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Wednesday, May 29, 2013

Great Jain orator saints Lalitprabh and Chandraprabh


Lalitprabh Sagar Video in you tube 

There are several Jain saints who preaches for the welfare of people. Jain monks Lalitprabh Sagar and Chandraprabh Sagar are renowned among them. These two great Jain orator saints are popular among general people. Their public specches catch thousands of people from all communities. They are not limited to Jain communities.

Lalitprabh Sagar and Chandraprabh Sagar are two brothers who initiated with their parents. Gani Mahimaprabh Sagar, their father left for his heavenly abode seven years back. Since then, these two brothers are independently preaching ideologies of Lord Mahavira. "Astha", a popular TV channel propagates their lectures every morning between 9.00 to 9.30 AM. Large numbers of books, audio and video CDs are also published for the benefit of people in general. All these teaches people Jainism and ethical values.

They will observe their Chaturmas this year in Jaipur along with their pupil Shantipriya Sagar. Sri Jain Shwetambar Khartar Gachchh Sangh, Jaipur will organize their Chaturmas. Both the brother saints along with their pupil will stay at Vichakshan Bhawan, MSB Ka Rasta, Johri Bazar, Jaipur. They will deliver their popular speeches from 8.45 to 10.15 AM at famous Dashara Maidan in  Adarshnagar area between July 21 and September 1. At least ten thousand people are expected daily in their Pravachan. Their Chaturmas will become an example of of the unity of Shwetambar and Digambar Jain. All of you are invited.

दिगंबर-श्वेताम्बर एकता की मिसाल बनेगा जयपुर


Both Lalitprabh Sagar and Chandraprabh Sagar carries a scholarly tradition behind them. Renowned Jain scholar and historian late Agarchand Nahata is their maternal grand father and late Bhanwar Lal Nahata is maternal uncle. Both the brothers had their initial religious education from Nahatas. They learnt a lot from them. Both the brothers also studied in Varanasi and involved in Jain philosophical researches. Chandraprabh Sagar was awarded with prestigious "Mahopadhyay" degree.

Lalitprabh Sagar and Chandraprabh Sagar were instrumental in setting up "Samvodhi Dham" at Kaylana road, Jodhpur. It is a place for peace and meditation. There are Jain temple, Dadabadi, museum, meditation center, dharmshala and bhojanshala situated at Samvodhi Dham campus.

Both the brothers organize camps for meditation "Samvodhi Dhyan" several times in a year. They organize camps in Samvodhi Dham and other suitable places.

                                                  Chandraprabh Sagar Video in you tube

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Wednesday, May 22, 2013

नालंदा तक्षशिला की राह पर जयपुर



नालंदा तक्षशिला की राह पर जयपुर

कभी नांलदातक्षशिला और विक्रमशिला विश्वविद्यालय भारत की शान हुआ करते थें। तब भारत विश्वगुरु कहलाता था। और देश  विदेश से विद्यार्थी इन विश्वविद्यालयों मे अध्ययन करने आते थें। इन विश्वविद्यालयों के शिक्षक ज्ञानके पूंज होते थे एंव अपने ज्ञान व विद्वत्ता के आलोक से तत्कालीन राज्यव्यवस्था का समुचित प्रवन्ध एंव नियन्त्रण करते थें।तब भारत एक अत्यंत सुखी, शांत  एंव समृद्ध देश होता था।

जैन संघ भी अपने समृद्ध ज्ञान परम्परा के लियें विष्वविख्यात है। परन्तु अपना कोई भी विश्वविद्यालय नही होने से इस समृद्ध परम्परा का व्यापक प्रचार प्रसार नही हो पाया। इस कमी को पुरा करने के लिए 23 दिसम्बर को खरतर गच्छ संघ की साधारण सभा में करतल ध्वनि से पारित हुआ जैन शोध अध्ययन संस्थान एंव विश्वविद्यालय का प्रस्ताव। 

जयपुर। हर ओर एक ही आवाज उठती सुनाई देती है कि जैन समाज का षिक्षा के क्षे़त्रमंे विष्वस्तरीय संस्थान नही है.  अब इस कमी को पूरा करने का प्रयास कर रहा है जयपुर खरतरगच्छ संघ। जिसने जैन विश्वविद्यालय के रूपमें 200 करोड़ का प्रोजेक्ट हाथमें लिया है। जैन विश्वविद्यालय का यह प्रोजेक्ट समस्त जैन समाज का सिर पूरे विश्व में गर्व से ऊचां कर देगा। इस प्रोजेक्ट में राजस्थान के राजनीतिज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों, शैक्षणिक क्षेत्रके पुरोधाओं का मार्गदर्शन एंव रचनात्मक सहयोग भी मिल रहा है। इस प्रोजेक्ट पर तीव्र गति से काम चल रहा है एंव जैन शोध व अध्ययन संस्थान प्रारम्भ हो चुका है निश्चित रूप से जयपुर संघ के लिए शिक्षा के केन्द्र के रूपमें एक नया आयाम स्थापित होगा।

यह योजना सम्पूर्ण जैन-जैनेतर समाज के लिए वरदान साबित होगा। वर्तमान संघमंत्री ज्योति कोठारी और उनकी पुरी टीम (कार्यकारिणी) शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा ही अनुपम कार्य करने जा रहे है। इस कार्य मे अनुमान लगाया जा सकता है कि यह प्रोजेक्ट प्रारम्भ मे भले ही 200 करोड़ से यह प्रोजेक्ट  500 करोड़ रूपए को पार सकता है। इस प्रोजेक्ट के लिए पैसा दानदाताओंगुरू भगवतों की प्ररेणा और संघ समाज के प्रयासों से आएगा। हमें और आपको सबकों साथ मिलकर ऐसा एक आयाम स्थापित करना होगा जिसे आने वाली पीढ़ी अपनी धरोहर मान सके।

खरतर गच्छ संघ की साधारण सभाने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके लिए एक स्थायी समिति का भी गठन कर दिया है जिस में निम्न महानुभावों को लिया गया हैः श्री सुरेन्द्र गोलेछा- उद्योगपति, श्री कमल चंद सुराणा- ज्वैलर, डाॅसागरमलजैन- जैन शोध विषेषज्ञ,  श्री सुरेन्द्र बोथरा-आगम विशेषज्ञ एंव श्री ज्योति कोठारी।  समिति के श्री ज्योति कोठारी ने बताया कि समिति अपना काम तत्परता एंव निरंतरता से कर रही है। सभी सदस्यगण इस प्रोजेक्ट पर पूर्ण मेहनत के साथ कार्य कर रहे है सभी समुदायों के संतो एंव साध्वी जी म.सा. एंव विभिन्न संघसमाज के पदाधिकारियों को इस प्रोजेक्ट की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

जयपुर में जैन विष्वविद्यालय की आवष्यकता क्यों?  

१ बढ़ेगे शिक्षा एंव रोजगार के अवसर
२ दे-विदे के अनेक शोधर्थिओं की मनपंसद शैक्षणिक केन्द्र बना जयपुर संघ
३ जयपुर पधारने वाले संतो-साध्वियों, श्रावक-श्राविकाओं, स्वाध्यायियों के अध्ययन का होगा मुख्य केन्द्र
४ संघ के पास पहले से ही विशाल वाचनालय है जिसमें अत्यंत प्राचीन पाठय सामग्री का संकलन है
५ संघ के विधान में उल्लेख है कि संघ शिक्षा के क्षेत्रमें अपना योगदान देगा, अभी तक इस क्षेत्र में विषेष पहल नहीं होने के कारण विधान का यह उद्देश्य भी अधूरा ही था

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दिगंबर-श्वेताम्बर एकता की मिसाल बनेगा जयपुर





जयपुर बनेगा दिगंबर-श्वेताम्बर एकता की मिसाल। इस वर्ष जयपुर में होगा गंगा यमुना सरस्वती का संगम। प्रखर वक्ता श्री ललितप्रभ सागर एवं श्री चन्द्रप्रभसागर श्वेताम्बर समुदाय का प्रतिनिधित्व करेंगे एवं कडवे प्रवचन के लिए प्रख्यात दिगंबर संत श्री तरुण सागर भी अपनी वाणी की छटा बिखेरेङ्गे. श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ संघ, जयपुर श्री ललितप्रभ सागर एवं श्री चन्द्रप्रभसागर के चातुर्मास आयोजित करेगा।

श्री ललितप्रभ सागर एवं श्री चन्द्रप्रभसागर का प्रवचन स्थल होगा दशहरा मैदान, आदर्शनगर एवं SMS  इन्वेस्टमेंट में दिगंबर संत श्री तरुण सागर। तीनों ही संतों ने उदारता दिखाते हुए कई कार्यक्रम साथ में करने का फैसला लिया है एवं दोनों ही समुदायों के संघों ने इसके लिए स्वीकृति दी है.

खरतर गच्छ संघ के संघ मंत्री ज्योति कोठारी एवं मुनि तरुनसागर चातुर्मास समिति के संयोजक मानक काला दोनों ही इस एकता के पक्षधर हैं एवं  इसके लिए अपना प्रयास कर  रहे  हैं। इस वर्ष दोनों ही समुदायों के संतों का चातुर्मास प्रवेश एक साथ कराने का प्रयास चल रहा है. यह भी प्रयास किया जा रहा है की श्वेताम्बर पर्युषण पर दिगंबर मुनि तरुण सागर का प्रवचन हो एवं दिगम्बरों के दस लक्षण पर्व पर श्वेताम्बर मुनिओ का . इस प्रकार यह जैन एकता की एक मिसाल कायम हो सकेगी।

भारत के अन्य भागों में भी इस प्रकार प्रयास होने चाहिए जिससे हम अपने छोटे छोटे आपसी मतभेदों को भुला कर भगवन महावीर के आदर्शों को आत्मसात कर सके।


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Thursday, May 9, 2013

Jain candidates winning Karnataka assembly election


Result of Karnataka assembly election 2013 declared yesterday. Three Jain candidates won their elections and elected as members of Karnataka assembly election 2013 assembly. Hence, there will be three Jain MLAs in this assembly.

Congratulations!!


  Sri Abhaychandra Jain (Congress) elected from Mudabidri. 

  Sri  D. Sudhakar (Congress) elected from Hiriyur.

  Sri Sanjay V. Patil  (BJP) elected from Belgaum Rural. 

Congress party won 121 seats and both BJP and JDS won 40 seats each in Karnataka assembly. Congress has dethroned BJP in Karnataka. BJP paid price for not compromising with Yediyurappa who had seriously damaged BJP's winning possibility.


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