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Sunday, September 28, 2014

बंगाल के जैन तीर्थ: अजीमगंज, जियागंज, मुर्शिदाबाद




मूलगम्भारा, श्री नेमिनाथ जैन मंदिर, अजीमगंज 

आदिनाथ ऋषभ देव मंदिर, काठगोला 
बंगाल एक समय जैन धर्म का गढ़ था, स्वयं भगवान महावीर ने यहाँ विचरण किया था. बंगाल का वर्द्धमान एवं वीरभूम जिला आज भी उस गरिमा की याद दिलाता है. कालक्रम से यहाँ जैन धर्म लुप्तप्राय हो गया एवं यहाँ के सराक जाती के लोग जैन  मुख्य धारा से दूर हो गए. किन्तु १८ वीं सदी से राजस्थान से जैन श्रावकों का यहाँ पुनरागमन होना शुरू हो गया. नवाब मुर्शीदकुली खां ने यहाँ आ कर मुर्शिदाबाद नगर बसाया एवं उसे अपनी राजधानी बनाया। उनके अभिन्न मित्र जगत सेठ भी यहाँ आकर बस गए, तब से यहाँ फिर से जैनो का आना प्रारम्भ हो गया. जगत सेठ ने महिमापुर को अपने निवास स्थान के रूप में चुना एवं वहां मनमोहन पारसनाथ की कसौटी पत्थर का मंदिर बनवाया। कुछ लोग राजमहल एवं काशिमबाजार में जा कर बस गए.

कालांतर में बालूचर प्रमुख जैन वस्ति के रूप में विकसित हुआ जो की बाद में अजीमगंज एवं जियागंज के रूप में प्रसिद्द हुआ. यहाँ के रहनेवाले लोग शहरवाली के रूप में पुरे विश्व में प्रसिद्द हुए. इस समाज का वैभव, संस्कृति, कला, साधर्मी वात्सल्य एवं धर्मानुराग को पूरा जैन समाज जनता है. ये दोनों शहर मुर्शिदाबाद जिले में भागीरथी (गंगा) नदी के दोनों किनारों पर बसे हुए हैं. यहाँ के धनाढ्य ज़मींदारों एवं सेठों ने अनेक कलात्मक एवं विशाल जैन मंदिरों की स्थापना करवाई जिससे इन दोनों जगह ने तीर्थ के रूप में मान्यता प्राप्त की.

रत्नो की जैन प्रतिमायें, अजीमगंज 

स्फटिक रत्न तीर्थकर मूर्ति 

अजीमगंज में ९ एवं जियागंज में ५ श्वेताम्बर व एक दिगंबर जैन मंदिर है. यहाँ पर रत्न निर्मित सम्पूर्ण चौवीसी भी थी जो कुछ वर्षों पूर्व चोरी हो गई. अथक प्रयासों के बावजूद कुछ ही मूर्तियां पुन प्राप्त हो सकी. काठगोला में १०० एकड़ जमीन पर एक विशाल मंदिर एवं दादाबाड़ी भी यहाँ की शोभा बढ़ता है.

फोटो एवं वीडियो के साथ जैन तीर्थके विस्तृत विवरण के लिए पढ़ें
Travel Bengal: Jain Temples in historic Murshidabad 
शहरवाली समाज का ब्लॉग

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