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Saturday, August 23, 2014

क्षमा एवं विश्व भ्रातृत्व का महत्वपूर्ण पर्व पर्युषण



तीर्थंकर भगवान, कल्पसूत्र फोटो 

 श्री गौतम स्वामी, कल्पसूत्र फोटो 

स्वप्न लक्षण पाठक, कल्पसूत्र फोटो 

पर्युषण जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है जो निरंतर क्षमा एवं विश्व भ्रातृत्व का सन्देश देता है. भाद्रपद अर्थात भादो के महीने में आने वाला यह पर्व श्वेताम्बर एवं दिगंबर दोनों समुदायों में समान रूप से लोकप्रिय है. श्वेताम्बर मूर्तिपूजक एवं स्थानकवासी समुदाय इसे भादो वदी १२ से भादो सुदी ४ तक एवं तेरापंथी इसे वदी १३ से सुदी ५ तक मानते हैं.  दिगंबर समुदाय का पर्युषण सुदी ५ से प्रारम्भ हो कर सुदी १४ तक दस दिन का होता है. इसे दस लक्षण पर्व भी कहते हैं.

इस वर्ष श्वेताम्बर मूर्तिपूजक समुदाय का पर्युषण २२ से २९ अगस्त एवं टरपंथियों का २३ से ३० अगस्त तक होगा। दिगम्बरों का दस लक्षण पर्व ३० अगस्त से प्रारम्भ हो कर ८ सितम्बर को पूरा होगा।  श्वेताम्बर समुदाय में पर्युषण के अंतिम दिन संवत्सरी के रूप में मन्या जाता है एवं दिगम्वर समुदाय इसे अनंत चौर्दशी के रूप में मनाता है.

पर्युषण मुख्यतः आत्मशुद्धि का पर्व है. इस शब्द का शाब्दिक अर्थ है आत्मा का पोषण करना अर्थात अपने आत्म गुणों में अभिवृद्धि करना। पर्युषण में प्रतिक्रमण के द्वारा हम अपने आत्मिक दोषों की शुद्धि करते हैं, सभीसे वैर भाव की क्षमा याचना करते हैं एवं विश्व मैत्री की भावना प्रतिष्ठित करते हैं.

पर्युषण के दिनों में मंदिरों में विशेष पूजा पाठ का आयोजन होता है एवम अपनी अपनी आम्नाय के अनुसार लोग पूजा भक्ति, आंगी, आरती इत्यादि करते हैं. इस अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट भी देखी जाती है. अनेक स्थलों पर रात्रि जागरण आदि भी होता है.

श्वेताम्बर समुदाय में प्रतिदिन प्रवचन, पूजा, भक्ति के अतिरिक्त प्रतिदिन सुबह शाम प्रतिक्रमण करने की भी प्रथा है. आत्मा शुद्धि के लिए प्रतिक्रमण को अति आवश्यक माना गया है. सभी जैन काम से काम एक दिन संवत्सरी को तो प्रतिक्रमण करते ही हैं.

पर्युषण के दिनी में श्वेताम्बर समुदाय में कल्पसूत्र एवं अंतगढ़ दशांग सूत्र वांचने की परंपरा है एवं दिगंबर समुदाय में मोक्ष शास्त्र का वांचन होता है. श्वेताम्बर मूर्तिपूजक समुदाय में कल्पसूत्र वांचन प्रारम्भ होने से पहले अष्टान्हिका वांचन की भी परंपरा है।  पर्युषण के चवें दिन भगवान महावीर का जन्म वांचन होता है और पूरा समाज इसे बड़े ही धूमधाम से मनाता है।

Paryushan Greatest Jain auspicious Parva

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