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Monday, September 29, 2014

Navpad Oli (Ayambil) starts from today, September 30 in this year 2014


Navpad, Siddhachakra Yantra at Vimalnath Jain Temple, Jiaganj

Navpad oli, an auspicious festival  starts from today, September 30 in this year 2014. Jain community will observe nine days' Ayambil (Amil) on these auspicious days. The first day is dedicated to Arihant Paramatma, the Dev Tatva and the first Parameshthi.

The next four days will be for Siddh, Acharya, Upadhyay and Sadhu Parameshthi. People will bow to Samyag Darshan, Samyag Gyan, Samyag Charitra and Samyag Tap in the next four days after observing Sadhu Pad. The Navpad Oli will be concluded on Sharad Purnima, October 8, 2014.

This festival comes twice in a year in Ashwin and in Chaitra months. One has to do nine days' Ayambil dedicating above mentioned nine virtues. One has to do this for nine times to complete Navpad Oli. Large numbers of people dedicate themselves to Navpad in this time. They perform Pooja, Pratikraman, Jap and other spiritual activities to purify soul and to get rid of all Karmik bondage. Liberation is te goal of this spiritual activity.

You may read this article elaborated with multiple photos and videos to know detailed significance about Navpad and Oli.

Jain Festival of India: Navpad Oli (Ayambil) in Jainism

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Sunday, September 28, 2014

बंगाल के जैन तीर्थ: अजीमगंज, जियागंज, मुर्शिदाबाद




मूलगम्भारा, श्री नेमिनाथ जैन मंदिर, अजीमगंज 

आदिनाथ ऋषभ देव मंदिर, काठगोला 
बंगाल एक समय जैन धर्म का गढ़ था, स्वयं भगवान महावीर ने यहाँ विचरण किया था. बंगाल का वर्द्धमान एवं वीरभूम जिला आज भी उस गरिमा की याद दिलाता है. कालक्रम से यहाँ जैन धर्म लुप्तप्राय हो गया एवं यहाँ के सराक जाती के लोग जैन  मुख्य धारा से दूर हो गए. किन्तु १८ वीं सदी से राजस्थान से जैन श्रावकों का यहाँ पुनरागमन होना शुरू हो गया. नवाब मुर्शीदकुली खां ने यहाँ आ कर मुर्शिदाबाद नगर बसाया एवं उसे अपनी राजधानी बनाया। उनके अभिन्न मित्र जगत सेठ भी यहाँ आकर बस गए, तब से यहाँ फिर से जैनो का आना प्रारम्भ हो गया. जगत सेठ ने महिमापुर को अपने निवास स्थान के रूप में चुना एवं वहां मनमोहन पारसनाथ की कसौटी पत्थर का मंदिर बनवाया। कुछ लोग राजमहल एवं काशिमबाजार में जा कर बस गए.

कालांतर में बालूचर प्रमुख जैन वस्ति के रूप में विकसित हुआ जो की बाद में अजीमगंज एवं जियागंज के रूप में प्रसिद्द हुआ. यहाँ के रहनेवाले लोग शहरवाली के रूप में पुरे विश्व में प्रसिद्द हुए. इस समाज का वैभव, संस्कृति, कला, साधर्मी वात्सल्य एवं धर्मानुराग को पूरा जैन समाज जनता है. ये दोनों शहर मुर्शिदाबाद जिले में भागीरथी (गंगा) नदी के दोनों किनारों पर बसे हुए हैं. यहाँ के धनाढ्य ज़मींदारों एवं सेठों ने अनेक कलात्मक एवं विशाल जैन मंदिरों की स्थापना करवाई जिससे इन दोनों जगह ने तीर्थ के रूप में मान्यता प्राप्त की.

रत्नो की जैन प्रतिमायें, अजीमगंज 

स्फटिक रत्न तीर्थकर मूर्ति 

अजीमगंज में ९ एवं जियागंज में ५ श्वेताम्बर व एक दिगंबर जैन मंदिर है. यहाँ पर रत्न निर्मित सम्पूर्ण चौवीसी भी थी जो कुछ वर्षों पूर्व चोरी हो गई. अथक प्रयासों के बावजूद कुछ ही मूर्तियां पुन प्राप्त हो सकी. काठगोला में १०० एकड़ जमीन पर एक विशाल मंदिर एवं दादाबाड़ी भी यहाँ की शोभा बढ़ता है.

फोटो एवं वीडियो के साथ जैन तीर्थके विस्तृत विवरण के लिए पढ़ें
Travel Bengal: Jain Temples in historic Murshidabad 
शहरवाली समाज का ब्लॉग

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Sunday, September 14, 2014

सकल जैन समाज, जयपुर का क्षमावाणी समारोह


सकल  जैन समाज, जयपुर द्वारा आज भव्य समारोह पूर्वक क्षमावाणी कार्यक्रम आयोजित किया गया. सुबोध पब्लिक स्कूल प्रांगण में आज सुबह से ही जन सैलाब उमड़ रहा था. सभी श्वेताम्बर - दिगंबर दोनों समुुुुदाय के जैन संतों को सुनने के लिए लालायित थे. श्वेताम्बर - दिगंबर जैन एकता का महाकुम्भ जो था ये!!

गत वर्ष दिगंबर जैन राष्ट्रसंत तरुणसागर जी महाराज एवं श्वेताम्बर जैन राष्ट्रसंत द्वय ललितप्रभ सागर एवं चन्द्रप्रभ सागर जी महाराज का ४२ दिन तक तक एक साथ सार्वजनिक कार्यक्रम करवा कर सकल  जैन समाज, जयपुर ने जैन एकता की मिसाल कायम की थी. गत वर्ष भी इसी प्रकार क्षमावणी कार्यक्रम आयोजित हुआ था. उसके बाद से तो ये लौ अनवरत जल रही है. दिगंबर समाज के मानक काला एवं खरतर गच्छ के तत्कालीन संघमन्त्री ज्योति कोठारी के अथक प्रयासों से यह एकता संभव हुई थी.

आज श्वेताम्बर समुदाय के स्थानकवासी, तेरापंथी, खरतर गच्छ एवं तपागच्छ के साधु साध्विओं के साथ दिगंबर समुदाय की ब्रह्मचारिणी जी भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुई. उन्होंने कहा की उनका जन्म श्वेताम्बर सनडे में हुआ और दीक्षा दिगंबर में. राकेश मुनि ने कहा की वे दिगंबर समाज में जन्मे हैं और श्वेताम्बर समुदाय में उनकी दीक्षा हुई है. साध्वी शशिप्रभा श्री जी ने कहा की आज कारणवश दिगंबर मुनि नहीं पधार पाये यदि वो पधारते तो आज का आनंद और बढ़ जाता।

कार्यक्रममें राजस्थान के महाधिवक्ता नरपतमल लोढ़ा, कुलदीप रांका IAS, डी सी जैन IPS विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे. जयपुर के विभिन्न समुदाय के जैन संघों के पदाधिकारीगण एवं अन्य अनेक गणमान्य व्यक्ति सभा में उपस्थित थे उन सबने उपस्थित संतों एवं सतियों से क्षमा याचना की.

जन टीवी को दिए अपने साक्षात्कार में ज्योति कोठारी ने कहा की गत वर्ष जो मशाल जाली थी आज उसकी रौशनी से पूरा भारत दमक रहा है. इस वर्ष दिल्ली, मुंबई, इन्दौर आदि अनेक स्थानो पर एकता के प्रतीक स्वरुप यह क्षमावणी मनाया गया है. कार्यक्रम का संचालन सुनीश मारु ने किया एवं धन्यवाद महेंद्र सिंघवी ने ज्ञापित किया।  

"संगठन की बीणा को झनझनाने दो, गीत एकता के गुनगुनाने दो"



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Monday, September 8, 2014


Navpad Oli of Ashwin month will be commencing from September 30, 2014 this year and will continue till October 8, Sharad Poornima. People will observe Ayambil (Amil) and worship nine supreme powers and attributes in these nine days.

They will worship Panch Parameshthi (Arihant, Siddha, Acharya, Upadhyay, Sadhu) and Samyag Darshan,  Samyag Gyan, Samyag Charitra and Samyag Tap respectively during these nine days to pay tribute to the supreme God and virtues to purify body, mind and soul. Navpad is also known as Siddhachakra.

Navpad Oli comes twice in a year in Ashwin and in Chaitra (Indian lunar months). Both of the Navpad Oli start from the middle of Hindu festival Navratri.

Please click the link to know details:

Jain Festival of India: Navpad Oli (Ayambil) in Jainism

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Sunday, September 7, 2014

वोट करे: विश्वके श्रेष्ठ धर्म कि सुची


सभी जैन भाईओ को निवेदन है कि एक मैगजीन द्वारा विश्वके श्रेष्ठ धर्म कि सुची तैयार हो रही है जिसमे दनीया के सभी लोगो को वोट करने के लीए कहा है। जैन अभीतक ४% वोट से 6ठे पायदान पर हैं। पहले पर इस्लाम और दूसरे पर हिंदू हैं। सभ लोग नीचे दी गई लिंक ओपन करके जैन को वोट करे और ये संदेश देश के सभी जैनियों को पहुचाएं। जय जिनेंद्र!
http://www.thetoptens.com/best-religions/

Thanks,
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