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Friday, December 7, 2012

जैन डाक्टरों का अखिल भारतीय सम्मलेन, सूरत



अभी कुछ दिनों पूर्व सूरत में जैन डाक्टरों का अखिल भारतीय सम्मलेन आयोजित हुआ जिसमे भारत भर के लगभग 250 डाक्टर सम्मिलित हुए। पूज्य उपाध्याय श्री ज्ञानसागर जी के सान्निध्य में आयोजित इस सम्मलेन में देश के बिभिन्न प्रान्तों से ख्यातनामा चिकित्सकों ने अपने विचार व्यक्त किये। इस सफल एवं सुन्दर कार्यक्रम का पारस टीवी ने लाइव प्रसारण किया था। इस सम्मलेन में मुझे भी बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था एवं पहले सत्र में लगभग 40 मिनट तक बोलने का मौका दिया गया।

4 नवम्बर 2012, रविवार को दिन भर चले इस सम्मलेन का विषय अध्यात्मिक था। चिकित्सकों से यह सुनने में अच्छा लगा की किस प्रकार जैन धर्म एवं अध्यात्म स्वस्थ्य रहने में उपयोगी हो सकता है। मैंने जैन आगम एवं शास्त्रों में रोग, निदान, चिकित्सा, चिकित्सक, औषध, पथ्य आदि के संवंध में पाए गए विवरणों की बात की थी। साथ ही चिकित्सकों की नैतिकता पर भी चर्चा की।

मैंने मेरी बात अभयदेव सूरी रचित "जय तिहुअण" स्तोत्र की "जर जज्जर परिजुण"  गाथा से की जिसमे बिभिन्न रोगों का नाम ले कर भगवन पार्श्वनाथ से प्रार्थना की गई है। इस गाथा में भगवन को धन्वन्तरी वैद्य की उपमा दे कर उनसे रोगों की मुक्ति के लिए प्रार्थना की गई है। इसके बाद आचारांग सूत्र, स्थानांग सूत्र, भगवती सूत्र, ज्ञाता धर्मकथा, विपाक  सूत्र आदि आगम ग्रंथों में रोग, निदान, चिकित्सा, चिकित्सक, औषध, पथ्य आदि के संवंध में पाए गए विवरणों की बात की।
विस्तृत विवरण के लिए देखें: 
Disease, diagnosis, doctors, medicines and medical practices in Jain canons (Agam) 

विशेष रूप से आगमों में पाए जाने वाले "रोग निदान" का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान में "Clinical" की जगह आधुनिक चिकित्सक गण "Testing" पर निर्भर हो गए हैं जिससे मरीजों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। यह अहिंसा व्रत का "अति भारारोपन" नामक अतिचार भी है। Testing से कुछ चिकित्सकों को Commission के रूप में कुछ अतिरिक्त आय अवस्य हो जाती है परन्तु अधिकांश लाभ तो क्लिनिक एवं कंपनियों के हिस्से में ही जाती है। मैंने चिकित्सकों से आग्रह किया की किसी अन्य को मोटा फायदा पहुचने के लिए रोगियों पर अतिरिक्त भार न डालें तो यह धर्म एवं नैतिकता की दृष्टि से श्रेष्ठ होगा। जहाँ आवश्यक हो वहीँ Testing करवाएं अन्यथा Clinical पर भरोसा करें। मेरी इस बात का उपस्थित चिकित्सकों से स्वागत किया एवं इस पर अमल करने का आश्वासन दिया। 

इसके साथ ही उवसग्गहरं, लोगस्स, भक्तामर आदि सूत्रों में रोग एवं चिकित्सा व स्वास्थ्य की प्रार्थनाओं का उल्लेख किया।

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