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Tuesday, January 30, 2018

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का सार्ध शताब्दी महोत्सव सम्पन्न


श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का त्रिदिवसीय सार्ध शताब्दी महोत्सव अत्यंत उल्लासपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। स्थानीय जनों के अतिरिक्त जयपुर, चेन्नई, अहमदाबाद, दिल्ली, होसपेट, बेंगलुरु, मुम्बई, रायपुर, गोवा, वाराणसी, कच्छ, पुणे, चंद्रपुर, पटना,भागलपुर, अजीमगंज, जियागंज आदि स्थानों के गणमान्य व्यक्तियों ने पधार कर प्रभु भक्ति का लाभ लिया।

श्री महावीर स्वामी मंदिर कोलकाता 
26 जनवरी सायंकाल वीर मंडल, कोलकाता ने भक्ति संगीत पेश किया। वीर मंडल कोलकाता के प्रसिद्द मंडलों में से है जिनके संगीत की धूम पुरे भारत में है. साथ ही चेन्नई से पधारे श्री गौतम जैन व जयपुर से पधारे श्री प्रितेश शाह एवं ज्योति कोठारी ने भी स्थानीय कलाकारों श्री वीरेंद्र कोठारी, श्री किशोर सेठिया के साथ अपनी प्रस्तुति दी।

27 जनवरी प्रतिष्ठा दिवस के उपलक्ष्य में प्रातः काल सत्रह भेदी पूजा पढ़ाई गई, 9 वीं ध्वजपूजा के अवसर पर विधिवत शिखर पर ध्वज चढ़ाया गया। विधिकारक श्री मुल्तान चन्द जी सुराणा ने सम्पूर्ण विधि विधान सम्पन्न करवाया। परम पूज्या साध्वी श्री रत्ननिधि श्री जी, पुण्यनिधि श्री जी के सान्निध्य में होने वाले इस कार्यक्रम मे सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। श्री किशोर सेठिया, अंकित चोरडिया एवं मोहित बोथरा ने शास्त्रीय रागों पर आधारित पूजा पढ़ाई। श्रीमद राजचंद्र सत्संग मंडल, हम्पी, कर्नाटक ने भी भक्तिरस की सरिता बहाई। मंदिर की मुख्य ट्रस्टी 95 वर्षीया श्रीमती पुतुल कोठारी ने अत्यंत रुग्णावस्था के बाबजूद ध्वजारोहण में पधार कर अपने दृढ़ मनोवल का परिचय दिया।

कार्यक्रम संयोजक ज्योति कोठारी ने आगमों के उद्धरणों से पूजा, ध्वजारोहण एवं प्रभुभक्ति का महत्व समझाया। उन्होंने यह भी बताया की चतुर्थ दादागुरु देव श्री जिन चंद्रसूरी के विद्यागुरु, तानसेन के समकालीन उपाध्याय साधुकीर्ति उद्भट विद्वान व शास्त्रीय संगीत के ज्ञाता थे. सत्रह भेदी पूजा साधुकीर्ति की विशिष्ट रचना है जिसकी आजसे ४५० वर्ष पूर्व रचना की गई. उनकी प्रेरणा से भक्ति का ऐसा समां बांध की उपस्थित अपार जनमेदिनी झूम उठी और घंटों तक लोग प्रभु भक्ति में झूमते रहे। एक भी पैर ऐसा न था जो थिरका न हो। समारोह के विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय खरतरगच्छ प्रतिनिधि महासभा के अध्यक्ष 90 वर्षीय श्री मोतीलाल जी झाबक और मंत्री श्री संतोष जी गोलेच्छा भी नृत्य किये बिना न रह सके। पूजा के दौरान वासक्षेप, गुलाबजल, व पुष्प ही नही अपितु मोती की भी वर्षा की गई।

श्री मनीष जी नाहरमोहित जी सुराणा एवं अमित जी श्रीमाल ने परमात्मा की भव्य अंगरचना की. कार्यक्रम के दौरान तीनों दिन किये गए फूलों की आंगी की सभी ने भूरी भूरी प्रशंसा की. पूजन पश्चात् साधर्मी वात्सल्य का आयोजन किया गया.

सायंकाल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।  सर्वप्रथम श्रीमती रुमु लोढ़ा, चंद्रपुर ने मंगलाचरण कर कार्यक्रम की शुरुआत की. विशिष्ट अतिथियों ने भगवान् महावीर के प्राचीन चित्र के सामने दीप प्रज्वलन किया. केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य (केंद्रीय राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त) श्री सुनील जी सिंघी की अध्यक्षता में सभा प्रारम्भ हुई। श्री झाबक जी के अतिरिक्त जयपुर से पधारे हुए आगम मर्मज्ञ श्री सुरेन्द्र जी बोथरा, एसियाटिक सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रोफेसर अरुण बैनर्जी, इंडियन म्यूज़ियम, कोलकाता के निदेशक श्री राजेश पुरोहित विशिष्ट अतिथियों की पंक्ति को शोभायमान कर रहे थे।

 मंदिर के निर्माता परिवार के सदस्य डॉक्टर कुमार बहादुर सिंह, वयोवृद्ध श्री विमान जी श्रीमाल, बद्रीदास बहादुर मुकीम परिवार के वरिष्ठ सदस्य श्री चंचल कुमार सिंह मुक़ीम, कोलकाता पंचायती मंदिर के मंत्री श्री सुशील राय सुराणा, एवं खरतर गच्छ संघ, कोलकाता के अध्यक्ष श्री विनोद चन्द जी बोथरा  ने माल्यार्पण कर अतिथियों का स्वागत किया। सभी अतिथियों को सार्ध शताब्दी महोत्सव पर निकाले गए चांदी का सिक्का भी भेंट किया गया.

 न्यूयॉर्क से पधारे श्री इन्द्र रायचौधरी के सितार और वहीं से पधारे उच्छल बैनर्जी के तबले की जुगलबंदी में  राग खंबाज में प्रस्तुत दी। उनके साथ जर्मनी से पधारे ने गिटार में संगत किया. प्रस्तुति इतनी मनमोहक व सटीक थी कि उपस्थित श्रोतागण वाह वाह कर रहे थे और वन्स मोर वन्स मोर कर पुनः पुनः प्रस्तुति देने के लिए मजबूर कर रहे थे। श्री जिन दत्त सूरी महिला मंडल, कोलकाता ने भी एक भजन प्रस्तुत किया.

 इस अवसर पर आगम मर्मज्ञ विद्वतवर्य श्री सुरेंद्र जी बोथरा ने 'मौन की प्राचीर से" नाम की भगवान महावीर पर स्वरचित कविता का पाठ किया एवं उपस्थित श्रोताओं को आगम के कुछ गुढ़ रहस्य समझाये। श्री बोथरा जी अब तक अनेक आगमों का अंग्रेजी अनुवाद कर चुके हैं।

कुशल संस्कार कुंज के लगभग 40 बालक बालिकाओं ने मिलकर भगवान महावीर के जीवन की रूपरेखा प्रस्तुत की। नन्हे नन्हे बालकों की सुंदर एवं समयोपयोगी प्रस्तुति की सराहना किये बिना कोई नही रह सका।

इसके साथ ही इस दिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम  "बंगाल के जैन मंदिर: एक शोध परियोजना"का शुभारंभ भी किया गया। इंडियन म्यूजियम के निदेशक श्री राजेश पुरोहित ने परियोजना का शुभारम्भ करते हुए इस परियोजना में हर तरह का सहयोग देने का आश्वासन दिया।

 इस परियोजना के निदेशक जैन इतिहासज्ञ श्री डॉक्टर शिवप्रसाद जी ने महावीर स्वामी मंदिर एवं इसके निर्माता श्री सुखलाल जी जौहरी से संवंधित इतिहास की जानकारी दी। श्री दीपंकर वैरागी ने बंगाली भाषा मे भगवान महावीर पर कविता पाठ किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री सुनील जी सिंघी ने जैन समुदाय को अल्पसंख्यक समुदाय के दर्जे से मिलनेवाले लाभ बताते हुए कहा कि समाजके धरोहरों के संरक्षण में आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह कर रहा है। उन्होंने उपस्थित समुदाय से आग्रह किया कि सरकार द्वारा प्रदत्त सुविधाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने स्वयं को जिनशासन का सेवक बताते हुए इस सम्वन्ध में सभी प्रकार की सहायता करने का वचन दिया।  कार्यक्रम का संचालन गौतम दी जैन, चेन्नई ने किया एवं ज्योति कोठारी ने धन्यवाद अर्पित किया.

२८ तारिख प्रातःकाल स्नात्र पूजा, शांति स्नात्र एवं दोपहर को दादागुरु देव की पूजा पढाई गई. पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री श्री साधन पाण्डे की धर्मपत्नी श्रीमती शुप्ति पाण्डे विशेष अतिथि के रूप में पधारीं. वे पश्चिम बंगाल सरकार में एजुकेसन कमिटी की सदस्य भी हैं. उन्होंने वर्त्तमान समय की अशान्ति एवं भोगवाद के वातावरण से निकलने के लिए जैन धर्म को एक श्रेष्ठ मार्ग बताया. उन्होंने व्यक्तिगत बातचीत में जैन-जैनेतर सभी के लिए जैन धर्म की कक्षाएं प्रारम्भ करने की प्रेरणा दी और इस सन्दर्भ में सभी प्रकार का सहयोग देने का वादा किया.

इस प्रकार यह भव्य समारोह सानंद संपन्न हुआ.

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Monday, January 22, 2018

बंगाल के जैन मंदिर: एक शोध परियोजना



Jain Temples in Bengal- A Research Project 

Our Associates

Asiatic Society of India        L D Institute           Indian Museum
     Kolkata                     Ahmadabad                 Kolkata

बंगाल के जैन मंदिर: एक शोध परियोजना 

तीर्थंकर महावीर स्वामी 

यह एक सर्वविदित तथ्य है की भगवान महावीर ने बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में परिभ्रमण किया था. वर्धमान और वीरभूम इन दोनों जिलों का नाम इस बात के प्रमाण के रूप में आज भी विद्यमान है  भगवान महावीर के १३०० वर्ष बाद तक भी जैन धर्म बंगाल के प्रमुख धर्मों में से एक रहा लेकिन ईसा की ७वीं शताब्दी के बाद से बंगाल में इसका क्षरण प्रारम्भ हुआ तथा यहाँ पर यह लुप्तप्राय हो गया। 

वीरभूम 

वर्धमान



 बंगाल, बिहार और उत्तरप्रदेश से लुप्त होता हुआ जैन धर्म दक्षिण भारत में पनपा और ईसा की ९वीं शताब्दी से यह गुजरात और राजस्थान में फलने-फूलने लगा। 

भांडाशाह मंदिर बीकानेर , राजस्थान 


जलमंदिर, बाबू देरासर, पालीताना 
 १७वीं-१८वीं सदी से राजस्थान के जैन वणिकगण फिर से बंगाल आने लगे और यहाँ पर जैन धर्म का उदयकाल पुनः प्रारंभ हुआ। नवाब मुर्शीदकुली खां के नजदीकी जगत सेठ के कारण जैन समाज का महत्व बढ़ने लगा और यहाँ से यह पुनरोदय सशक्त होने लगा।  

 तत्कालीन बंगाल सूबे की राजधानी मुर्शीदाबाद से कुछ ही मील की दुरी पर महिमापुर में जगत  सेठ ने पार्श्वनाथ भगवान् का कसौटी के पत्थर का भव्य जिनालय बनवाया।  

कसौटी का खम्भा, महिमापुर 


काठगोला का भव्य विशाल द्वार 
इसके बाद काशिमबाज़ार, दस्तुरहाट,  अजीमगंज, जियागंज, जंगीपुर आदि स्थानों में गोलेच्छा, दुगड़, मुणोत, नाहर, कोठारी, श्रीमाल, छजलानी आदि परिवारों ने अनेकों जिनमंदिर एवं दादाबाड़ियों का निर्माण करवाया।  

पंचतीर्थी- कीरतबाग, जियागंज 
श्री सम्भवनाथ मंदिर, जियागंज 
रत्नों की प्रतिमाएं, छोटी शांतिनाथ, अजीमगंज 
चौवीसी, रामबाग, अजीमगंज 

श्री पार्श्वनाथ, जंगीपुर 
स्फटिक चरण , दादाबाड़ी, अजीमगंज 
१९वीं सदी के पूर्वार्ध से ही अंग्रेजों की राजधानी होने के कारण कोलकाता का महत्व बढ़ने लगा और उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली से जैन समाज के लोग यहाँ आ कर बसने लगे। इसके फल स्वरूप यहाँ जौहरी-साथ के धनाढ्य परिवारों ने कई मंदिरों का निर्माण करवाया।  इनमे टांक परिवार द्वारा निर्मित श्री शांतिनाथ स्वामी का पंचायती मंदिर, राय बद्रीदास बहादुर मुकीम द्वारा निर्मित विश्वप्रसिद्ध श्री शीतलनाथ स्वामी का मंदिर,

श्री शीतलनाथ स्वामी, कोलकाता 


राय बद्रीदास बहादुर मुकीम

श्री गणेशीलाल खारड़ द्वारा निर्मित श्री चंदाप्रभु स्वामी का मंदिर 
एवं श्री सुखलाल जौहरी कृत श्री महावीर स्वामी का मंदिर   विख्यात हैं।  


श्री महावीर स्वामी मन्दिर, कोलकाता का भव्य शिखर 
इन मंदिरों के निर्माण से पहले ही यहाँ एक भव्य दादाबाड़ी का निर्माण हो चूका था. 

कालान्तर में मुर्शिदाबाद से शहरवाली समाज के लोग कोलकाता आ कर बसने लगे और नाहर एवं दुगड़ परिवार ने भी यहाँ मंदिर का निर्माण करवाया।  इसके बाद गुजराती समाज व राजस्थान से आये हुए नए बसे जैनों ने (मारवाड़ी साथ) ने भी यहाँ कई मंदिरों का निर्माण करवाया।

जिनेश्वर सूरी भवन, कोलकाता 
 साथ ही बंगाल के कई अन्य स्थानों जैसे बोलपुर, दुर्गापुर, सैंथिया आदि में भी कई जिनमंदिर बने। इन मंदिरों के निर्माण एवं प्रतिष्ठा में साधु-साध्वियों के अतिरिक्त श्री पूज्यों एवं यतियों का भी विशेष योगदान रहा है.  


श्रीपुज्य जी श्री जिन विजयेन्द्र सूरी 


स्थापत्य एवं कला के अद्भुत नमूने ये सभी मंदिर जैन समाज की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर हैं परन्तु लम्बे समय से इन पर कोई शोध नहीं हुई  है।  


श्री वासुपूज्य स्वामी, अजीमगंज 

श्री नेमिनाथ मंदिर, अजीमगंज 

श्री नेमिनाथ स्वामी, अजीमगंज 
कांच का काम, श्री शीतलनाथ मंदिर, कोलकाता 

श्री नेमिनाथ स्वामी, अजीमगंज

श्री शीतलनाथ स्वामी, कोलकाता

 हमारी इस शोध परियोजना का उद्देश्य विगत तीन सौ वर्षों में बने इन मंदिरों के सम्वन्ध में ऐतिहासिक जानकारी जुटा कर उसे आम लोगों तक पहुंचाना है। जैन साहित्य में सामाजिक इतिहास का क्षेत्र लगभग परित्यक्त ही रहा है, इस दिशा  में भी शोध कार्य को आवश्यक महत्व मिले इस उद्देश्य से इन मदिरों के निर्माण और देख-रेख के कार्यों से जुड़े परिवारों से सम्बंधित इतिहास पर शोध कार्य को भी इस योजना में शामिल किया गया है। 




प्रमुख जैन इतिहासज्ञ वाराणसी के डा. श्री शिवप्रसाद जी ने इस गुरुतर कार्यभार को सँभालने की स्वीकृति दे कर हमें अनुगृहीत किया है, साथ ही देश विदेश के अनेक जानेमाने विद्वान भी इससे जुड़ चुके हैं। कोलकाता की प्रसिद्ध  एशियाटिक सोसाइटी एवं इंडियन म्यूजियम और अहमदाबाद की एल डी इंस्टिट्यूट ने भी परियोजना से जुड़कर हमारा हौसला बढ़ाया है। इसके लिए हम इन संस्थाओं के आभारी हैं। . 

कोलकाता का श्री महावीर स्वामी मंदिर भी इसी विरासत का एक अंग है जिसने आज अपने डेढ़ सौ वर्ष पूरे किए हैं। ऐसी शोध परियोजना प्रारम्भ करने का यह एक उत्तम अवसर है और हम आज इसे आपके समक्ष ला रहे हैं. हमें विश्वास है की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में आप सबका  उदार सहयोग हमें निरंतर प्राप्त होगा।  





परियोजना निदेशक
 डा. शिवप्रसाद, वाराणसी
स्थापत्य एवं कला निदेशक
 डा. श्रीमती चंद्रमणि सिंह, पूर्व निदेशक, सिटी पैलेस म्यूजियम, जयपुर

सम्पादन सलाहकार: 
श्री सुरेंद्र बोथरा, जैन आगम मर्मज्ञ
प्रोफ़ेसर जॉन कोर्ट, डेनिसन विश्वविद्यालय, अमरीका 
प्रोफ़ेसर पीटर फ्लुगल, लन्दन विश्वविद्यालय, यू के 

 संयोजक
ज्योति कुमार कोठारी, जयपुर
२७ जनवरी २०१८

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Thursday, January 11, 2018

महावीर स्वामी मंदिर सार्ध शताब्दी पर मेडिकल कैम्प

 महावीर स्वामी मंदिर सार्ध शताब्दी पर मेडिकल कैम्प

Golden spire Mahavira Swami temple Kolkata
श्री महावीर स्वामी मंदिर कोलकाता 
श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता के सार्ध शताब्दी महोत्सव (१५० वर्ष पूर्ति) के अवसर पर एक मेडिकल कैम्प भी आयोजित किया जायेगा. कोलकाता का खरतर गच्छ संघ इसे महोत्सव के अंतिम दिन २८ जनवरी, रविवार को आयोजित करने जा रहा है. संघ के अध्यक्ष श्री विनोदचंद जी बोथरा नियमित रूप से वर्षों से महावीर स्वामी मंदिर में पूजा एवं स्नात्र करने पधारते रहते हैं.

निःशुल्क मेडिकल कैम्प 
"सेवा" भगवान् महावीर के उपदेश का एक अभिन्न अंग है. समवशरण में देशना देते हुए (जैन आगम भगवती सूत्र में एक प्रश्न के उत्तर में) भगवान् ने कहा है की जो व्यक्ति दीं दुखियों की सेवा करता है वो मेरा सच्चा सेवक है और मेरी पूजा करने से भी अधिक फल प्राप्त करता है. सेवा वैयावच्च का ही एक रूप है और वैयावच्च  जैन धर्म के "वीस स्थानक" के वीस में से एक प्रमुख पद है.

Samavasharan painting at Mahavira Swami temple, Kolkata
महावीर स्वामी मंदिर कोलकाता में समवशरण का एक चित्र 

खरतर गच्छ संघ, कोलकाता ने मंदिर के सार्ध शताब्दी महोत्सव पर मेडिकल कैम्प आयोजित करने का निर्णय ले कर प्रभु की आज्ञा को ही क्रियान्वित किया है और इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं.

इस मेडिकल कैम्प में कई विशेषज्ञ डाक्टरों की सेवाएं ली जाएगी और वे निःशुल्क मरीजों की जांच करेंगे. इससे लोगों को बहुत फायदा होगा, जैन समाज के कई जाने माने डाक्टर इस कैम्प में अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे.

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता के सार्ध शताब्दी महोत्सव

महावीर स्वामी मंदिर के कार्यक्रम में पधारनेवाले अतिथियों का परिचय



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Friday, January 5, 2018

कोलकाता के प्राचीन जैन मंदिर

कोलकाता के प्राचीन जैन मंदिर 

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता १९ वीं एवं वीसवीं सदी में जैन धर्मावलम्वियों का प्रमुख केंद्र रहा है. इस समय में यहाँ अनेकों भव्य कलात्मक जैन मंदिरों का निर्माण हुआ. मुग़ल काल में मुर्शिदाबाद बंगाल की राजधानी थी एवं यह जैन समाज का प्रमुख केंद्र था परन्तु अंग्रेजों ने कोलकाता को अपना केंद्र बनाया और ब्रिटिश काल में जैनों की वस्ति भी मुर्शिदाबाद से धीरे धीरे कोलकाता पहुंचने लगी.

१९वीं सदी में लखनऊ से आये हुए श्रीमालोन का कोलकाता में वर्चस्व रहा और उनलोगों ने ४ जिनमंदिरों का निर्माण करवाया. आज् से दो सौ साल पहले सर्वप्रथम बड़ाबाजार (कलाकार स्ट्रीट) में टांक परिवार ने श्री शांतिनाथ स्वामी के मंदिर का निर्माण करवाया. यह मंदिर तुलपट्टी पंचायती मंदिर के नाम से विख्यात है. इसके साथ ही मानिकतल्ला में एक दादाबाड़ी का भी निर्माण करवाया गया था. यह पंचायती है और इसके निर्माता एवं निर्माण का समय ज्ञात नहीं है.

सन १८६७ में प्रसिद्द जौहरी राय बद्रीदास बहादुर मुकीम ने मानिकतल्ला में श्री शीतलनाथ स्वामी के  विश्वप्रसिद्ध मंदिर का निर्माण कराया. यह पारसनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह पूरा मंदिर बेल्जियम कांच से बना हुआ है. इसके एक वर्ष बाद शीतलनाथ मंदिर के सामने एवं दादाबाड़ी के दाहिनी ओर सन १८६८ में सुखलाल जौहरी ने श्री महावीर स्वामी के विशाल मंदिर का निर्माण कराया. यह कोलकाता के सभी मंदिरों में सबसे बड़ा है इसलिए लगभग सभी बड़ी पुजाएँ यहीं पर होती है. इस मंदिर के रंगमंडप में ४०० से ५०० लोग बैठ सकते हैं.  इसी वर्ष २६ से २८ जनवरी तक इस मंदिर का सार्ध शताब्दी महोत्सव (१५० वर्ष)  मनाया जा रहा है.

महावीर स्वामी मंदिर के निर्माण के कुछ वर्ष बाद खारड़ परिवार ने श्री चंदाप्रभु स्वामी के मंदिर का निर्माण करवाया।  यह मंदिर भी भव्य एवं कलात्मक है.  मानिकतल्ला स्थित तीनों मंदिरों की विशेषता ये है की तीनो ही मंदिर काफी ऊंचाई पर बने हुए हैं और कई सीढ़ियां चढ़कर मंदिर में पंहुचा जा सकता है. तीनो हीहै. मंदिरों में परमात्मा की मनोहारी मूर्तियां है.

मुर्शिदाबाद से आये हुए शहरवाली समाज ने भी कोलकाता में मंदिरों का निर्माण करवाया. इंडियन मिरर स्ट्रीट, धर्मतल्ला में नाहर परिवार द्वारा निर्मित कुमार सिंह हॉल के मंदिर का १०० वर्ष अभी अभी पूरा हुआ है. दुगड़ परिवार का घर देहरासर धर्मतल्ला के ही क्रीक रो में अवस्थित है.

इन प्राचीन मंदिरों के अलावा कैनिंग स्ट्रीट एवं हेसम स्ट्रीट का जैन मंदिर भी लगभग ५० वर्ष पुराना है. उसके बाद कोलकाता में पिछले २०-२५ वर्षों में भी अनेकों जिन मन्दिर का निर्माण हुआ है.

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Wednesday, January 3, 2018

महावीर स्वामी मंदिर के कार्यक्रम में पधारनेवाले अतिथियों का परिचय

महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता के कार्यक्रम में पधारनेवाले अतिथियों का परिचय 

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का सार्ध शताब्दी (१५० वर्ष) महोत्सव दिनांक २६ जनवरी से २८ जनवरी, २०१८ तक धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस कार्यक्रम में देश मोदी के नजदीकी हैं. के अनेक गणमान्य व्यक्ति अतिथि के रूप में पधार रहे हैं. महोत्सव में पधारनेवाले अतिथियों का संक्षिप्त परिचय निम्नरूप है.

श्री साधन पाण्डे 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री साधन पाण्डे पश्चिम बंगाल सरकार में उपभोक्ता संरक्षण एवं स्वरोजगार मंत्रालय में कैबिनेट स्तर के मंत्री हैं.  वे लोकप्रिय जनता हैं एवं कोलकाता से कई बार विधायक रह चुके हैं.



श्री सुनील जी सिंघी 

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री सुनील जी सिंघी, अहमदाबाद कर रहे हैं. वे जैन समाज के गौरव हैं. गुजरात भाजपा में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके श्री सिंघी के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से घनिष्ठ सम्वन्ध है. राजनीति के अल्वा आप सामाजिक/ धार्मिक क्षेत्र में काफी सक्रीय रहे हैं. मूर्तिपूजक युवक महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष के रूप में आपने सराहनीय सेवाएं दी है.  केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग के माननीय सदस्य (केंद्रीय राज्यमंत्री का दर्ज़ा प्राप्त) श्री सिंघी प्रखर वक्ता के रूप में विख्यात हैं. 


Motilal Jhabak Raipur
श्री मोतीलाल जी झाबक 
विशिष्ट अतिथि श्री मोतीलाल जी झाबक वयोवृद्ध समाजसेवी एवं दानवीर हैं. अनेकों अस्पताल, एवं शिक्षण संस्थाएं उनके योगदान की ऋणी है. आपने अष्टापद तीर्थ (मालवा) में एक विशाल दादाबाड़ी का भी निर्माण करवाया है एवं वर्त्तमान में उस ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं. पालीताना में २ वर्ष पूर्व हुए खरतर गच्छ महासम्मेलन के आयोजन में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी. रायपुर निवासी सी झाबक जी अखिल भारतीय श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ प्रतिनिधि महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. प्रतिनिधि महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री श्री संतोष जी गोलेच्छा भी आपके साथ पधार कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे.  

Vimal Chand Surana Jaipur
श्री विमलचन्द जी सुराणा 
विशिष्ट अतिथि श्री विमलचन्द जी सुराणा वो नाम है जिसे भारतभर का जैन समाज जनता है. विलक्षण व्यापारिक प्रतिभा के धनी श्री सुराणा जी दानवीर एवं समाजसेवी होने के साथ ही विपश्यना ध्यान के वरिष्ठ आचार्य भी हैं. वे महावीर कैंसर हॉस्पिटल के मैनेजिंग ट्रस्टी, एस जे विद्यालय / महाविद्यालय समूह के संरक्षक हैं. खरतर गच्छ संघ, जयपुर एवं खरतर गच्छ महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रह चुके हैं. अन्य अनेक धार्मिक सामाजिक संस्थाओं के सञ्चालन में भी आपकी भूमिका रहती है. वर्त्तमान में वे राजस्थान प्रान्त से शेठ आनन्द जीकल्याणजी पेढ़ी के मानद प्रतिनिधि हैं. 


Surendra Bothra photograph by Brian Brazeal
श्री सुरेंद्र जी बोथरा 
विशिष्ट अतिथि श्री सुरेंद्र जी बोथरा जैन दर्शन के वरिष्ठतम विद्वानों में से हैं. आचारांग, भगवती, विपाक, उत्तराध्ययन, अनुयोगद्वार, नंदी जैसे अनेक आगमों का अंग्रेजी अनुवाद कर चुके हैं. इसके अतिरिक्त अनेक पुस्तकों का लेखन, सम्पादन, अनुवाद भी किया है. प्रचार प्रसार से दूर रहकर काम में डूबे रहनेवाले व्यक्ति श्री बोथरा जी अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वरिष्ठ विद्वान हैं. 

उपरोक्त अति विशिष्ट व्यक्तियों के अतिरिक्त चेन्नई के प्रसिद्द एस देवराज जैन परिवार के श्री गौतम जैन, प्रसिद्द जैन इतिहासकार एवं लेखक डा. शिवप्रसाद, वाराणसी, जयपुर के प्रसिद्द गायक श्री अनिल श्रीमाल, श्वेताम्बर जैन साप्ताहिक के संपादक श्री विजेंद्र सिंह लोढ़ा, आगरा, आदि अनेक गणमान्य व्यक्ति बाहर से पधार रहे हैं. इसके अतिरिक्त श्रीमद राजचन्द्र सत्संग मंडल, हम्पी, कर्णाटक के १२५ लोग भी महोत्सव में पधार कर अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे. कोलकाता के भी अनेक विशिष्ट व्यक्तित्व के धनी लोग कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे. 


श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का सार्ध शताब्दी महोत्सव


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Thursday, December 28, 2017

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का सार्ध शताब्दी महोत्सव


श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का सार्ध शताब्दी महोत्सव

महावीर स्वामी मंदिर का स्वर्णिम शिखर 
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मानिकतल्ला में स्थित जैन मंदिरों में श्री महावीर स्वामी मंदिर का अपना एक विशिष्ट स्थान है. इस मंदिर की वास्तुकला देखने लायक है और यह हज़ारों पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करती है. जैन धर्मावलम्बियों के लिए तो यह आस्था का केंद्र है ही.

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का भव्य द्वार 
 इस भव्य मंदिर के निर्माण का १५० वर्ष पूर्ण होने जा रहा है और इस उपलक्ष्य में ३ दिवसीय कार्यक्रम (सार्ध शताब्दी महोत्सव) का भव्य आयोजन २६ से २८ जनवरी २०१८ को किया जा रहा है. एक वर्ष पहले जिस सार्ध शताब्दी वर्ष का शुभारम्भ किया गया था अब उसकी पूर्णाहुति होने जा रही है. इस सम्पूर्ण कार्यक्रम को निश्रा प्रदान करेंगी स्वर्गीया प्रवर्तिनी महोदया परम पूज्या श्री विचक्षण श्री जी महाराज की प्रशिष्या एवं स्वर्गीया प्रवर्तिनी महोदया परम पूज्या श्री चन्द्रप्रभा श्री जी महाराज की सुशिष्या परम पूज्या श्री रत्नानिधि श्री जी एवं पुण्यनिधि श्री जी महाराज.

Invitation Mahavira Swami temple Kolkata
आमन्त्रण पत्रिका 
इस उपलक्ष्य में २६ जनवरी सायंकाल वीर मंडल, कोलकाता एवं श्रीमद राजचन्द्र सत्संग मंडल, हम्पी (कर्णाटक) द्वारा भक्तिरस की सरिता बहाई जायेगी। २७ तारीख प्रातः ९ बजे से सत्रह भेदी पूजा पढाई जायेगी एवं साढ़े दस बजे ध्वजारोहण होगा. १५० वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शिखर पर ध्वजा चढ़ाई जाएगी, अतः इस अवसर पर अवश्य पधारने की कृपा करें. श्री मुल्तान चन्द जी सुराणा सम्पूर्ण विधि विधान संपन्न करवाएंगे. साम साढ़े पांच बजे से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा।

इस कार्यक्रम में कुशल संस्कार कुञ्ज के बालक बालिकाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जायेगा. न्यूयोर्क, अमरीका के प्रसिद्द सितार वादक इंद्र रायचौधरी एवं तबला वादक उच्छल बनर्जी जुगलबंदी पेश करेंगे. रात्रि में श्री जिन दत्त सूरी महिला मंडल द्वारा भक्ति संगीत का कार्यक्रम रहेगा.

मंदिर के अंदर समवशरण का नयनाभिराम चित्र 
 कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार के माननीय मंत्री श्री साधन पण्डे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे. केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग के माननीय सदस्य (केंद्रीय राज्यमंत्री का दर्ज़ा प्राप्त) श्री सुनील जी सिंघी, अहमदाबाद  कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे.  अखिल भारतीय श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ प्रतिनिधि महासभा के अध्यक्ष श्री मोतीलाल जी झाबक, रायपुर; जैन आगमों के मर्मज्ञ विद्वान् (व अंग्रेजी अनुवादक) श्री सुरेंद्र जी बोथरा, व प्रसिद्द व्यवसायी एवं समाजसेवी श्री विमल चन्द जी सुराणा, जयपुर विशिष्ट अतिथि होंगे. इसके अतिरिक्त कोलकाता शहर एवं देश के विभिन्न भागों से अनेकों गणमान्य व्यक्ति भी इस कार्यक्रम में पधार कर जिनशासन की शोभा बढ़ायेंगे।

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता के अंदर कांच एवं टाइल्स का काम 
 २८ जनवरी प्रातःकाल ९ बजे से स्नात्र पूजा पढाई जाएगी एवं उसके बाद शांति स्नात्र का आयोजन रहेगा. इस सम्पूर्ण कार्यक्रम में सभी साधर्मी वन्धुओं की उपस्थिति सादर प्रार्थनीय है.

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता के बाग़ बगीचे 
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Monday, January 23, 2017

150 years celebration of Mahavira Swami temple, Kolkata

150 years celebration of Mahavira Swami temple, Kolkata

Mahavira Swami Shwetambar Jain temple is one of the oldest Jain temples in Kolkata, built by Sri Sukhlal Johri in the year 1868. There will be a year-long celebration of 150th year of the temple commencing from Monday, February 6, 2017.


There will be "Sri Mahavira Swami Mahapujan" on the establishment day, i.e Magh Shukla Dasami that falls this year on February 6. Dhwajarohan (Flag hoisting) will take place during the Mahapoojan followed by a Sadharmi Vatsalya (Lunch).

Samavasaran at Mahavira Swami temple, Kolkata

Wall painting at Mahavira Swami temple, Kolkata
The program will be organized under the auspices of Sadhvi Sri Sanyampurna Sri Ji, Chandanbala Sri Ji et al. Jyoti Kothari, Jaipur has planned and organized the Mahapoojan that is to occur first time ever. This is a distinguished Mahapoojan derived from the old Jain canons such as Sutrakritang, Samavayang, Upasagdasang and Dashashrutskandh. Sri Yashwant Golechha, Jaipur will perform all rituals.

Srimati Putul Kothari and Sri Pradip-Kuldip Mahamwal family will sponsor the whole program. This is worth mention that this is the first program of the year-long celebrations. You will be informed of about the next program in due course.

All of you are cordially invited to the celebration with your family and friends.

 श्री महावीर स्वामी मन्दिर, कोलकाता का सार्द्ध शताब्दी महोत्सव


क्या है महावीर स्वामी महापूजन?


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