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Sunday, April 24, 2016

जयपुर के मोहनबाड़ी में महाप्रभाविक भक्तामर महापूजन का आयोजन


मोहनवाड़ी में निर्माणाधीन जैन मंदिर का प्रारूप


ऋषभ प्रसाद का नक्शा


मोहनवाड़ी में निर्माणाधीन जैन मंदिर का प्रारूप २ 
कल दिनांक २३ अप्रैल २०१६ को जयपुर के मोहनबाड़ी में निर्माणाधीन श्री आदिनाथ जिनालय के प्रथम पाषाण का मुहूर्त संपन्न हुआ. प्रातः ६ बजे मंत्रोच्चारण के साथ श्रीमती प्रेमबाई कमलचंद सुराणा परिवार के द्वारा प्रथम शिला रखी गई.

प्रातः ९ बजे से महाप्रभाविक भक्तामर महापूजन का आयोजन रखा गया जिसमे लगभग ३०० जोड़ों ने बैठ कर पूजा भक्ति का लाभ लिया।  इस अवसर पर नृत्य गीत आदि के माध्यम से भगवान् श्री ऋषभ देव की भक्ति की गई. विधिकारक श्री यशवंत गोलेच्छा ने विधि-विधान का सम्पूर्ण कार्यक्रम संपन्न करवाया।

इस अवसर पर जैन विद्वान ज्योति कोठारी ने भक्तामर स्तोत्र के विशिष्ट एवं अन्तर्निहित अर्थों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अनेक आगमों के उद्धरणों से परमात्मा के पांचों कल्याणकों का सम्वन्ध भक्तामर स्तोत्र की गाथाओं से जोड़ते हुए सारगर्भित तरीके से परमात्मा, भक्तामर स्तोत्र एवं भक्ति की विवेचना की.

 ज्योति कोठारी ने परमात्मा के आगे भक्तिवश नृत्य का महत्व बताते हुए कहा की हमारा अहंकार ही हमें प्रभु के आगे नृत्य करने से रोकता है और जो व्यक्ति जिनेश्वर देव के आगे नहीं नाचता सम्पूर्ण संसार उसे अपने इशारों पर नाचता है जबकि प्रभु के आगे नृत्य करने से व्यक्ति अहंकार और पाप कर्म के वंधनो से मुक्त होता है. उनके आह्वान पर उपस्थित सम्पूर्ण जनसमुदाय ने खड़े हो कर प्रभु के आगे नृत्य कर जिन भक्ति प्रदर्शित की.

यह सम्पूर्ण कार्यक्रम प पू मरुधर ज्योति साध्वी श्री मणिप्रभा श्री जी की निश्रा में संपन्न हुआ. प पू साध्वी श्री विद्युतप्रभा श्री जी एवं प पू साध्वी श्री हेमप्रज्ञा श्री जी ने अपने मधुर गायन से सबको मन्त्र मुग्ध किया। कार्यक्रम के अंत में साधर्मी वात्सल्य का आयोजन किया गया जिसमे बड़ी संख्या में लोग सम्मिलित हुए. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री प्रकश चन्द लोढ़ा का विशेष योगदान रहा.


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