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Monday, April 9, 2012

चैत्री पूर्णिमा का महत्व



चैत्री  पूर्णिमा का जैन धर्म में विशेष महत्व है. यह एक विशिष्ट पर्व है. इसी दिन इस अवसर्पिणी कल के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभ देव स्वामी के प्रथम गणधर श्री पुंडरिक स्वामी पांच करोड़ मुनिओं के साथ सिद्धाचल गिरिराज पर सिद्ध हुए. इस कारन सिद्धाचल तीर्थ (पलिताना) पुंडरिक गिरी के नाम से भी प्रसिद्ध हुआ.

इस दिन अनेक श्रद्धालु सिद्धगिरी की यात्रा करते हैं, उपवास अदि तपस्याएँ करते हैं एवं चैत्री पूनम की आराधना करते हैं. जो लोग उस दिन पलिताना नहीं जा सकते वे अपने स्थान पर ही आदिनाथ भगवन के दर्शन, पूजन अदि करते हैं एवं चैत्री पूनम की क्रियाएं करते हैं.

यह दिन चित्र मास की अष्टान्हिका  एवं नवपद ओली का अंतिम दिन भी होने से इसका महत्व जैन धर्म में और भी बढ़ जाता है.

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1 comment:

  1. Sidhhachkra na gun gana kehta na aave paar,
    Vanchhith Pure dukh hare vandu varam vaar....

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