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Thursday, January 17, 2013

राजस्थान के जैन तीर्थ : मालपुरा



 राजस्थान के जैन तीर्थ स्थलों में मालपुरा एक प्रसिद्द नाम है।  यह तीर्थ स्थल विशेष रूप से दादा जिन कुशल सूरी के प्रत्यक्ष दर्शन स्थली के रूप में विख्यात है। सभी जानते हैं की जैन धर्म के आचार्यों की श्रृंखला में दादागुरु देवों  का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है।

जैन आचार्यों में चार ऐसे नाम हैं जिन्होंने जैन समाज को संगठित किया। उन्होंने जैन संघ का विस्तार भी किया। ये चारों दादागुरुदेव के नाम से जाने जाते हैं। इनमे से तीसरे दादागुरु जिन कुशल सूरी हुए। इनका समय आज से लगभग सात सौ वर्ष पहले का है। दादा जिन कुशल सूरी का स्वर्गवास देराउर (पाकिस्तान) में हुआ था। उन्होंने अपने स्वर्गवास (फाल्गुन कृष्णा अमावस्या) के 15 दिन बाद अपने एक भक्त को यहाँ पर दर्शन दिया था। जिस शिलाखंड पर उन्होंने अपने भक्त को दर्शन दिया वो शिलाखंड आज जन जन के आस्था का केंद्र बन चूका है। यह स्थान दादाबाड़ी के रूप में जाना जाता है।

विगत दशक में स्वर्गीय उत्तम चन्द जी बडेर के अथक प्रयास से यहाँ पर एक भव्य दादाबाड़ी का निर्माण हुआ। साथ ही तीर्थंकर परमात्मा प्रातः स्मरणीय  भगवन श्री वासुपूज्य स्वामी का भी एक भव्य मंदिर निर्मित हुआ। विशाल धर्मशाला  एवं भोजनशाला का भी निर्माण करवाया गया। आज यहाँ पर तीर्थ यात्रियों के लिए सर्व सुविधा युक्त आवास एवं भोजन व्यवस्था निःशुल्क उपलब्ध है।  यहाँ का मनमोहक वातावरण सहज ही किसी के मन को लुभा लेता है।

दादागुरुदेव के स्वर्गवास दिवस (फाल्गुन कृष्णा अमावस्या) एवं होली पर यहाँ विशाल मेले का आयोजन प्रतिवर्ष होता है जिसमे हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस वर्ष यह मेल 10-11 मार्च एवं 27-28 मार्च 2013, को आयोजित होंगे। इसके अलावा हर पूनम एवं सोमवार को भी बड़ी संख्या में भक्त जन यहाँ पधारते हैं।

यह तीर्थस्थल श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय से भी शोभित है एवं प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ स्वामी व अन्य आचार्यों की प्राचीन छतरियां भी यहाँ पर मौजूद है। यह एक ऐतिहासिक तीर्थस्थल के साथ मनोरम पर्यटन स्थली भी है।

मालपुरा तीर्थ राजस्थान की राजधानी गुलाबी नगरी जयपुर एवं अजमेर से 95 की।मी। की दूरी पर स्थित है। यह स्थान केकड़ी से 45 एवं टोंक से 70 KM पर है। राजस्थान के सभी शहरों से एवं दिल्ली, बम्बई, व अहमदाबाद से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।

 ज्योति कोठारी, संघमन्त्री श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ संघ, जयपुर के विशेष प्रयासों से जयपुर से मालपुरा होते हुए केकड़ी-भीलवाड़ा तक राष्ट्रिय उच्चमार्ग का निर्माण हुआ है जिससे यात्रा सुगम हुई है पहले यहाँ पर रस्ते की स्थिति बहुत ख़राब थी जिससे यात्रियों को बहुत परेशानी होती थी.  उन्होंने तत्कालीन रेलमंत्री श्री पवन बंशल एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री श्री नमोनारायण मीणा  से संपर्क कर मालपुरा को रेल सेवा से जोड़ने का आग्रह किया था जिसके परिणाम स्वरुप सवाई माधोपुर से अजमेर (द्वारा मालपुरा) रेलमार्ग बनने का मार्ग प्रशस्त हो चूका है. निकट भविष्य में मालपुरा के यात्रियों को रेल सुविधा भी उपलब्ध हो जाएगी।

इस तीर्थ की व्यवस्था श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ संघ, जयपुर के हाथों में है।  अधिक जानकारी के लिए संघ कार्यालय के फ़ोन नंबर 0141-2563884 पर संपर्क कर सकते हैं।

मालपुरा में नव वर्ष मेला एवं अनुराधा पोडवाल द्वारा भक्ति संध्या


बंगाल के जैन तीर्थ: अजीमगंज, जियागंज, मुर्शिदाबाद


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