोवर संघ के पूर्वमंत्री श्री नरेंद्रराज दुगड़,  सैनिक कल्याण परिषद् के अध्यक्ष श्री प्रेम सिंह जी राजपूत, शंखेश्वर मंदिर  के श्री शालिभद्र हरखावत, धर्म पिता श्री चिमन  एवं माता श्री रंजन बेन, खरतर गच्छ युवा परिषद् के श्री पदम् चौधरी, एवं संयम की भावना रखनेवाले संयम जैन ने भी सभा को संबोधित किया।

अखिल भारतीय खरतर गच्छ प्रतिनिधि महासभा की और से काम्बली ओढाते हुए श्री ज्योति कोठारी ने नवदीक्षित मुनि के सुदीर्घ आगमोक्त मुनिजीवन के लिए शुभकामनाएं दी. उपस्थित अन्य संघों की और से भी मुनि श्री को काम्बली ओढाई गई.

मुम्बई से पधारे हुए श्री दामोदर जी पल्लीवाल, भरतपुर से श्री भूपत जी जैन, सोनीपत से श्री सुब्रत जी जैन, मंडावर से श्री महावीरजी जैन आदि बहार से पधारे हुए गणमान्य व्यक्तियों ने भी सभा को संबोधित किया।

अपने उद्बोधन में गणिवर्य श्री ने बताया की श्री मोहनलाल जी सुदीर्घ काल से धर्माराधना कर रहे हैं एवं उनकी दीक्षा के समय भी वे सारथी बने थे. आपने अपने जीवन में उपधान  आराधना भी  प्रति दिन बियासने का तप करते हैं.  नवदीक्षित मुनि श्री मेरुरत्नसागर जी ने बताया की दस महीने पहले ही उनकी दीक्षा होनेवाली थी परंतु कुछ कारणों से यह उस समय संभव नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी बताया की जीवन की क्षणभंगुरता की याद दिला कर किस प्रकार उन्होंने परिवारजनो की स्वीकृति प्राप्त की और खरतर गच्छाधिपति श्री मणिप्रभ सूरीश्वर जी महाराज की आज्ञा एवं गणिवर्य के कर कमलों द्वारा आज यह शुभ अवसर प्राप्त हुआ।  इसके बाद तपागच्छीय महत्तरा साध्वी श्री सुमंगला श्री जी की  शिष्य कुसुमप्रभा श्री जी महाराज ने भी सभा को संबोधित किया और कहा की गणिवर्य श्री का व्यवहार ही उन्हें यहाँ तक खेंच के लाया है।

अंत में संघ की उपाध्यक्षा चंद्रकांता जी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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