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Thursday, September 22, 2016

जयानन्द मुनि की ११ वीं पुण्यतिथि


परम पूज्य श्री जयानन्द मुनि की ११ वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में २० सितंबर, २०१६ को मोती डूंगरी दादाबाड़ी, जयपुर में श्रीमाल सभा के तत्वावधान में भक्ति संध्या का आयोजन किया गया. परम पूज्य श्री जयानन्द मुनि खरतरगच्छीय परंपरा के अद्भुत एवं अवधूत योगी थे. भक्तिरस उनके ह्रदय के कोने कोने में छलकता था. ख़ास कर श्रीमद देवचंद जी और आनंदघन जी के भजन उन्हें बड़े प्रिय थे और वो इन्हें अक्सर गाया करते थे.

कार्यक्रम का प्रारम्भ श्री पारस महमवाल, कार्यक्रम संयोजक ने मंगलाचरण के द्वारा किया।  कोल्कता खरतर गच्छ संघ के अध्यक्ष श्री विनोद चन्द जी बोथरा एवं कोलकाता के स्वनामधन्य राय बद्रीदास बहादूर मुकीम परिवार के श्री अशोक कुमार जी मुकीम ने परम पूज्य श्री जयानन्द मुनि के आगे दीप प्रज्वलित किया.

शंखेश्वर से पधारे हुए प्रसिद्द भक्तिरस गायक मेहुल ठाकुर ने शास्त्रीय संगीत में पूज्य जयानंद जी महाराज के प्रिय भजनों का गायन किया। वाचक यशोविजय जी कृत "हम तो मगन भये प्रभु ध्यान में" श्रीमद देवचंद जी चौवीसी के भजन "जगत दिवाकर जगत कृपानिधि" ने सबका मन मोह लिया। उन्होंने आनंदघनजी कृत कई भजन भी गाये।

जयपुर के प्रसिद्द कलाकार गौरव जैन एवं उनकी पत्नी दीपशिखा जैन ने भी अच्छी प्रस्तुति दी. "झीनी रे चदरिया" एवं "पंख होते तो उड़ आती मैं"  सभी को बहुत पसंद आई. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री विनय जी चोरडिया एवं विशिष्ट अतिथि श्री बाबूलाल जी दोषी व श्री कुशल चन्द जी महमवाल थे.

 भक्ति संध्या का समापन  मेहुल ठाकुर ने "म्हारा प्रभुनी वधाई बाजे छे" से की. कार्यक्रम का संचालन पारस महमवाल ने किया।

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