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Thursday, April 7, 2016

जैन समाज एवं सुचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में व्यापार की सम्भावनाएं


जैन समाज एक प्रगतिशील, विचारवान, शिक्षित एवं समृद्ध समाज है. अपने परिश्रम, लगन एवं सूझबूझ से इस समाज ने समृद्धि के शिखर को छुआ है. अमेरिकी इतिहासकार पॉल डुंडस ने एक जगह ओसवाल जैन समाज के बारे में लिखा है की राजस्थान के सूखे मरुस्थल से खली हाथ चला हुआ इस समाज का वणिक वर्ग------------- कुछ ही वर्षों में गंगा-यमुना डेल्टा की आधी संपत्ति पर कब्ज़ा जमा लिया था. उस समय भारत ही नहीं पुरे विश्व का सबसे धनाढ्य परिवार था जगत सेठ परिवार। दिल्ली के मुग़ल बादशाह भी अक्सर उनके कर्जदार हुआ करते थे.  बीसवीं सदी के प्रथमार्ध तक भारत के व्यापार जगत में ओसवाल जैन समाज का दवदवा था परन्तु स्वतंत्रता के बाद से ही व्यापार जगत में ओसवाल समाज कमजोर होने लगा. यद्यपि यह समाज आज भी समृद्ध है परन्तु अन्य समजो के मुकाबले यह पिछड़ने लगा है.

बीसवीं सदी के शुरुआत से ही जब भारत में यांत्रिकीकरण होने लगा और भारतीय व्यापारी उसमे भागीदारी करने लगे- जैन समाज ने केवल व्यापार में ही रूचि ली और बहुत ही कम संख्या में जैन व्यापारिक घरानों ने उद्योग लगाने की राह पकड़ी। इसका फल ये हुआ पारसी, माहेश्वरी, अग्रवाल आदि समाज के लोगों में से बड़े औद्योगिल घरानों की स्थापना हुई और जैन समाज के लोग मात्र उन औद्योगिक घरानों के वितरक बन कर रह गए. हाँ, हीरा उद्योग एक ऐसा उद्योग था जिस पर जैन समाज की गहरी पकड़ थी और १९६० के दशक से आज तक केवल हीरा ही नहीं अपितु सम्पूर्ण रत्न एवं आभूषण उद्योग में जैन समाज का ही वर्चस्व है.

बीसवीं सदी के अंतिम दो दशकों में भारत की अर्थनीति ने फिर से एक नई दिशा पकडी. पुरे विश्व में सुचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की धूम थी. भारत में भी इसकी बयार आने लगी. कई नए उद्यमियों ने इस क्षेत्र  में प्रवेश किया। विप्रो, इनफ़ोसिस, टीसीएस जैसी कई बड़ी बड़ी कम्पनियाँ इस क्षेत्र की की दिग्गज के रूप में सामने आई. सैंकड़ो की संख्या में माध्यम दर्ज़ की और हज़ारों छोटी कंपनियों का भी आगाज हुआ. आज सुचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लाखों की संख्या में कम्पनियाँ कार्यरत है और लगातार उज्वल भविष्य की और बढ़ रहीं हैं.

दिल्ली, मुंबई, पुणे, बंगलुरु, हैदराबाद, जैसी पारम्परिक शहरों के साथ अहमदाबाद, जयपुर, इंदौर, कोल्कता आदि शहर भी इस क्षेत्र की प्रगति से अछूते नहीं रहे. गौरतलब है की इन सभी शहरों में जैन समाज का काफी वर्चस्व है और यहाँ पर जैन समाज के बड़े व्यवसायिक घराने लम्बे समय से कार्यरत हैं. इसके बाबजूद आश्चर्य की बात ये है की सुचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में जैन व्यापारियों ने कोई विशेष कदम नहीं रखा. सही में कहा जाये तो जैन व्यापारी इस क्षेत्र की ताक़त आंकने में चूक गए.

२०१४ में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नै सरकार बनने के बाद इस उद्योग की तरक्की और भी तेज़ हो गई क्योंकि सरकार ने डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने को अपना लक्ष्य बना लिया। अभी भी समय है, जैन व्यापारियों को अपने परंपरागत रवैय्ये को छोड़ कर नए क्षेत्रों की ओर भी ध्यान देना चाहिए, अन्यथा वो दिन दूर नहीं जब जैन समाज देश के आर्थिक जगत में अपनी शक्ति खो बैठेगा।

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