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Sunday, April 13, 2014

"संगठन की बीणा को झनझनाने दो, गीत एकता के गुनगुनाने दो"



सकल जैन समाज का महावीर जयंती संपन्न

सकल जैन समाज का महावीर जयंती समारोह जैन धर्म के सभी समुदाय के साधु साध्वियों के सान्निध्य में सुबोध पब्लिक स्कूल, जयपुर  में संपन्न हुआ. सर्व प्रथम सीमा दफ्तरी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मुनि श्री हिम कुमार जी एवं पारस जैन ने भी भजन गाये.

प्रसिद्द व्यवसायी एवं समाज सेवी विमल चंद जी सुराणाराजकुमार जी बरडिया ने अतिथियों का तिलक लगा कर स्वागत किया।

ब्रह्मचारिणी हीना दीदी ने जैन धर्म के लक्षण बताये। मुनि अलोक कुमार जी ने कहा की महावीर के सिद्धांत को अपना कर जैन एकता की पुष्ट करनी है. मुनि मणिरत्न सागर जी ने तीर्थंकरों के कल्याणक का रहस्य बताते हुए महावीर जयंती का महत्व समझाया। आचार्य सुधर्म सागर जी ने अहिंसा व अपरिग्रह को भगवन महावीर का मूल सिद्धांत बताते हुए उस पर चलने की नसीहत दी.

राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय एन के जैन ने कहा की सभी धर्मो में पंथ होते हैं उसी प्रकार जैनों में भी हैं परन्तु आपस में विवाद छोड़ कर एक होने का प्रयास जैन एकता एवं संगठन की दिशा में ठोस कदम है.  इसी समय अनिल श्रीमाल ने "संगठन की बीणा को झनझनाने दो, गीत एकता के गुनगुनाने दो" गीत से श्रोताओं को मन्त्र मुग्ध कर दिया।  राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय जे के रांका ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये. सांसद महेश जोशी ने संतो के आशीर्वाद लिए एवं रक्तदान शिविर का निरीक्षण किया।

इस अवसर पर आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में अणुव्रत संहिता का अनावरण अणुव्रत समिति के अखिल भारतीय अध्यक्स जे एल नाहर के हाथों से कराया गया.

श्री जैन युवा परिषद द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में न्यायाधीश माननीय जे के रांका, संजय बाफना सहित दो सौ से अधिक लोगो ने रक्तदान किया।

कार्यक्रम का सञ्चालन सकल जैन समाज के सन्योजक ज्योति कोठारी ने किया एवं मानक काला ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के पश्चात साधर्मी वात्सल्य (प्रीतिभोज) रखा गया था जिसमे हज़ारों लोगो ने सामूहिक भोजन किया।

सकल जैन समाज का महावीर जयंती उत्सव १३ अप्रैल

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Friday, April 11, 2014

Sakal Jain Samaj, Jaipur will celebrate Mahavira Jayanti at Subodh Public school


Mahavira Jayanti celebration 
Sakal Jain Samaj, Jaipur will celebrate Mahavira Jayanti, on Sunday morning, April 13, 2014 at Subodh Public school campus, Rambagh circle, Jaipur to propagate message of Ahimsa and Jain unity. This is auspicious birthday of 24th Jain Tirthankar Lord Mahavira.
Jain saints from all sects likes of Digambar Jain Acharya Sri Sudharmsagar ji Maharaj, Shwetambar Khartar Gachchh ascetic Sri Maniratna Sagar ji Maharaj, Shwetambar Terapanth ascetic Sri Alok Muni Ji  Maharaj, Khartar Gachchh Sadhvi Sri Surekha Sri Ji Maharaj, D lit, Tapagachchh Sadhvi Sri Kusumprabha Sri Ji Maharaj, Digambar Jain Aryika Sri Subhushanmati Mataji and Sri Gauravmati Mataji will deliver their Pravachan about Lord Mahavira, Ahimsa and Jain religion. for the benefit of the society. It will be like a Jain Mahakumbh and a rare occasion where seven groups of Shwetambar and Digambar Jain ascetics (both male and female) will come together in a single stage.
Hon’ble Justice N. K. Jain and Hon’ble Justice J.K. Ranka, both from Rajasthan High Court will grace the occasion as special guests. Several other dignities will also join the ceremony. 
As a service to humanity Sri Jain Yuva Parishad will organize a blood donation camp on Mahavira Jayanti. The celebration will be followed by a lunch for all Jain community members.
All members of Jain community are cordially invited to join the occasion
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Thursday, April 10, 2014

जैन एकता महाकुम्भ सुबोध पब्लिक स्कूल, जयपुर में १३ अप्रैल को


Sakal Jain Samaj, Jaipur, Mahavira Jayanti
जैन संतो का प्रवचन, जयपुर महावीर जयंती 

सुबोध पब्लिक स्कूल, रामबाघ सर्किल, जयपुर में १३ अप्रैल रविवार को जैन एकता का महाकुम्भ होनेवाला है.  शुभ अवसर पर जयपुर के श्वेताम्बर दिगंबर दोनों समुदाय मिल कर महावीर जयंती मानाने जा रहे हैं।  भगवान महावीर के जन्म कल्याणक पर ऐसा उत्साह जयपुर में पहली बार देखने मिल रहा है.  श्वेताम्बर दिगंबर दोनों समुदाय का मिलन जो हो रहा है!

हम जानते हैं की जैन समाज भिन्न भिन्न समुदायों में बंटा हुआ है और ऐसा अवसर काम ही आता है जब सभी समुदाय के श्रावक-श्राविका ही नहीं परन्तु आचार्य भगवंत, साधु, साध्वी आदि एक स्थान पर सम्मिलित होते हों. १३ अप्रैल रविवार को प्रातः ९. ३० बजे से यह सुअवसर सुबोध पब्लिक स्कूल में उपस्थित हुआ है. 

सकल जैन समाज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में दिगंबर जैनाचार्य १०८ श्री सुधर्मसागर जी महाराज, श्वेताम्बर तेरापंथ मुनि श्री आलोक कुमार जी, श्वेताम्बर खरतरगच्छीय मुनि श्री मणिरत्न सागर जी, खरतर गच्छीय साध्वी श्री सुरेखा श्री जी डी लिट, तपगच्छीय साध्वी श्री कुसुमप्रभा श्री जी एवं दिगंबर आर्यिका श्री सुभूषणमति माताजी व श्री गौरवमति माताजी के पधारने की स्वीकृति मिल चुकी है एवं इन सभी संतों के प्रवचन यहाँ पर होंगे। यह एक सुनहरा अवसर होगा जब एक साथ इतने संत एक मंच पर उपस्थित होंगे।   

राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधिपति माननीय श्री नरेंद्र कुमार जैन एवं न्यायाधिपति माननीय श्री जे के रांका इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारेंगे। श्री जैन युवा परिषद रक्तदान शिविर की व्यवस्था संभालेगा। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होगा एवं सभा समाप्ति पर साधर्मी वात्सल्य (प्रीतिभोज) का आयोजन किया गया है. 

सकल जैन समाज की और से श्री मानक काला एवं ज्योति कोठारी ने सभी जैन बंधुओं से इस कार्यक्रम में सपरिवार ईष्ट मित्रों सहित पधारने का आग्रह किया है. कृपया पधार कर जैन एकता को परिपुष्ट करें।   

सकल जैन समाज का महावीर जयंती उत्सव १३ अप्रैल


Sakal Jain Samaj, Jaipur  will celebrate Mahavira Jayanti


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Saturday, April 5, 2014

साध्वी श्री जीतयशा श्री जी का जोधपुर में स्वर्गवास


अत्यंत दुखद सुचना: परम पूज्या साध्वी श्री जीतयशा श्री जी का कल (४ अप्रैल, २०१४ ) प्रातः ८ बजे सम्बोधि धाम, जोधपुर में स्वर्गवास देवलोकगमन हो गया है. आपकी अंतिम यात्रा आज प्रातः निकली गई. मैं दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ एवं वीतराग श्री अरिहंत परमात्मा से आपकी शांति एवं सद्गति कि प्रार्थना करता हूँ.

परम पूज्या साध्वी श्री जीतयशा श्री जी
परम पूज्या साध्वी श्री जीतयशा श्री जी वयोवृद्ध एवं ज्ञानवृद्ध थीं. आप बीकानेर के सुप्रसिद्ध जैन विद्वान् एवं इतिहासज्ञ श्री अगरचन्दजी नाहटा कि सुपुत्री थीं एवं आपका विवाह कलकत्ता में दफ्तरी परिवार में हुआ था. आपके पञ्च पुत्र हुए. प्रौढ़ावस्था में पति में वैराग्यदशा जागृत हुई तब उन्होंने खरतरगच्छीय आचार्य श्री जिन कान्तिसागर सूरीश्वर जी महाराज के पास दीक्षा अंगीकार कि. आपने भी धर्मपत्नी के कर्तव्य का निर्वहन करते हुए अपने दो पुत्रों के साथ प्रव्रज्या अंगीकार कर ली. आपके नाम से श्री जीतयशा श्री फाउंडेशन कि स्थापना हुई जो कि जैन साहित्य, कला आदि के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है.

अंतिम यात्रा  साध्वी श्री जीतयशा श्री, सम्बोधि धाम, जोधपुर 

आपके सांसारिक पति परम पूज्य गणिवर्य श्री महिमाप्रभ सागर जी महाराज का कुछ वर्ष पूर्व देवलोकगमन हो गया. वर्त्तमान में आपके दोनों पुत्र परम पूज्य राष्ट्र संत श्री ललितप्रभ सागर जी महाराज एवं श्री चन्द्रप्रभ सागर जी महाराज प्रखर प्रवचनकार हैं. देश विदेश में आप दोनों कि विद्वत्ता एवं प्रवचन शैली कि ख्याति है.  आप दोनों अक्सर कहा करते थे कि उन्होंने वैराग्य वश दीक्षा नहीं ली परन्तु माता पिता कि सेवा के लिए दीक्षा ली है.

गत वर्ष २०१३ में दोनों भाइयों का ऐतिहासिक चातुर्मास जयपुर में हुआ था जिसमे श्वेताम्बर-दिगंबर जैन एकता कि मिशाल कायम हुई थी. श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ संघ, जयपुर के संघ मंत्री के रूप में इस अद्भूत चातुर्मास करवाने का लाभ मुझे मिला था. उसी अवसर पर श्वेताम्बर-दिगंबर जैन समाज कि एकता स्वरुप सकल जैन समाज का गठन हुआ था.  मैं सकल जैन समाज, जयपुर कि और से दिवंगत साध्वी जी महाराज को श्रद्धांजलि व्यक्त करता हूँ.

शोकाकुल
ज्योति कोठारी

Thanks,
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Friday, April 4, 2014

हंगरी सुचना एवं संस्कृति केंद्र में हुआ आनंदघन बहत्तरि का विमोचन


Jyoti Kothari at Hungarian Cultural centre
Jyoti Kothari with Tibor Kobacs


१७ वीं शताब्दी के राजस्थानी जैन संत अध्यात्मयोगी अवधूत आनंदघनजी कि बहत्तरि के आधार पर लिखी गई ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर इमरे बंगा कि पुस्तक "It's a city showman's show" का विमोचन हंगरी सुचना व सांस्कृतिक केंद्र, दिल्ली में हुआ. 
इस अवसर पर जयपुर के जैन मनीषी एवं समारोह के विशिष्ट अतिथि ज्योति कोठारी ने आनंदघन जी के पदों के अध्यात्मिक एवं काव्यात्मक गुणों का विवेचन करते हुए उन्हें न सिर्फ अपने युग का वल्कि सर्वकालिक मानवता का संत बताया। उन्होंने कहा कि आनंदघन जी को लोग मर्मी या रहस्यवादी समजगते हैं परन्तु वे एकनिष्ठ आत्मसाधक एवं योगिराज थे. उनकी रचनाएं सम्प्रदायातीत एवं कालजयी है. आपके द्वारा लिखी गई चोवीस तीर्थकरों के भजन आनंदघन चौवीसी के नाम से विख्यात है और आज भी लोगों के कंठ में वसा हुआ है.

उनके व्यक्तित्व से प्रभावित हो कर गुजरात के तत्कालीन महापंडित उपाध्याय यशोविजय जी ने उनकी प्रशस्ति स्वरुप अष्टपदी कि रचना कि थी. वे निष्पृह संत थे एवं प्रायः वनो में निवास करते थे.डा इमरे बंगा से अपने सम्बन्धों का उल्लेख करते हुए आनंदघन जी के पदों को विश्व के सामने लाने के प्रयासों के लिए उनका आभार व्यक्त किया। 

यशवंत गोलेछा ने आनंदघनजी के पदों कि संगीतमय प्रस्तुति दी. प्रसिद्द हिंदी साहित्यकार गिरधर राठी ने "It's a city showman's show" कि समाचना प्रस्तुत करते हुए रीतिकालीन साहित्य कि व्याख्या कि. उन्होंने कबीरदास के पदों से तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया। प्रोफ़ेसर इमरे बंगा ने बताया कि किस प्रकार हिंदी भाषा पर शोध करते हुए वे आनंदघन कि ओर आकर्षित हुए. उन्होंने पुस्तक पर अंतर्दृष्टि देने के लिए ज्योति कोठारी का, प्रकाशन के लिए पेंगुइन का एवं हंगरी सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक का आभार जताया। इसके बाद पुस्तक का विमोचन किया गया.


 हंगरी सुचना व सांस्कृतिक केंद्र, दिल्ली के निदेशक टिबोर कोवाक ने सभी का आभार जताया एवं उनकी पत्नी ने सभी आगंतुकों को स्मृति चिन्ह प्रदान किया। जयपुर के ही उमराओ चद जरगढ़ द्वारा लिखित आनंदघन ग्रन्थावली कि एक प्रति ज्योति कोठरी ने टिबोर कोबाकस को भेंट दी. 

हंगरी सुचना एवं संस्कृति केंद्र में हुआ आनंदघन बहत्तरि का विमोचन


आनंदघनजी पर पुस्तक का विमोचन हंगरी दूतावास में



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Tuesday, April 1, 2014

Doordarshan will telecast Sanganer Jain temple on April 12









Jaipur Doordarshan will telecast Sanganer Jain temple on April 12. There are very old Shwetambar Jain twin temples at Sanganer, near Tripolia gate, Jaipur. The older temple of Lord Adinath Rishabhdev is built in Nagar style of architecture in 10th or 11 century. Another of the twin temples Sri Chandaprabhu Jain temple is 400 years old.
Sri Jain Shwetambar Khartar Gachchh Sangh manages these old twin temples.

Manak TV has filmed both these temples and Jaipur Doordarshan will telecast this on Saturday, April 12, 2014 at 6 PM. We have to remember that it is the pre-evening of Mahavira Jayanti.

आनंदघनजी पर पुस्तक का विमोचन हंगरी दूतावास में


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आनंदघनजी पर पुस्तक का विमोचन हंगरी दूतावास में


अध्यात्मयोगी एवं अवधूत आनंदघनजी जैन संतों में शिरोमणि हैं. १७ वीं शताब्दी के इन महान संत ने अनेक काव्यों कि रचना कि जो विश्व साहित्य कि धरोहर है. वे न सिर्फ अध्यात्मयोगी थे वल्कि आपकी रचनाएं भक्ति युग कि श्रेष्ठ कृतियों में मणि जाती है. आपके द्वारा लिखी गई चोवीस तीर्थकरों के भजन आनंदघन चौवीसी के नाम से विख्यात है और आज भी लोगों के कंठ में वसा हुआ है. जैन धर्म के सभी सम्प्रदायों में आपकी प्रसिद्धि है एवं आपकी रचनाएं लोकप्रिय है. योगिराज अानन्दघन जी राजस्थान के थे एवं मेड़ता सिटी में आपका स्वर्गवास हुआ था. 

आप के व्यक्तित्व से प्रभावित हो कर ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर इमरे बंगा ने आपके द्वारा लिखित बहुत्तरी पर एक शोधपरक ग्रन्थ लिखा है. "It's a city showman's show" नाम कि इस पुस्तक का प्रकाशन विश्व प्रसिद्द पेंगुइन प्रकाशन ने किया है. प्रोफ़ेसर इमरे बंगा हंगरी मूल के हैं एवं इससे पहले उन्होंने रविन्द्र नाथ ठाकुर कि अनेक रचनाओं पर काम किया है. ये पहला अवसर है जब किसी हंगेरियन ने जैन धर्म के सम्वन्ध में कोई पुस्तक लिखी हो. 

"It's a city showman's show"  पुस्तक का विमोचन कल ३ अप्रैल २०१४ को हंगरी दूतावास के सांस्कृतिक केंद्र १ ए जनपथ, दिल्ली में होगा। प्रसिद्द हिंदी कवी गिरधर राठी समारोह के मुख्य अतिथि एवं एवं जैन विद्वान ज्योति कोठारी, जयपुर विशिष्ट अतिथि होंगे। 

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