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Tuesday, December 27, 2016

साधुकीर्ति रचित सत्रह भेदी पूजा का अर्थ


१६वीं सदी के विद्वान् जैन मुनि साधुकीर्ति रचित सत्रह भेदी पूजा जैन साहित्य भंडार का अनमोल रत्न है. यह भक्ति साहित्य का उत्कृष्ट उदहारण है. इसका अर्थ गहन है और इस पूजा के शब्दार्थ एवं भावार्थ को समझना एक कठिन काम है. आज के समय में यह पूजा बहुत कम जगह गाइ जाती है परंतु इसकी उत्कृष्टता के कारण इसका संरक्षण एवं पुनःप्रचालन जैन समाज के लिए लाभकारी है. यहाँ यह भी उलेख करना प्रासंगिक होगा की साधुकीर्ति भी खरतर गच्छ परंपरा के थे जिस गच्छ के श्रीमद देवचंद ने अनेकों उत्कृष्ट भक्ति एवं आध्यात्मिक साहित्य  की रचना की है.

अजीमगंज स्थित श्री नेमिनाथ स्वामी मंदिर 
मेरा बचपन बंगाल प्रान्त के मुर्शिदाबाद जिले के अजीमगंज में बीत और वहां पर यह सत्रह भेदी पूजा बहु प्रचलित है. गुजराती भाषा में इसे સત્તર ભેદી પૂજા  कहते हैं. स्वाभाविक रूप से बचपन से ही यह पूजा सुनते आये हैं. सैंकड़ों बार जिसे भक्ति से गाया हो उसके प्रति अनुराग होना सहज है. इसलिए वर्षों से इच्छा थी की इसका अर्थ किया जाए जिससे लोग इसे समझ सकें और इसका आनंद उठा सकें। परंतु जब ये काम करने लगा तो पता लगा की यह काम सरल नहीं है.

यह पूजा साढ़े चार सौ साल से भी अधिक पुराना है और इतने समय में हिंदी भाषा ने अपना स्वरुप बहुत बदल लिया है, ऐसी स्थिति में शब्दों और पदों का अर्थ करना कठिन हो जाता है. दूसरी कठिनाई ये है की यह रचना बहुभाषी है. इसमें संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश आदि प्राचीन भाषाओँ का बहुतायत से उपयोग हुआ है. साथ ही राजस्थानी, गुजराती, ब्रज, और कहीं कहीं तो मराठी भाषा का भी प्रयोग किया गया है. हो सकता है की कुछ शब्द इसके अतिरिक्त अन्य भाषाओँ में से भी लिया गया हो. जैन साधु प्रगाढ़ पांडित्य के साथ अपनी भ्रमणशीलता के कारण विभिन्न प्रदेशों की भाषा और बोलियों से परिचित होते थे और उनका काव्यों में यात्र तत्र उपयोग करने में नहीं हिचकते थे.

साधुकीर्ति शास्त्रज्ञ होने के साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत के भी मर्मज्ञ विद्वान्इ थे. तत्कालीन लब्ध प्रतिष्ठ गायक एवं अकबर के नवरत्नों में से एक तानसेन से भी आपका घनिष्ठ परिचय था. सत्रह भेदी पूजा में उन्होंने अनेक राग-रागिनियों का इस्तेमाल किया है साथ ही संगीत की बारीकियां बतानेवाले कई श्लोक व पदों का भी समावेश इसमें किया है. यदि इसे पुराणी शास्त्रीय रागों में गा कर उसकी CD बना ली जाए तो ये काम बहुत उपयोगी होगा एवं जैन संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

भक्ति के माध्यम से होनेवाली संवर-निर्जरा के प्रसंग और कारणों की भी पूजा में संदर्भानुसार व्याख्या की गई है. द्रव्य पूजा किस प्रकार भाव पूजा में रूपांतरित होती है उसे भी दर्शाया गया है. उपरोक्त विभिन्न कारणों से सत्रह भेदी पूजा का अर्थ करना एक दुरूह काम है. परंतु इस काम को करने की मेरी भावना मुझे लगातार इस काम को करने प्रेरणा देती रहती है.

मेरी ईस भावना में सहयोगी बनी मेरी धर्मपत्नी ममता और उसके साथ अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विधिकारक श्री यशवंत गोलेच्छा। उन दोनों ने कहा की आप मौखिक अर्थ करें और हम उसे लिख लेंगे। इस तरह इस पर काम करना चालु हुआ. मैं इन दोनों का आभारी हूँ जिन्होंने इस सुन्दर काम में मुझे निरंतर सहयोग दिया।

अभी कुछ दिनों पहले एक सुन्दर संयोग हुआ जिससे यह काम तेजी से आगे बढ़ गया. आगम मर्मज्ञा विदुषी साध्वी स्व. प्रवर्तिनी श्री सज्जन श्री जी महाराज की सुशिष्या एवं प्रवर्तिनी श्री शशिप्रभा श्री जी महाराज की अज्ञानुवर्तिनी विदुषी साध्वी श्री सौम्यगुणा श्री जी, डी. लिट्, का बाड़मेर चातुर्मास था और एक शिविर में पढ़ाने के लिए मैं वहाँ गया था. मैंने उनसे कहा की सत्रह भेदी पूजा का अर्थ किया जाए और उन्होंने सहर्ष स्वीकृति दे दी. मैंने मौखिक अर्थ किया और साध्वी जी ने उसे लिखने का परिश्रम किया। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है की विदुषी साध्वी सौम्यगुणा श्री जी ने इस पूजा को अजीमगंज- कोल्कता में प्रचलित पुराणी रागों में गया है जिसे यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं. जहाँ पर सटीक अर्थ नहीं बैठ रहा था या जिन शब्दों का अर्थ समझ में नहीं आ रहा था उनकी एक सूची बना ली.

अब विभिन्न माध्यमों से उन अनजाने-अनसमझे शब्दों के अर्थों की तलाश शुरू हुई और इस कार्य में मनीषी मूर्धन्य श्री सुरेंद्र जी बोथरा का पूर्ण मार्गदर्शन मुझे प्राप्त हो रहा है. आवश्यकतानुसार अन्य विद्वानों से भी सहयोग लिया जाएगा। जिन शब्दों के अर्थ और सन्दर्भ फिर भी नहीं समझ में आएगा उन्हें इस ब्लॉग में विद्वानों के लिए पोस्ट कर दिया जाएगा जिससे किसी को भी अगर अर्थ मालूम हो तो वो मुझे बता सकें। मुझे विश्वास है की आप सभी के सहयोग से जल्दी ही ये काम पूरा हो जायेगा।

आनंदघनजी पर पुस्तक का विमोचन हंगरी दूतावास में


ज्योति कोठारी
जयपुर
Sadhukirti Sadhukeerti, Satrah Bhedi Pooja Puja Sattar Bhedi Pooja, સત્તર ભેદી પૂજા

#जैन #मुनि #साधुकीर्ति रचित #सत्रहभेदी #पूजा
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Thursday, December 15, 2016

जयपुर में खरतर गच्छीय मेरुरत्नसागर जी की दीक्षा संपन्न


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जयपुर के मानसरोवर स्थित मीरा मार्ग जैन मंदिर में खरतर गच्छीय प् पू गणिवर्य श्री मणिरत्न सागर जी महाराज एवं तपागच्छीय महत्तर साध्वी श्री सुमंगला श्री जी की शिष्या श्री कुसुमप्रभा श्री जी महाराज आदि ठाना  की निश्रा में बाड़मेर (हाल इरोड) निवासी श्री मोहनलाल जी बोथरा (पुत्र श्री आशुलाल जी एवं श्रीमती सीतादेवी) की छोटी दीक्षा संपन्न हुई. दीक्षा के पश्चात् दीक्षाप्रदाता गुरु गणिवर्य श्री मणिरत्न सागर जी ने  नवदीक्षित मुनि को श्री मेरुरत्नसागर का नाम दिया। नामकरण की बोली श्री महेश जी महमवाल ने ली. यह सभी कार्यक्रम खरतर गच्छाधिपति प् पू श्री मणिप्रभ सूरीश्वर जी महाराज की आज्ञा से संपन्न हुआ.

मेरुरत्नसागर जी को दीक्षा विधि कराते हुए गणिवर्य श्री मणिरत्न सागर जी 
मानसरोवर स्थित श्री आदिनाथ जिनमंदिर एवं निर्माणाधीन दादाबाड़ी प्रांगण में १० दिसम्बर २०१६, मौन एकादशी को प्रातः काल शुभ मुहूर्त में दीक्षा विधि प्रारम्भ हुई एवं गणिवर्य श्री ने स्वयं यह विधि सम्पूर्ण करवाई। सर्वप्रथम कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए मानसरोवर संघ के मंत्री श्री महेश जी महमवाल ने आगंतुकों का स्वागत किया एवं ऐसा शुभ अवसर प्रदान करने के लिए गणिवर्य श्री  का आभार व्यक्त किया।

मेरुरत्नसागर जी प्रवचन देते हुए साथ में गणिवर्य श्री मणिरत्न सागर जी
दीक्षार्थी भाई के धर्म के माता पिता बने श्री चिमन भाई रंजनबेन मेहता। यहाँ यह उल्लेखनीय है की श्री चिमनभाई स्वयं मुमुक्षु हैं.  उपस्थित श्री संघ द्वारा प्रदत्त ओघा गणिवर्य द्वारा दीक्षार्थी मुनि के हाथ में  प्रदान किया गया; ओघा ले कर नृत्य करते हुए मुनि के जयकारे से पूरा पंडाल गूंज उठा. कार्यक्रम संचालन ओसवाल परिषद्, जयपुर के मंत्री एवं खरतरगच्छ संघ के पूर्व मंत्री ज्योति कोठारी कर रहे थे।

मेरुरत्नसागर जी दीक्षा के वेश में 
इस अवसर को श्री अविनाश जी शर्मा द्वारा टीवी प्रोग्राम के लिए सूट किया गया.  मुल्तान खरतर गच्छ संघ के मंत्री श्री नेमकुमार जी जैन, मालवीयनगर संघ के मंत्री श्री मनोज बुरड़, नित्यानंदनगर संघ के अध्यक्ष श्री हरीश जी पल्लीवाल, श्यामनगर संघ के श्री विजय जी चोरडिया,  आदि जयपुर के विभिन्न संघों के पदाधिकारियों ने सभा को संबोधित किया एवं मुनि श्री के संयम ग्रहण की अनुमोदन की. इसके अतिरिक्त गुड मॉर्निंग अखबार के संपादक श्री सुरेंद्र जी जैन, मानसरोवर संघ के पूर्वमंत्री श्री नरेंद्रराज दुगड़,  सैनिक कल्याण परिषद् के अध्यक्ष श्री प्रेम सिंह जी राजपूत, शंखेश्वर मंदिर  के श्री शालिभद्र हरखावत, धर्म पिता श्री चिमन  एवं माता श्री रंजन बेन, खरतर गच्छ युवा परिषद् के श्री पदम् चौधरी, एवं संयम की भावना रखनेवाले संयम जैन ने भी सभा को संबोधित किया।

अखिल भारतीय खरतर गच्छ प्रतिनिधि महासभा की और से काम्बली ओढाते हुए श्री ज्योति कोठारी ने नवदीक्षित मुनि के सुदीर्घ आगमोक्त मुनिजीवन के लिए शुभकामनाएं दी. उपस्थित अन्य संघों की और से भी मुनि श्री को काम्बली ओढाई गई.

मुम्बई से पधारे हुए श्री दामोदर जी पल्लीवाल, भरतपुर से श्री भूपत जी जैन, सोनीपत से श्री सुब्रत जी जैन, मंडावर से श्री महावीरजी जैन आदि बहार से पधारे हुए गणमान्य व्यक्तियों ने भी सभा को संबोधित किया।

अपने उद्बोधन में गणिवर्य श्री ने बताया की श्री मोहनलाल जी सुदीर्घ काल से धर्माराधना कर रहे हैं एवं उनकी दीक्षा के समय भी वे सारथी बने थे. आपने अपने जीवन में उपधान  आराधना भी  प्रति दिन बियासने का तप करते हैं.  नवदीक्षित मुनि श्री मेरुरत्नसागर जी ने बताया की दस महीने पहले ही उनकी दीक्षा होनेवाली थी परंतु कुछ कारणों से यह उस समय संभव नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी बताया की जीवन की क्षणभंगुरता की याद दिला कर किस प्रकार उन्होंने परिवारजनो की स्वीकृति प्राप्त की और खरतर गच्छाधिपति श्री मणिप्रभ सूरीश्वर जी महाराज की आज्ञा एवं गणिवर्य के कर कमलों द्वारा आज यह शुभ अवसर प्राप्त हुआ।  इसके बाद तपागच्छीय महत्तरा साध्वी श्री सुमंगला श्री जी की  शिष्य कुसुमप्रभा श्री जी महाराज ने भी सभा को संबोधित किया और कहा की गणिवर्य श्री का व्यवहार ही उन्हें यहाँ तक खेंच के लाया है।

अंत में संघ की उपाध्यक्षा चंद्रकांता जी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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#खरतरगच्छ, #जयपुर, #दीक्षा, #मणिप्रभसागर, #मणिरत्न सागर, #मेरुरत्नसागर,

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Wednesday, November 16, 2016

मेतारज पैदल यात्री संघ ने दिए तीन मंदिरों के लिए ज़मीन

 


मेतारज पैदल यात्री संघ  आज अपने दूसरे दिन में भी सुबह से ही भक्ति एवं आराधना में लग गया. प्रातःकाल जब सभी यात्री गैन प्रार्थना कर रहे थे उस समय पूज्य साध्वी श्री मणिप्रभा श्री जी महाराज मुल्तान मंदिर पधारीं जहाँ उन्होंने पूज्य गणिवर्य श्री मणिरत्नसागर जी को वंदना की एवं उपस्थित यात्री संघ को संबोधित किया। जिनदर्शन, पूजा, नाश्ता आदि के बाद पूज्य गणिवर्य श्री मणिरत्नसागर जी की निश्रा में धर्मसभा प्रारम्भ हुई जिसमे गणिवर्य श्री ने इस विशेष यात्रा संघ का महत्व बताया एवं तिम्मनगढ़ क्षेत्र में हो रहे जाटव एवं अन्य जैनेतर समाजों में संस्कार आरोपण की जानकारी दी।  


इसके बाद उस क्षेत्र से पधारे हुए तीन यत्रियों ने अपनी ज़मीन जैन मंदिर बनाने हेतु समर्पित की जिसे यात्रा के संयोजक श्री ज्योति कोठारी ने स्वीकार किया। सभा में आमंत्रित जयपुर नगरपालिका के पार्षद श्री विकास कोठारी, श्री ज्योति कोठारी एवं श्री विमल भंसाली का स्वागत मुल्तान संघ के अध्यक्ष डा. कमल चन्द जैन एवं मंत्री श्री नेमकुमार जैन ने किया। ज्योति कोठारी ने बताया की जैन धर्म जन्म से नहीं अपितु कर्म से किसी का ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शुद्र होना स्वीकार करता है. शुद्र कुल में उत्पन्न हरिकेशवल एवं मेटराज जैसे महामुनियों ने केवल ज्ञान प्राप्त कर मनुष्य जीवन को सफल बनाया। उन्होंने आगे बताया की चार वर्ष पूर्व इन जाटवों को खरतर गच्छ संघ, जयपुर के संघमंत्री के रूप में उन्होंने मेतारज गोत्र प्रदान कर इन्हें जैन समाज की मुख्य धारा में सम्मिलित किया था. 


पार्षद (वार्ड ६६) श्री विकास कोठारी ने जैन ध्वज दिखा कर पैदल यात्री संघ को रवाना किया एवं संघ वहां से चल कर श्री विजय गच्छ के मंदिर, जोहरी बाजार पंहुचा. वहां पर मंदिर के मंत्री श्री प्रकाश चन्द बांठिया ने संघ का स्वागत किया। तत्पश्चात संघ खरतर गच्छ के मुख्यालय शिवजीराम भवन पंहुचा जहाँ पर संघ मंत्री श्री अनूप पारख एवं अन्य ट्रस्टियों ने संघ का स्वागत एवं संघ पूजन किया। तत्पश्चात संघ ने आगरे वालों का मंदिर एवं श्री सुपार्श्वनाथ स्वामी के बड़े मंदिर एवं श्रीमालों के मंदिर का दर्शन कर  श्री सुमतिनाथ स्वामी के मंदिर पंहुचा जहाँ पर तपागच्छ के संघमंत्री राकेश मुणोत ने अन्य ट्रस्टियों के साथ संघ का बहुमान किया। 

मोहनबाड़ी में निर्माणाधीन विशाल जिन मंदिर 
जोहरी बाजार से निकल कर लगभग तीन किलोमीटर का सफर कर मेतारज पैदल यात्री संघ मोहनबाड़ी पंहुचा जहाँ पर श्री सांवलिया पारसनाथ भगवान् एवं दादाबाड़ी के दर्शन किये। यहाँ पर उन्हें नाश्ता कराया गया एवं धर्मसभा का आयोजन किया गया. अपने उद्बोधन में गणिवर्य श्री ने खरतर गच्छ संघ, जयपुर से आग्रह किया की वे अगले संघ का आयोजन करें जिसे संघ मंत्री श्री अनूप परख ने सहर्ष स्वीकार करते हुए कहा की ज्योति कोठारी से विचार विमर्श कर इसकी रूपरेखा तैयार कर ली जायेगी। 

यहाँ से रवाना हो कर मेतारज पैदल यात्री संघ महावीर साधना केंद्र, जवाहरनगर पंहुचा और वहां मंदिर एवं दादाबाड़ी के दर्शन किये। जवाहरनगर संघ के सहमंत्री श्री प्रवीण लोढा एवं अन्य ट्रस्टियों ने संघ का बहुमान किया एवं सुन्दर नाश्ते की व्यवस्था की. अंत में जनता कॉलोनी स्थित श्री सीमंधर स्वामी के मंदिर का दर्शन कर संघ अपने आवास स्थल मुल्तान मंदिर लौट आया जहाँ पर रात्रि भक्ति का आयोजन किया गया. कल प्रातः यह संघ स्टेशन मंदिर (पुंगलिया मंदिर) का दर्शन कर अपने स्थान को लौटेगा।

मेतारज पैदल यात्री संघ जयपुर के जैन मंदिरों में



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Tuesday, November 15, 2016

मेतारज पैदल यात्री संघ जयपुर के जैन मंदिरों में


 परम पूज्य गच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभसागर सूरीश्वर जी के आज्ञानुवर्ती गणिवर्य श्री मणिरत्नसागर जी एवं मलयरत्न सागर जी महाराज साहब की निश्रा में आज से जयपुर के सभी श्वेताम्बर जैन मंदिरों के दर्शन हेतु तीन दिवसीय पदयात्रा की शुरुआत हुई.

इस संघ ने सबसे पहले मीरा मार्ग स्थित श्वेताम्बर जैन मंदिर के दर्शन किये जहाँ पर मानसरोवर संघ द्वारा उनके लिए सुन्दर नाश्ते की व्यवस्था रखी गई. मंत्री श्री महेशचंद महमवाल एवं संघ के अन्य गणमान्य लोग वहां उपस्थित थे. इसके बाद महारानी फार्म स्थित योगाश्रम में भोजन ग्रहण कर यह पैदल संघ मालवीयनगर की ऒर रवाना हुआ जहाँ श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवन के मंदिर के दर्शन किये।  यहाँ भी मंत्री श्री विमल लालवानी, कोषाध्यक्ष श्री सुरेंद्र सिपानी आदि ने पैदल संघ की अगवानी की एवं चाय आदि से उनका सत्कार किया।

पैदल संघ को संबोधित करते हुए साध्वी श्री अतुलप्रभा श्री जी महाराज 
आगे बढ़ते हुए पैदल संघ श्री वासुपूज्य स्वामी के मंदिर पंहुचा जहाँ दर्शन के पश्चात् गणिवर्य श्री मणिरत्न सागर जी महाराज साहब एवं साध्वी श्री अतुलप्रभा श्री जी ने संघ को संबोधित किया। वहां से संघ श्री नाकोड़ा पारसनाथ मंदिर पंहुचा। प्राकृत भारती परिसर में एक सभा का आयोजन किया गया जिसे गणिवर्य श्री के अतिरिक्त SEBI के पूर्व अध्यक्ष पद्मविभूषण श्री देवेन्द्रराज मेहता, श्री श्यामसुंदर विस्सा, IAS एवं ओसवाल परिषद् के सचिव ज्योति कोठारी ने सभा को संबोधित किया।

 पद्मविभूषण श्री देवेन्द्रराज मेहता, श्यामसुंदर विस्सा एवं ज्योति कोठारी 
मालवीयनगर स्थित तीनो मंदिरों के दर्शन कर यह पैदल यात्री संघ मोती डूंगरी रोड की ऒर अग्रसर हुआ और लंबी दुरी तय कर दादाबाड़ी पंहुचा। यहां पर श्री पारसनाथ भगवान्, अष्टापद तीर्थ, व नंदीश्वर द्वीप के दर्शन कर यात्रियों ने अपने जन्म सफल किये। दादाबाड़ी में गुरु इकतीस का पाठ भी किया। गणिवर्य श्री ने उन्हें जिन भक्ति का महत्व बताया और मंदिर एवं मूर्तियों का परिचय कराया। वहां स्थित साध्वीवर्या श्री मृदुला श्री जी आदि थाना २ ने गणिवर्य श्री के दर्शन वंदन किये।  दादाबाड़ी पहुचने पर श्रीमाल सभा के मंत्री श्री अनिल श्रीमाल ने उनका स्वागत किया एवं सायंकालीन भोजन का आग्रह किया।

गणिवर्य श्री मणिरत्नसागर जी का दादाबाड़ी में उद्बोधन 
दादाबाड़ी से चल कर यह पैदल यात्री संघ श्री महावीर स्वामी मंदिर (मुल्तान मंदिर) आया जहाँ पर मंदिर एवं दादाबाड़ी के दर्शन के बाद सभी के रात्री विश्राम का कार्यक्रम रखा गया है. यहाँ भी मुल्तान संघ के मंत्री श्री नेमकुमार जी जैन उपस्थित थे.

गणिवर्य श्री मणिरत्नसागर जी ने प्रथम दादागुरुदेव श्री जिनदत्त सूरी की विचरण भूमि तिम्मनगढ़ क्षेत्र के जैनेतरों को संस्कारित कर, उन्हें मद्यमांसादि छुड़ा कर जैन धर्म के आचरण में रंग दिया। तिम्मनगढ़, हिंडौन, करौली आदि क्षेत्र के हज़ारों की संख्या में जैनेतर लोगों को संस्कारित करने का महान कार्य उन्होंने किया है. उस क्षेत्र में गत वर्ष १४ नवीन  जिनमंदिरों की प्रतिष्ठा भी करवाई. नव संस्कारित जैनों को मेतारज गोत्र भी प्रदान किया गया.

इन मेतारज गोत्रियों के संस्कारों को दृढ करने एवं उन्हें जैन समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए समय समय पर संघ यात्राओं का आयोजन किया जाता रहा है. अभी हाल ही में खरतरगच्छ सम्मलेन के दौरान भी लगभग ५०० लोगों का पैदल संघ पालीताना ले जाया गया था.

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Tuesday, October 18, 2016

जैन समाज का अपना ऑनलाइन बाजार जैन मार्केट



जैन मार्केट जैन समाज का अपना ऑनलाइन बाजार है. आज ऑनलाइन शॉपिंग की होड़ है और हज़ारों की तादाद में वेबसाइट इस काम के लिए उपलव्ध है, परंतु जैन समाज के लिए एक ऐसे ऑनलाइन पोर्टल की जरुरत थी जहाँ वे अपना सामान बेच सकें.



जैन समाज मूलतः एक व्यापारिक समाज है और इस समाज के लाखों लोग अपने व्यापर में संलग्न हैं. जैन व्यापारियों में परष्पर सहयोग आजकी प्रतियोगी दुनिया में बहुत आवश्यक है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए जैन मार्केट की शुरुआत की गई है. इसमें कोई भी जैन व्यापारी अथवा उत्पादक अपना सामान बेच सकते हैं. जैन व्यापारियों की साख को देखते हुए ऐसा लगता है की अन्य समाज के लोग यहाँ खरीददारी करने जरूर आएंगे.

जैन समाज में अनेक महिलाएं घरेलु उत्पाद जैसे खाद्य सामग्री, हस्तकला की वस्तुएं आदि बना कर छोटे स्टार पर व्यापर करतीं हैं. उनके लिए भी अपना सामान बेचने के लिए जैन मार्केट बड़ा उपयोगी सावित हो रहा है. इससे वे अपना सामान पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत कर सकती हैं.

जैन समाज अपने धार्मिक, सामाजिक कार्यों के लिए बखूबी जाना जाता है. इस कार्य से सामाजिक उत्तरदायित्वों की भी पूर्ति होती है. इस वेबसाइट में पंजीकृत होना एवं अपने सामान को जोड़ना भी बहुत सरल है. अतः आपसे निवेदन है की यदि आप उत्पादक या व्यापारी हैं तो अपने आपको या अपने प्रतिष्ठान को इसमें रजिस्टर करें और यदि आप सामान्य उपभोक्ता हैं तो इस साइट से सामान की खरीद करने के लिए पंजीकृत हों. आप सभी से यह भी निवेदन है की अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें. इस साइट में पंजीकरण निःशुल्क है.

जैन महिलाओं के लिए उपयोगी वेबसाईट जैन मार्केट


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Sunday, October 16, 2016

नेत्रदान के लिए जैन समाज आगे आये


नेत्रदान के लिए जैन समाज आगे आये और कोर्निया अंधत्व से भारत को मुक्ति दिलाये। भारत में नेत्रहीन व्यक्तियों की संख्या लगभग १.५  करोड़ है औरउसमें से लगभग ४० लाख लोग कोर्निया अंधत्व से पीड़ित हैं जिन्हें केवल मृत व्यक्तियों द्वारा दिए गए आँखों का ही सहारा है. आधुनिक तकनीक के कारण मृत व्यक्ति के शरीर से लिए गए एक आँख से तीन व्यक्तियों को रौशनी मिल सकती है अर्थात एक व्यक्ति की दो आँखें ६ व्यक्तियों का जीवन रोशन कर सकती है.
मानव नेत्र एवं कोर्निया 

जैन धर्म कर्मवाद में विश्वास रखता है और उसके अनुसार जो दिया जाता है वही मिलता है. इसलिए इस जीवन में नेत्रदान अगले भव में अच्छे नेत्र दिला सकता है फिर इस पुनीत काम में पीछे क्यों रहना? पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा नेत्र श्री लंका से प्राप्त होता है. श्री लंका में बौद्धों की संख्या अधिक है और बौद्ध भी जैनो की तरह कर्मफल में विश्वास रखते हैं. इसलिए वहां नेत्रदान की बहुत अच्छी परंपरा है और यह छोटा सा देश  जरूरतों को पूरा करने के बाद दुनिया भर में आँखें भेजता है - बिना किसी प्रतिदान के!!

जैन समाज भी इस काम में काफी आगे है परंतु इस भावना को और बढ़ने की आवश्यकता है. श्रीलंका की कुल जनसँख्या २ करोड़ है जो की भारत में जैनो की आवादी के बराबर है, यदि जैन लोग भी वहां के निवासियों की तरह समर्पण भाव के साथ आगे आएं तो भारत कोर्निया अन्धत्व से मुक्त हो सकता है. इसके लिए सामाजिक संगठनों  परम पूज्य आचार्य भगवंतों, साधु-साध्वी वृंदों को भी आगे आना होगा।

मुस्लिम समाज अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण नेत्रदान नहीं करता जबकि वृहत्तर हिन्दू  सनातनी समाज भी इस काम में ज्यादा आगे नहीं है. ऐसी स्थिति में जैन समाज इस काम में आगे आ कर एक मिसाल पेश कर सकता है.

इस वर्ष से कोर्निया अंधत्व मुक्त भारत अभियान (CAMBA)  प्रारम्भ किया गया है और इसमें २०१८ तक भारत को इस अभिशाप से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है. जैन समाज से प्रार्थना है की इस काम में पूरी शक्ति के साथ आगे आये, अपने धर्म का पालन करे और देश को नै रोशनी दे.


कोर्निया अंधत्व मुक्त भारत पर गोष्ठी


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Saturday, October 8, 2016

आज से नवपद ओली का प्रारम्भ



आज ८ अक्टूबर २०१६ से नवपद ओली (आश्विन) का प्रारम्भ हुआ और आज प्रथम पद देवाधिदेव श्री अरिहंत परमात्मा की आराधना की गई. पुरे भारत में ही नहीं विश्व के कोने कोने में जहाँ भी जैन लोग रहते हैं वहां पर पुरे उत्साह के साथ नवपद ओली की आराधना की जाती है. प्रतिवर्ष आश्विन एवं चैत्र मॉस की शुक्ल सप्तमी से पूर्णिमा तक ९ दिन ९ पदों की आराधना की जाती है.

नवपद, श्री नेमिनाथ स्वामी मंदिर, अजीमगंज 
जैन शास्त्रों के अनुसार श्रीपाल का कोढ़ रोग दूर करने के लिए मयनसुंदरी ने गुरुमुख से नवपद की महिमा सुन कर नवपद ओली की आराधना की थी. श्रीपाल-मैनासुन्दरी द्वारा सिद्धचक्र तंप करने से यह जगत में प्रसिद्द हुआ और तब से बड़ी संख्या में लोग नवपद ओली की आराधना ९ दिन आयंबिल कर करते आ रहे हैं.

इन ९ दिनों में अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, सम्यग दर्शन, ज्ञान, चारित्र एवं टप पद की आराधना की जाती है एवं इनके वर्णानुसार क्रमशः चावल, गेहूं, चना, मुंग, उडद एवं अंत के ४ दिन फिर से चावल की आयंबिल की जाती है एवं विधि पूर्वक नवपदों (सिद्धचक्र) की उपासना कर मोक्ष मार्ग को प्रशस्त किया जाता है.

अधिक जानने के लिए पढ़ें
The Navpad Oli (Ayambil) Festival of India's Jain Community 


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Tuesday, September 27, 2016

विश्वप्रसिद्ध श्री शीतलनाथ मंदिर कोलकाता का १५० वर्ष


श्री शीतलनाथ स्वामी, मूलनायक 
राय बद्रीदास बहादुर मुकीम द्वारा कोलकाता में सं १८६७ में निर्मित विश्वप्रसिद्ध श्री शीतलनाथ मंदिर का १५० वर्ष पूरा होने जा रहा है. इस अवसर पर तीन दिवसीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन दिनांक २६, २७, २८ फरबरी, २०१६ को किया जा रहा है.

शीतलनाथ स्वामी का भव्य मंदिर 
उल्लेखनीय है की यह भव्य मंदिर पूरी तरह कांच से बना हुआ है, और अपनी कलात्मकता के लिए विश्व में विख्यात है, यह मंदिर कोलकाता के पर्यटक मानचित्र में "पारसनाथ मंदिर" एवं "मुकीम जैन टेम्पल गार्डन" के रूप से अंकित है। इस मंदिर की प्रतिष्ठा लखनऊ गद्दी के श्रीपुज्य श्री कल्याण सूरी जी महाराज के कर कमलों द्वारा हुई थी. यह मंदिर श्रद्धालुओं के अतिरिक्त देशी-विदेशी पर्यटकों एवं कलाप्रेमियों के भी आकर्षण का केंद्र है. सं १९३५ में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा इस मंदिर पर एक डाक टिकट भी जारी किया गया था।

इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है, न सिर्फ मंदिर का अंदरूनी व बाहरी भाग बल्कि साथ का बगीचा भी कांच से बना हुआ है जो इसकी सुंदरता को चार चाँद लगाता है।  सुन्दर तालाब, फव्वारे, एवं अन्य सजावट ने इसे और भी निखारा है, तभी तो पर्यटकों की आँखें इसे निहारते हुए नहीं थकती।

मंदिर के सामने लगी राय बद्रीदास बहादुर की मूर्ति
सं १९०५ में प्रकाशित "The glimpses of Bengal" में लिखा गया है की राय बद्रीदास जी ने स्वयं इस मंदिर की वास्तुकला का डिज़ाइन किया था साथ ही इसमें कांच की कलाकारी का भी. राय बद्रीदास बहादुर को तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने "राय बहादुर" एवं "मुकीम" की उपाधि प्रदान की थी।  वे तत्कालीन वाइसराय के भी जोहरी थे.

महावीर स्वामी जैन मंदिर कोलकाता के १५० वर्ष


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Monday, September 26, 2016

Bharatiya Chikitsak Ratan award to Dr. S C Bhandari


Bharatiya Chikitsak Ratan award to Dr. S C Bhandari

Dr. S C Bhandari, a renowned eye specialist in Jaipur has received the Bharatiya Chikitsak Ratan award at constitution club, New Delhi for his outstanding performance and services to the mankind. Global Achievers Foundation has selected Dr. Bhandari  for the award and The Economic for Health and educational Growth organized the ceremony. Ramdas Bandu Athawale, The union minister was the Chief guest at the ceremony.

Dr. S C Bhandari Receiving award 
 Dr. Bhandari had been serving at Nanavati hospital, Mumbai as an eye specialist and also acting as official eye specialist for Indian cricket team. He left the prestigious jobs and started serving humankind free of cost. He joined Amar Jain Hospital at Jaipur, a charitable healthcare institute and is serving there till date for philanthropic causes.

Congratulations to Dr. Bhandari and his family for this felicitation.

Sourav Kothari is selected for Arjuna award


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Saturday, September 24, 2016

गणिवर्य मणिरत्नसागर हिन्दू आध्यात्मिक मेले में


गणिवर्य श्री मणिरत्नसागर जी हिन्दू आध्यात्मिक मेले में

मणिरत्नसागर जी हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले को संबोधित करते हुए 
परम पूज्य स्वर्गीय आचार्य श्रीमज्जिन महोदयसागर सूरीश्वर जी महाराज साहब के पट्ट शिष्य एवं खरतर गच्छाधिपति परम पूज्य आचार्य श्रीमज्जिन मणिप्रभसागर सूरीश्वर जी महाराज साहब के आज्ञानुवर्ती गणिवर्य श्री मणिरत्नसागर जी महाराज साहब ने जैन धर्म के प्रतिनिधि के रूप में हिन्दू अध्यात्मिल एवं सेवा मेले के उद्घाटन के अवसर  पर कल २३ सितंबर को जयपुर में अपनी निश्रा प्रदान की. ओसवाल परिषद्, जयपुर के मंत्री श्री ज्योति कोठारी गणिवर्य श्री को मंच तक ले पधारे.
मणिरत्नसागर जी, दैनिक भास्कर, २४ सितंब, २०१६ 
इस अवसर पर अपने संक्षिप्त एवं सारगर्भित प्रवचन से उन्होंने सभी को प्रभावित किया. उन्होंने कहा की जैन धर्म अहिंसक धर्म है एवं प्राणीमात्र की समानता में विश्वास रखता है. उन्होंने यह भी बताया की किस प्रकार मानवता की सेवा के लिए उन्होंने राजस्थान के डांग क्षेत्र में जाटव समाज को व्यसन मुक्त बना कर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ा है।  आपके सान्निध्य में जाटव समाज द्वारा दिल्ली से पालीताना तक की गई ९० दिवसीय "अहिंसा यात्रा" का जिक्र समारोह के संचालक द्वारा किया गया. उन्होंने हिन्दू समाज के सभी वर्गों को जोड़ने के लिए एवं भारत की आध्यात्मिक चेतना को पुनर्जागृत करने के प्रयास के लिए आयोजकों को धन्यवाद दिया एवं इस के लिए शुभाशीर्वाद प्रदान किया।

समारोह में राजस्थान के माननीय राज्यपाल श्री कल्याण सिंह जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे एवं सनातन धर्म के कई विशिष्ट संत गांव की उपस्थिति सभा का गौरव बढा रही थी. आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी, स्वामी मधुपंडित दास जी (अक्षय पात्र के संस्थापक), संवित सोमगिरि जी आदि संतों ने भी अपने प्रवचन से लोगों को लाभान्वित किया।

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Thursday, September 22, 2016

जयानन्द मुनि की ११ वीं पुण्यतिथि


परम पूज्य श्री जयानन्द मुनि की ११ वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में २० सितंबर, २०१६ को मोती डूंगरी दादाबाड़ी, जयपुर में श्रीमाल सभा के तत्वावधान में भक्ति संध्या का आयोजन किया गया. परम पूज्य श्री जयानन्द मुनि खरतरगच्छीय परंपरा के अद्भुत एवं अवधूत योगी थे. भक्तिरस उनके ह्रदय के कोने कोने में छलकता था. ख़ास कर श्रीमद देवचंद जी और आनंदघन जी के भजन उन्हें बड़े प्रिय थे और वो इन्हें अक्सर गाया करते थे.

कार्यक्रम का प्रारम्भ श्री पारस महमवाल, कार्यक्रम संयोजक ने मंगलाचरण के द्वारा किया।  कोल्कता खरतर गच्छ संघ के अध्यक्ष श्री विनोद चन्द जी बोथरा एवं कोलकाता के स्वनामधन्य राय बद्रीदास बहादूर मुकीम परिवार के श्री अशोक कुमार जी मुकीम ने परम पूज्य श्री जयानन्द मुनि के आगे दीप प्रज्वलित किया.

शंखेश्वर से पधारे हुए प्रसिद्द भक्तिरस गायक मेहुल ठाकुर ने शास्त्रीय संगीत में पूज्य जयानंद जी महाराज के प्रिय भजनों का गायन किया। वाचक यशोविजय जी कृत "हम तो मगन भये प्रभु ध्यान में" श्रीमद देवचंद जी चौवीसी के भजन "जगत दिवाकर जगत कृपानिधि" ने सबका मन मोह लिया। उन्होंने आनंदघनजी कृत कई भजन भी गाये।

जयपुर के प्रसिद्द कलाकार गौरव जैन एवं उनकी पत्नी दीपशिखा जैन ने भी अच्छी प्रस्तुति दी. "झीनी रे चदरिया" एवं "पंख होते तो उड़ आती मैं"  सभी को बहुत पसंद आई. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री विनय जी चोरडिया एवं विशिष्ट अतिथि श्री बाबूलाल जी दोषी व श्री कुशल चन्द जी महमवाल थे.

 भक्ति संध्या का समापन  मेहुल ठाकुर ने "म्हारा प्रभुनी वधाई बाजे छे" से की. कार्यक्रम का संचालन पारस महमवाल ने किया।

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#जयानन्द मुनि, #श्रीमददेवचंद #आनंदघन, #भक्ति संध्या #खरतरगच्छ
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Monday, September 19, 2016

जैन महिलाओं के लिए उपयोगी वेबसाईट जैन मार्केट



जैन महिलाओं के लिए उपयोगी वेबसाईट जैन मार्केट www.jain.market 

 जैन समाज में अनेक महिलायें अनेक प्रकार की खाद्य सामग्री, कपडे, हस्तकला की चीजें आदि बना कर बेचती हैं और अनेकों के लिए यह उनकी आजीविका का भी साधन होता है. कुछ महिलाएं शौक से भी ये काम करती हैं. इनके द्वारा बनाई गई खाने पीने की चीजें प्रायः शुद्ध जैन विधि से बनी हुई होती है. इसके अतिरिक्त इनलोगों के द्वारा सुन्दर,कलात्मक, एवं उपयोगी अन्य सामग्रियां  भी बनाई जाती है. लोग इन्हें खरीदना भी चाहते हैं परंतु घरेलु महिलाओं के लिए इन्हें बेचना कई बार दिक्कत का काम होता है.

जैन महिला द्वारा निर्मित मिठाई गुजिया 
           इस बात को ध्यान में रखते हुए एक नई वेबसाइट (www.jain.market) बनाई जा रही है जिसके माध्यम से ये महिलाएं अपना सामान बेच सकती हैं और कोई भी व्यक्ति इनसे सामान खरीद सकता है. यह वेबसाइट अत्याधुनिक होगा लेकिन इस बातका  भी ध्यान रखा गया है की साधारण पढ़ी लिखी घरेलु महिलाएं भी इसका इस्तेमाल कर अपना सामान बेच सकें. इसका वेब एड्रेस भी बहुत सरल है.

यह जैन महिलाओं को प्रोत्साहन देनेवाली एवं उन्हें डिजिटल प्लेटफार्म का लाभ पहुचाने वाली योजना है और जैन महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है.

आप सभी से निवेदन है की इसके बारे में अधिक से अधिक लोगों ख़ास कर महिलाओं को बताएं जिससे जैन समाज के सभी लोग उसका लाभ ले सकें। आप सभी से यह भी निवेदन है की उन्हें इस वेबसाइट में रजिस्टर करने में मदद करें क्यों की यह भी संभव है की इंटरनेट से अनजान महिलाएं भी व्यापार के क्षेत्र में कदम रखना चाहती हों.

जैन मार्केट  में इस समय केवल रजिस्ट्रेसन का काम चल रहा है एवं कोई भी जैन व्यक्ति विक्रेता अथवा उपभोक्ता के रूप में इसमें रजिस्टर हो सकता है.

#जैन #जैनमार्केट #महिलाएं #खाद्य #जैनखाद्य #जैनसमाज #व्यापार
#Jain #JainMarket #Women #Food #JainFood #JainCommunity

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Friday, September 16, 2016

महावीर स्वामी जैन मंदिर कोलकाता के १५० वर्ष



Mahavira Swami, main idol at Kolkata Mahavira Swami temple
Mahavira Swami, Kolkata
मानिकतल्ला, कोलकाता  स्थित श्री महावीर स्वामी जैन मंदिर के १५० वर्ष पुरे होने जा रहे हैं. श्री सुखलाल जौहरी ने सं १९६८ में इस विशाल एवं सुरम्य मंदिर का निर्माण कराया था. इस तीर्थोपम परिसर में जैन दादाबाड़ी, राय बद्रीदास बहादूर मुकीम द्वारा निर्मित श्री शीतलनाथ स्वामी मंदिर एवं खारड़ परिवार द्वारा निर्मित श्री चंदाप्रभु स्वामी का मंदिर भी अवस्थित है.

श्री महावीर स्वामी का यह विशाल जिनालय अनेकों जिनविम्बों से सुशोभित होती है एवं  होने वाली अधिकांश पूजाएं भी इसी मंदिर में होती है. तीर्थोपम परिसर में होने के कारण यहाँ प्रतिदिन हज़ारों दर्शनार्थी आते हैं एवं पूजा, दर्शन कर अपना मानव जीवन सफल बनाते हैं.

समवशरण चित्र, महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता 

नक्काशी एवं कला, महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता 

सन १९६८ में माघ शुक्ल दशमी के शुभ दिन इस मंदिर की प्रतिष्ठा हुई थी और आगामी वर्ष २०१७ में माघ शुक्ल दशमी ६ फरवरी को पद रहा है. यह दिन इस मंदिर का १५० वां प्रतिष्ठा दिवस है और इसी दिन से मंदिर में ध्वज चढ़ा कर एक वर्षीय कार्यक्रम का शुभारम्भ किया जायेगा। इस समय मंदिर का विशेष रूप से शिखर के जीर्णोद्धार का काम भी चल रहा है एवं आशा है की कार्यक्रम के समय तक यह काम भी पूरा हो जायेगा। श्री चेतन कोठारी इस कार्य में विशेष रूचि ले रहे हैं.

 इस जिनालय का देखरेख इस समय श्रीमती पुतुल कोठारी परिवार द्वारा किया जा रहा है एवं  सदस्यों की भावना है की इस प्राचीन जिनालय के १५० वर्ष पूर्ती के उपलक्ष्य में भव्य कार्यक्रम रखा जाए और उसे पुरे वर्ष भर चलाया जाए. कार्यक्रम की रूपरेखा जयपुर के श्री ज्योति कोठारी एवं अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विधिकारक श्री यशवंत गोलेच्छा  मार्गदर्शन में बनाया जा रहा है।

सभी साधर्मी भाइयों से निवेदन है की इस प्राचीन जिनालय के १५० वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर होनेवाले कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में पधार कर पुण्य लाभ अर्जित करें।

अल्पसंख्यकों के लिए राज्य सरकार का १०० करोड़ का बजट : अतिरिक्त मुख्य सचिव


पानी बचाने के लिए जैन समाज आगे आए और अपना धर्म निभाये


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Monday, May 30, 2016

अल्पसंख्यकों के लिए राज्य सरकार का १०० करोड़ का बजट : अतिरिक्त मुख्य सचिव


Additional Chief secretary Rajasthan and Secretary Rajasthan Chamber of Commerce at Vardhaman Infotech
दर्शन कोठारी, के एल जैन एवं विपिन चन्द्र शर्मा छात्रों के साथ
श्री विपिन चन्द्र शर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्थान सरकार ने कहा की सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए प्रति वर्ष १०० करोड़ का बजट रखा है. श्री शर्मा ३० मई को वर्धमान इंफोटेक द्वारा आयोजित  उद्यमिता एवं प्रवंधन कौशल विकास कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे. ज्ञातव्य तथ्य ये है की जैन समाज अल्पसंख्यक वर्ग में आता है. इस अवसर पर उन्होंने कहा की प्रभु के प्रति समर्पण, गुरु की आज्ञा का पालन एवं माता पिता की सेवा ये तीन चीजें ऐसी है जो किसी को सफल उद्यमी बनाती है.

वर्धमान इंफोटेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दर्शन कोठारी ने बताया की यह कार्यक्रम मेगा डिजिटल प्रोजेक्ट क्योरसिटी के साथ मिल कर किया जा रहा है. इस डिजिटल प्रोजेक्ट में ६ लाख चिकित्सकों का डेटा तैयार किया जा रहा है और उसे मरीजों के लिए उपलव्ध कराया जायेगा। क्योरसिटी के नीरज ने क्योरसिटी मेगा प्रोजेक्ट के बारे में बताते हुए कहा की किस तरह से इसका काम चल रहा है. उन्होंने दर्शन कोठारी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा की उनके तकनीकी एवं व्यापारिक ज्ञान की वजह से ही इस प्रोजेक्ट में गति आई है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के मानद सचिव श्री के एल जैन ने कहा की सफल उद्यमी एवं प्रवन्धक बनने के लिए विनम्र व समर्पित रहना एवं सदा पोसिटिव सोच रखना अति आवश्यक है. क्योरसिटी के मार्केटिंग अधिकारी दिवस कायथ ने कार्यक्रम का सञ्चालन किया एवं अंत में श्री ज्योति कोठारी ने सभी को धन्यवाद अर्पित किया।

Developing entrepreneurship and managerial skills at Vardhaman Infotech

 

 

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Monday, April 25, 2016

Popular questions about Jainism in Google search


24 Tirthankara in a Jain symbol 

Jain Tirthankara idol 
I found these three questions very popular in Google search about Jainism and prompted to answer. These three popular questions are as follow:

1. What is the religion Jainism?
2. Who is the founder of Jainism in India?
3. What are the basic beliefs of Jainism?

I am trying to answer all three one by one.
 
1. The first question is What is the religion Jainism?

The word Jain is derived from "Jina" a Sanskrit word, that means conqueror. One, who has conquered one self, one's cravings, desires, anger, greed etc is a Jina. A Jina, after achieving omniscience, preaches the path of liberation. One who follows Jina's preaching is a Jain and doctrine o a Jina is Jainism.

2.  The second question is Who is the founder of Jainism in India?

Jainism is eternal. Hence, there is no question of any founder. However, "Tirthankara" reestablish and restrengthen basic principles of Jainism from time to time and those reestablishing the Dharma are called founder many times.

Rishabhdev Adinath is the first Tirthankara in this Avasarpini era (Half-time-cycle according to Jain faith) and Lord Mahavira is the 24th and last. Rishabhdev is a prehistoric figure whereas Mahavira is well known to modern historians. Rishabhdev is a founder of Jainism for laymen and many one mistakes Mahavira as a founder of Jainism in India.

3. The third question is What are the basic beliefs of Jainism?

As I indicated in first answer that basic goal of Jainism is liberation, liberation from all sorrows by eliminating all Karma bondage. Jainism believes that an individual Atman (Soul) moves in birth cycles and face miseries due to ignorance (Mithyatwa-Ajnyan). When that mundane soul comes into contact of an omniscient or an enlightened person and have faith on that enlightened; the mundane soul starts getting wisdom. Gradually, by virtue of A. Right view 2. Right knowledge and 3. Right conduct, he or she liberates himself or herself.

1. Ahimsa 2. Satya 3. Asteya 4. Brahmacharya and 5. Aparigraha are main five vows (Vrata) related to right conduct.


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Sunday, April 24, 2016

जयपुर के मोहनबाड़ी में महाप्रभाविक भक्तामर महापूजन का आयोजन


मोहनवाड़ी में निर्माणाधीन जैन मंदिर का प्रारूप


ऋषभ प्रसाद का नक्शा


मोहनवाड़ी में निर्माणाधीन जैन मंदिर का प्रारूप २ 
कल दिनांक २३ अप्रैल २०१६ को जयपुर के मोहनबाड़ी में निर्माणाधीन श्री आदिनाथ जिनालय के प्रथम पाषाण का मुहूर्त संपन्न हुआ. प्रातः ६ बजे मंत्रोच्चारण के साथ श्रीमती प्रेमबाई कमलचंद सुराणा परिवार के द्वारा प्रथम शिला रखी गई.

प्रातः ९ बजे से महाप्रभाविक भक्तामर महापूजन का आयोजन रखा गया जिसमे लगभग ३०० जोड़ों ने बैठ कर पूजा भक्ति का लाभ लिया।  इस अवसर पर नृत्य गीत आदि के माध्यम से भगवान् श्री ऋषभ देव की भक्ति की गई. विधिकारक श्री यशवंत गोलेच्छा ने विधि-विधान का सम्पूर्ण कार्यक्रम संपन्न करवाया।

इस अवसर पर जैन विद्वान ज्योति कोठारी ने भक्तामर स्तोत्र के विशिष्ट एवं अन्तर्निहित अर्थों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अनेक आगमों के उद्धरणों से परमात्मा के पांचों कल्याणकों का सम्वन्ध भक्तामर स्तोत्र की गाथाओं से जोड़ते हुए सारगर्भित तरीके से परमात्मा, भक्तामर स्तोत्र एवं भक्ति की विवेचना की.

 ज्योति कोठारी ने परमात्मा के आगे भक्तिवश नृत्य का महत्व बताते हुए कहा की हमारा अहंकार ही हमें प्रभु के आगे नृत्य करने से रोकता है और जो व्यक्ति जिनेश्वर देव के आगे नहीं नाचता सम्पूर्ण संसार उसे अपने इशारों पर नाचता है जबकि प्रभु के आगे नृत्य करने से व्यक्ति अहंकार और पाप कर्म के वंधनो से मुक्त होता है. उनके आह्वान पर उपस्थित सम्पूर्ण जनसमुदाय ने खड़े हो कर प्रभु के आगे नृत्य कर जिन भक्ति प्रदर्शित की.

यह सम्पूर्ण कार्यक्रम प पू मरुधर ज्योति साध्वी श्री मणिप्रभा श्री जी की निश्रा में संपन्न हुआ. प पू साध्वी श्री विद्युतप्रभा श्री जी एवं प पू साध्वी श्री हेमप्रज्ञा श्री जी ने अपने मधुर गायन से सबको मन्त्र मुग्ध किया। कार्यक्रम के अंत में साधर्मी वात्सल्य का आयोजन किया गया जिसमे बड़ी संख्या में लोग सम्मिलित हुए. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री प्रकश चन्द लोढ़ा का विशेष योगदान रहा.


आइये हम सब मिलकर पानी बचाएं, इसका दुरूपयोग बंद करें

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Wednesday, April 13, 2016

पानी बचाने के लिए जैन समाज आगे आए और अपना धर्म निभाये



कटगोला जैन मंदिर में तालाव, मुर्शिदाबाद 

जैन दादाबाड़ी में तालाव, कोलकाता 

जैन समाज से मेरा निवेदन है की पानी  बचाने के लिए आगे आए और अपना धर्म निभाये। देश आज पानी के भयंकर संकट  गुजर रहा है. देश के १० राज्य सूखाग्रस्त घोषित हो चुके हैं. देश के सर्वोच्च न्यायालय एवं कई उच्च न्यायालयों ने केंद्र एवं राज्य सरकारों को सूखे का संज्ञान लेकर त्वरित कार्यवाही करने  के लिए कहा है. मुंबई उच्च न्यायालय ने IPL के १३ मैचों को सूखे के कारण महाराष्ट्र  से बाहर कराने का आदेश दिया है. लातूर लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं और सरकारों को रेल भर भर कर वहां पानी भेजना पड़ रहा है.

जैन धर्म ही एकमात्र ऐसा धर्म है जिसमे पानी में जीव एवं पानी बहांने में जीव-हिंसा का पाप माना गया है और इसीलिए जैन लोग धार्मिक कारण से (परम्परागत रूप से) पानी का कम इस्तेमाल करते रहे हैं. परन्तु ऐसा देखने में आ रहा है की आज के जैन लोग भी पानी बचाने में उतने तत्पर नहीं रहे. मारवाड़ी समाज में कहावत थी  पानी को घी से भी ज्यादा संभल  खर्च करना चाहिये पर आज इस समाज में भी खूब पानी ढोला जाता है. आज जैन एवं मारवाड़ी समाज भी अन्य समाजों के जैसे पानी का दुरूपयोग करने लगा है.

पानी के महत्व को समझते हुए हमें फिर से अपनी पुरानी परम्पराओं को पुनर्जीवित करना है और जल-संरक्षण के महत्व को समझना है. जैन समाज इस नए सामाजिक क्रांति का अग्रणी बन सकता है. मौसम विभाग ने इस वर्ष अच्छे मानसून की भविष्यवाणी की है यदि हम अभी से सचेत हो कर जल-संरक्षण की अपनी पुराणी विधाओं का इस्तेमाल करें तो आनेवाले कई वर्षों तक हमें पानी के लिए तरसना नहीं पड़ेगा.

अनेक दादावाडियाँ, नसियां, आदि जैन समाज की धरोहर हैं जहाँ पर्याप्त जमीन है. इन स्थानों पर तालाव, कुएं, टांके आदि का निर्माण करवा कर  वर्षा जल संरक्षित किया जा सकता है. इन कामों के लिए तकनीक सहज ही उपलव्ध है, साथ ही इसमें अनेक तरह की सरकारी मदद भी मिलती है. केंद्र सरकार ने इस वर्ष के बजट में इस काम के लिए बहुत बड़ी राशि का प्रवन्ध भी किया है.

आइये हम सब मिलकर पानी बचाएं, इसका दुरूपयोग बंद करें एवं प्रकृति से प्राप्त इस अमूल्य धन को सहेजने का प्रयत्न करें। जैन समाज इस कार्य में अग्रणी बने यही भावना है.

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Thursday, April 7, 2016

जैन समाज एवं सुचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में व्यापार की सम्भावनाएं


जैन समाज एक प्रगतिशील, विचारवान, शिक्षित एवं समृद्ध समाज है. अपने परिश्रम, लगन एवं सूझबूझ से इस समाज ने समृद्धि के शिखर को छुआ है. अमेरिकी इतिहासकार पॉल डुंडस ने एक जगह ओसवाल जैन समाज के बारे में लिखा है की राजस्थान के सूखे मरुस्थल से खली हाथ चला हुआ इस समाज का वणिक वर्ग------------- कुछ ही वर्षों में गंगा-यमुना डेल्टा की आधी संपत्ति पर कब्ज़ा जमा लिया था. उस समय भारत ही नहीं पुरे विश्व का सबसे धनाढ्य परिवार था जगत सेठ परिवार। दिल्ली के मुग़ल बादशाह भी अक्सर उनके कर्जदार हुआ करते थे.  बीसवीं सदी के प्रथमार्ध तक भारत के व्यापार जगत में ओसवाल जैन समाज का दवदवा था परन्तु स्वतंत्रता के बाद से ही व्यापार जगत में ओसवाल समाज कमजोर होने लगा. यद्यपि यह समाज आज भी समृद्ध है परन्तु अन्य समजो के मुकाबले यह पिछड़ने लगा है.

बीसवीं सदी के शुरुआत से ही जब भारत में यांत्रिकीकरण होने लगा और भारतीय व्यापारी उसमे भागीदारी करने लगे- जैन समाज ने केवल व्यापार में ही रूचि ली और बहुत ही कम संख्या में जैन व्यापारिक घरानों ने उद्योग लगाने की राह पकड़ी। इसका फल ये हुआ पारसी, माहेश्वरी, अग्रवाल आदि समाज के लोगों में से बड़े औद्योगिल घरानों की स्थापना हुई और जैन समाज के लोग मात्र उन औद्योगिक घरानों के वितरक बन कर रह गए. हाँ, हीरा उद्योग एक ऐसा उद्योग था जिस पर जैन समाज की गहरी पकड़ थी और १९६० के दशक से आज तक केवल हीरा ही नहीं अपितु सम्पूर्ण रत्न एवं आभूषण उद्योग में जैन समाज का ही वर्चस्व है.

बीसवीं सदी के अंतिम दो दशकों में भारत की अर्थनीति ने फिर से एक नई दिशा पकडी. पुरे विश्व में सुचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की धूम थी. भारत में भी इसकी बयार आने लगी. कई नए उद्यमियों ने इस क्षेत्र  में प्रवेश किया। विप्रो, इनफ़ोसिस, टीसीएस जैसी कई बड़ी बड़ी कम्पनियाँ इस क्षेत्र की की दिग्गज के रूप में सामने आई. सैंकड़ो की संख्या में माध्यम दर्ज़ की और हज़ारों छोटी कंपनियों का भी आगाज हुआ. आज सुचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लाखों की संख्या में कम्पनियाँ कार्यरत है और लगातार उज्वल भविष्य की और बढ़ रहीं हैं.

दिल्ली, मुंबई, पुणे, बंगलुरु, हैदराबाद, जैसी पारम्परिक शहरों के साथ अहमदाबाद, जयपुर, इंदौर, कोल्कता आदि शहर भी इस क्षेत्र की प्रगति से अछूते नहीं रहे. गौरतलब है की इन सभी शहरों में जैन समाज का काफी वर्चस्व है और यहाँ पर जैन समाज के बड़े व्यवसायिक घराने लम्बे समय से कार्यरत हैं. इसके बाबजूद आश्चर्य की बात ये है की सुचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में जैन व्यापारियों ने कोई विशेष कदम नहीं रखा. सही में कहा जाये तो जैन व्यापारी इस क्षेत्र की ताक़त आंकने में चूक गए.

२०१४ में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नै सरकार बनने के बाद इस उद्योग की तरक्की और भी तेज़ हो गई क्योंकि सरकार ने डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने को अपना लक्ष्य बना लिया। अभी भी समय है, जैन व्यापारियों को अपने परंपरागत रवैय्ये को छोड़ कर नए क्षेत्रों की ओर भी ध्यान देना चाहिए, अन्यथा वो दिन दूर नहीं जब जैन समाज देश के आर्थिक जगत में अपनी शक्ति खो बैठेगा।

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