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Tuesday, September 27, 2016

विश्वप्रसिद्ध श्री शीतलनाथ मंदिर कोलकाता का १५० वर्ष


श्री शीतलनाथ स्वामी, मूलनायक 
राय बद्रीदास बहादुर मुकीम द्वारा कोलकाता में सं १८६७ में निर्मित विश्वप्रसिद्ध श्री शीतलनाथ मंदिर का १५० वर्ष पूरा होने जा रहा है. इस अवसर पर तीन दिवसीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन दिनांक २६, २७, २८ फरबरी, २०१६ को किया जा रहा है.

शीतलनाथ स्वामी का भव्य मंदिर 
उल्लेखनीय है की यह भव्य मंदिर पूरी तरह कांच से बना हुआ है, और अपनी कलात्मकता के लिए विश्व में विख्यात है, यह मंदिर कोलकाता के पर्यटक मानचित्र में "पारसनाथ मंदिर" एवं "मुकीम जैन टेम्पल गार्डन" के रूप से अंकित है। इस मंदिर की प्रतिष्ठा लखनऊ गद्दी के श्रीपुज्य श्री कल्याण सूरी जी महाराज के कर कमलों द्वारा हुई थी. यह मंदिर श्रद्धालुओं के अतिरिक्त देशी-विदेशी पर्यटकों एवं कलाप्रेमियों के भी आकर्षण का केंद्र है. सं १९३५ में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा इस मंदिर पर एक डाक टिकट भी जारी किया गया था।

इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है, न सिर्फ मंदिर का अंदरूनी व बाहरी भाग बल्कि साथ का बगीचा भी कांच से बना हुआ है जो इसकी सुंदरता को चार चाँद लगाता है।  सुन्दर तालाब, फव्वारे, एवं अन्य सजावट ने इसे और भी निखारा है, तभी तो पर्यटकों की आँखें इसे निहारते हुए नहीं थकती।

मंदिर के सामने लगी राय बद्रीदास बहादुर की मूर्ति
सं १९०५ में प्रकाशित "The glimpses of Bengal" में लिखा गया है की राय बद्रीदास जी ने स्वयं इस मंदिर की वास्तुकला का डिज़ाइन किया था साथ ही इसमें कांच की कलाकारी का भी. राय बद्रीदास बहादुर को तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने "राय बहादुर" एवं "मुकीम" की उपाधि प्रदान की थी।  वे तत्कालीन वाइसराय के भी जोहरी थे.

महावीर स्वामी जैन मंदिर कोलकाता के १५० वर्ष


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