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Wednesday, May 22, 2013

नालंदा तक्षशिला की राह पर जयपुर



नालंदा तक्षशिला की राह पर जयपुर

कभी नांलदातक्षशिला और विक्रमशिला विश्वविद्यालय भारत की शान हुआ करते थें। तब भारत विश्वगुरु कहलाता था। और देश  विदेश से विद्यार्थी इन विश्वविद्यालयों मे अध्ययन करने आते थें। इन विश्वविद्यालयों के शिक्षक ज्ञानके पूंज होते थे एंव अपने ज्ञान व विद्वत्ता के आलोक से तत्कालीन राज्यव्यवस्था का समुचित प्रवन्ध एंव नियन्त्रण करते थें।तब भारत एक अत्यंत सुखी, शांत  एंव समृद्ध देश होता था।

जैन संघ भी अपने समृद्ध ज्ञान परम्परा के लियें विष्वविख्यात है। परन्तु अपना कोई भी विश्वविद्यालय नही होने से इस समृद्ध परम्परा का व्यापक प्रचार प्रसार नही हो पाया। इस कमी को पुरा करने के लिए 23 दिसम्बर को खरतर गच्छ संघ की साधारण सभा में करतल ध्वनि से पारित हुआ जैन शोध अध्ययन संस्थान एंव विश्वविद्यालय का प्रस्ताव। 

जयपुर। हर ओर एक ही आवाज उठती सुनाई देती है कि जैन समाज का षिक्षा के क्षे़त्रमंे विष्वस्तरीय संस्थान नही है.  अब इस कमी को पूरा करने का प्रयास कर रहा है जयपुर खरतरगच्छ संघ। जिसने जैन विश्वविद्यालय के रूपमें 200 करोड़ का प्रोजेक्ट हाथमें लिया है। जैन विश्वविद्यालय का यह प्रोजेक्ट समस्त जैन समाज का सिर पूरे विश्व में गर्व से ऊचां कर देगा। इस प्रोजेक्ट में राजस्थान के राजनीतिज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों, शैक्षणिक क्षेत्रके पुरोधाओं का मार्गदर्शन एंव रचनात्मक सहयोग भी मिल रहा है। इस प्रोजेक्ट पर तीव्र गति से काम चल रहा है एंव जैन शोध व अध्ययन संस्थान प्रारम्भ हो चुका है निश्चित रूप से जयपुर संघ के लिए शिक्षा के केन्द्र के रूपमें एक नया आयाम स्थापित होगा।

यह योजना सम्पूर्ण जैन-जैनेतर समाज के लिए वरदान साबित होगा। वर्तमान संघमंत्री ज्योति कोठारी और उनकी पुरी टीम (कार्यकारिणी) शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा ही अनुपम कार्य करने जा रहे है। इस कार्य मे अनुमान लगाया जा सकता है कि यह प्रोजेक्ट प्रारम्भ मे भले ही 200 करोड़ से यह प्रोजेक्ट  500 करोड़ रूपए को पार सकता है। इस प्रोजेक्ट के लिए पैसा दानदाताओंगुरू भगवतों की प्ररेणा और संघ समाज के प्रयासों से आएगा। हमें और आपको सबकों साथ मिलकर ऐसा एक आयाम स्थापित करना होगा जिसे आने वाली पीढ़ी अपनी धरोहर मान सके।

खरतर गच्छ संघ की साधारण सभाने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके लिए एक स्थायी समिति का भी गठन कर दिया है जिस में निम्न महानुभावों को लिया गया हैः श्री सुरेन्द्र गोलेछा- उद्योगपति, श्री कमल चंद सुराणा- ज्वैलर, डाॅसागरमलजैन- जैन शोध विषेषज्ञ,  श्री सुरेन्द्र बोथरा-आगम विशेषज्ञ एंव श्री ज्योति कोठारी।  समिति के श्री ज्योति कोठारी ने बताया कि समिति अपना काम तत्परता एंव निरंतरता से कर रही है। सभी सदस्यगण इस प्रोजेक्ट पर पूर्ण मेहनत के साथ कार्य कर रहे है सभी समुदायों के संतो एंव साध्वी जी म.सा. एंव विभिन्न संघसमाज के पदाधिकारियों को इस प्रोजेक्ट की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

जयपुर में जैन विष्वविद्यालय की आवष्यकता क्यों?  

१ बढ़ेगे शिक्षा एंव रोजगार के अवसर
२ दे-विदे के अनेक शोधर्थिओं की मनपंसद शैक्षणिक केन्द्र बना जयपुर संघ
३ जयपुर पधारने वाले संतो-साध्वियों, श्रावक-श्राविकाओं, स्वाध्यायियों के अध्ययन का होगा मुख्य केन्द्र
४ संघ के पास पहले से ही विशाल वाचनालय है जिसमें अत्यंत प्राचीन पाठय सामग्री का संकलन है
५ संघ के विधान में उल्लेख है कि संघ शिक्षा के क्षेत्रमें अपना योगदान देगा, अभी तक इस क्षेत्र में विषेष पहल नहीं होने के कारण विधान का यह उद्देश्य भी अधूरा ही था

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