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Wednesday, August 19, 2015

संथारा के अधिकार के लिए इतिहास दोहराने की जरुरत


jain unity in protest for right of santhara
संथारे के अधिकार के लिए संघर्ष में जैन एकता

 संथारा (सल्लेखना) के अधिकार के लिए जैन समाज को इतिहास दोहराने की जरुरत है. दो वर्ष पूर्व सं २०१३ में जयपुर में राष्ट्रसन्त मुनि श्री ललितप्रभसागर जी, राष्ट्रसन्त मुनि श्री चन्द्रप्रभसागर जी, एवं राष्ट्रसन्त मुनि श्री तरुणसागर जी का ऐतिहासिक सामूहिक चातुर्मास दिगम्बर - श्वेताम्बर जैन एकता के लिए मील का पत्थर का सावित हुआ था. अब जैन समाज को अपने आस्था और उपासना के अधिकार को पुनः प्राप्त करने के लिए उसी इतिहास को दोहराना होगा और जैन एकता की मिसाल फिर से कायम करनी होगी। विशेष कर २४ अगस्त, २०१५ को पुरे भारत में होनेवाले सभी कार्यक्रमों में संमिलित होकर  हमारी संस्कृति को बचाने का प्रयास करना होगा।

अभी कुछ ही दिनों पूर्व, राजस्थान उच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में प्राचीन काल से चले आ रहे संलेखना (संथारा) धर्म की आराधना पर रोक लगा दी थी एवं इसे आत्महत्या माना था।  जबकि सभी जैन आगमो एवं शास्त्रों में इसे आत्म-अवलोकन एवं आत्मलीनता माना गया है जहाँ उत्कृष्ट साधक राग-द्वेष एवं जीवन-मृत्यु की भावना से पर जा कर अपनी आध्यात्मिक विशुद्धि करता है. जैन आगमो में यह स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है की संलेखना (संथारा) में मृत्यु की कोई इच्छा नहीं होनी चाहिए, ऐसे में इसे आत्महत्या तो क्या इच्छा मृत्यु भी नहीं कहा जा सकता। 

यह निर्णय जैनो की आस्था एवं एवं धर्म की आत्मा पर प्रहार है और जैन समाज अपनी आस्था के लिए संगठित एवं सक्रीय है. इस निर्णय का विरोध पुरे भारत भर में हो रहा है एवं न्यायालयीन प्रक्रिया के अनुसार  एक पुनर्विचार याचिका भी राजस्थान उच्च न्यायालय में १८ अगस्त को दाखिल कर दी गई है.

जयपुर में श्वेताम्बर-दिगंबर समुदाय की संयुक्त सभा में एक समिति भी गठित की गई है जिसमे सभी जैन समुदायों के प्रतिनिधियों को संमिलित किया गया है जिससे जैन एकता की भावना और भी पुष्ट हुई है. इस समिति में सर्वश्री पद्मबिभूषण डी आर मेहता, विमल चन्द सुराणा, अशोक पाटनी, नवरतनमल कोठारी, नरेश सेठी, विवेक काला, हीराभाई चौधरी, राजेंद्र गोधा, विमल डागा,  एवं राजेन्द्र बरडिया जैसे गणमान्य व्यक्ति संमिलित हैं. इस पवित्र कार्य में जैन समाज के सभी समुदायों के पूज्य साधु-साध्विओं का पूर्ण समर्थन प्राप्त है.

इस संदर्भ में उल्लेखनीय तथ्य ये है की राजस्थान सरकार में गृह एवं कानून मंत्री श्री गुलाबचन्द कटारिया ने जैन समुदाय को सरकार का समर्थन देने की घोषणा की है एवं कहा है की सरकार न्यायालय में जैनो के पक्ष में लड़ेगी।

आप सभी से भी निवेदन है की इस पुनीत कार्य में तन-मन-धन से सहयोग कर जैन एकता की मिशाल कायम करें एवं धर्म के प्रति अपनी आस्था का परिचय दें.

ज्योति कुमार कोठारी,
सकल जैन समाज, जयपुर

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Jain communities unite to protest the Judgement against Santhara







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1 comment:

  1. http://www.jainmantras.com/%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%98-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97/

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