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Saturday, October 25, 2014

जैन विधि से दिवाली (दीपावली) पूजन



जैन विधि से दिवाली पूजन, जयपुर 

जैन विधि से दिवाली (दीपावली) पूजन


जैन विधि से दिवाली (दीपावली) पूजन चढ़ावा 


दिवाली (दीपावली) के दिन प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी जैन विधि से  दिन के वक्त चरम तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी एवं गणधर श्री गौतम स्वामी का पूजन किया। दिवाली भारत भर में लक्ष्मी पूजन के लिए जाना जाता है एवं पूरा हिंदु समाज इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा करता है. कहीं कहीं पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा भी होती है.

जैन धर्म के अनुयायी भी लगभग इसी प्रकार पूजन करते हैं. परन्तु हम भूल जाते हैं की दिवाली भगवन महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस भी है और इस दिन उनकी पूजा विशेष रूप से होनी चाहिए। जैन विधि के अनुसार सभी प्रकार की पूजाएं दिन के समय ही होती है रात्रि में नहीं।

हम इस दिन भगवन महावीर की प्रतिमा का अभिषेक कर अष्ट प्रकारि पूजा करते हैं. इसके पहले रंगोली से समवशरण बना कर उसके ऊपर एक चौकी ले प्रभु की प्रतिमा, चित्र आदि विराजमान करते हैं. साथ ही भगवन के प्रथम गांधार अनंत लव्धिनिधान श्री इंद्रभूति गौतम स्वामी को भी विराजमान करते हैं.

ऊपरदिए गए चित्र में सिंहासन पर भगवन की प्रतिमा एवं गौतम स्वामी के चरण के दर्शन हो रहे हैं. साथ ही एक महावीर स्वामी एवं गौतम स्वामी की फोटो भी है. भवन महावीर को गोदुहिकासन में केवल ज्ञान प्राप्त हुआ था और उस मुद्रा की एक मूर्ति भी चित्र में दर्शन हो रहे हैं.

अष्ट प्रकारि पूजन के बाद आरती, मंगल दीपक कर शांति कलश के जल का छिड़काव पुरे घर एवं पड़ौसियों के यहाँ भी किया गया. इसके बाद चैत्यवंदन करजैन विधि से दिवाली पूजन सम्पूर्ण किया गया.

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Friday, October 10, 2014

जयपुर नगरपालिका चुनाव एवं जैन समाज

जैन समाज का अपर जान समूह 

जयपुर शहर में नगरपालिका का चुनाव नवंबर माह में होने जा रहा है. किसी भी दिन चुनाव की घोषणा हो सकती है. नगरपालिका चुनाव में जैनो को अधिक से अधिक संख्या में भाग लेना चाहिए। जयपुर का जैन समाज व्यापार एवं सामाजिक धार्मिक कार्यों में तो अग्रणी रहता है परन्तु राजनीती में पीछे. जनसँख्या अनुपात को देखते हुए जैन समाज का राजनैतिक प्रतिनिधित्व बहुत ही कम है. 

जयपुर के प्रथम सांसद श्री दौलतमल जी भंडारी जैन थे परन्तु राजस्थान उच्च्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त होने के कारन उन्होंने सांसद का पद छोड़ दिया था. उसके बाद यहाँ से कोई भी जैन सांसद नहीं बना. जैन समाज ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़ कर भाग लिया था. श्री अर्जुनलाल सेठी स्वतंत्रता संग्राम के पुरोधा थे. उनके सान्निध्य एवं प्रेरणा ने जैनो को इस ओर बहुत आकर्षित किया। श्री पूर्ण चन्द्र जैन, श्री सिद्धराज ढढ्ढ़ा, श्री जवाहरलाल जैन, श्री राजरूप टांक, श्री सरदारमल गोलेच्छा, श्री वसन्तीलाल मुकीम, कर्नल कासलीवाल आदि अनेक जैनो ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग ले कर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मज़बूर किया। 

गत २०१३ के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से संजय बफना के रूप में एकमात्र जैन को टिकट दिया था परन्तु भारतीय जनता पार्टी ने किसी जैन को टिकट नहीं दिया। इसी प्रकार लोकसभा चुनाव २०१४ में दोनों ही पार्टियों ने जैन समाज के व्यक्ति को टिकट नहीं दिया। 

जयपुर में जैनो की बहुत बड़ी आबादी है जिसकी संख्या लगभग ढाई से तीन लाख है. इससे भी बड़ी बात है की यहाँ के शिक्षा, स्वास्थ्य आदि जनहितकर कार्यों में जैन समाज का अतुलनीय योगदान है. सुबोध, श्वेताम्बर जैन, वीर बालिका, आचार्य भिक्षु, महावीर विद्यालय जैसे जैन शिक्षा प्रतिष्ठान जयपुर की शान हैं जिनमे काम से काम पचास हज़ार विद्यार्थी अध्ययन करते हैं. अन्य किसी समुदाय के इतने शिक्षा प्रतिष्ठान नहीं हैं. ये सभी शिक्षा के मंदिर अपनी गुणवत्ता एवं जनसेवा के लिए जाने जाते हैं. 

इसी प्रकार स्वास्थ्य सेवा में भी जैन समाज अग्रणी है. महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर पैर के लिए विश्व प्रसिद्द है. यह अकेली संस्था जितने पैर लगाती है उतने पैर दुनिया के सभी अस्पताल एवं संस्था मिल कर भी नहीं लगा पाती। भगवान महावीर कैंसर अस्पताल एक आधुनिक एवं श्रेष्ठ अस्पताल है जिसकी गुणवत्ता  श्रेष्ठ कैंसर अस्पतालों के बराबर है. संतोकबा दुर्लभजी, अमर जैन चिकित्सालय, ज्ञान क्लीनिक जैसे अनेक जैन संस्थान जनसेवा में सक्रीय भागीदारी निभा रहे हैं. महावीर इंटरनेशनल नियमित रूप से चिकित्सा के विभिन्न क्षेत्रों में अपना अतुलनीय योगदान देता आ रहा है. 

जैनो के अन्य अनेक सामाजिक संगठन भी रक्तदान शिविर, नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर आदि के माध्यम से जनसेवा करते हैं. इसके अलावा बाढ़ पीड़ित हों या भूकम्प पीड़ित जैन समाज हर आपदा में आगे बढ़ कर सहयोग करता है. व्यापर में भी यह समाज बहुत आगे है एवं चुनावों में राजनैतिक दाल एवं प्रत्याशी गणो को पूरी आर्थिक मदद भी जैन समाज करता आया है. ओन सबके बाबजूद जैन समाज का राजनैतिक भागीदारी कम होना आश्चर्यजनक है.

जैन समाज अब संगठित भी है और सक्रीय भी. अब समय आ गया है जब हम अपमी शक्ति को पहचाने एवं लोकतंत्र में अपनी भागीदारी सुनिस्ष्हित करें। जैन समाज के प्रत्येक वर्ग के पदाधिकारीगण भी सुनिश्चित करें की जैनो को दोनों ही प्रमुख पार्टियों कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी से पर्याप्त टिकट मिले एवं जैन समाज तन मन धन से आगे आ कर उन्हें जिताने में अपनी भूमिका निभाए। 

ध्यान रखें राजनैतिक भागीदारी के बिना समाज की पहचान अधूरी है. अतः अपना हक़ लेने के लिए कटिवद्ध हो जाएँ।

ज्योति कोठारी
संयोजक,
सकल जैन समाज, जयपुर 

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