Pages

Thursday, January 11, 2018

महावीर स्वामी मंदिर सार्ध शताब्दी पर मेडिकल कैम्प

 महावीर स्वामी मंदिर सार्ध शताब्दी पर मेडिकल कैम्प

Golden spire Mahavira Swami temple Kolkata
श्री महावीर स्वामी मंदिर कोलकाता 
श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता के सार्ध शताब्दी महोत्सव (१५० वर्ष पूर्ति) के अवसर पर एक मेडिकल कैम्प भी आयोजित किया जायेगा. कोलकाता का खरतर गच्छ संघ इसे महोत्सव के अंतिम दिन २८ जनवरी, रविवार को आयोजित करने जा रहा है. संघ के अध्यक्ष श्री विनोदचंद जी बोथरा नियमित रूप से वर्षों से महावीर स्वामी मंदिर में पूजा एवं स्नात्र करने पधारते रहते हैं.

निःशुल्क मेडिकल कैम्प 
"सेवा" भगवान् महावीर के उपदेश का एक अभिन्न अंग है. समवशरण में देशना देते हुए (जैन आगम भगवती सूत्र में एक प्रश्न के उत्तर में) भगवान् ने कहा है की जो व्यक्ति दीं दुखियों की सेवा करता है वो मेरा सच्चा सेवक है और मेरी पूजा करने से भी अधिक फल प्राप्त करता है. सेवा वैयावच्च का ही एक रूप है और वैयावच्च  जैन धर्म के "वीस स्थानक" के वीस में से एक प्रमुख पद है.

Samavasharan painting at Mahavira Swami temple, Kolkata
महावीर स्वामी मंदिर कोलकाता में समवशरण का एक चित्र 

खरतर गच्छ संघ, कोलकाता ने मंदिर के सार्ध शताब्दी महोत्सव पर मेडिकल कैम्प आयोजित करने का निर्णय ले कर प्रभु की आज्ञा को ही क्रियान्वित किया है और इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं.

इस मेडिकल कैम्प में कई विशेषज्ञ डाक्टरों की सेवाएं ली जाएगी और वे निःशुल्क मरीजों की जांच करेंगे. इससे लोगों को बहुत फायदा होगा, जैन समाज के कई जाने माने डाक्टर इस कैम्प में अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे.

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता के सार्ध शताब्दी महोत्सव

महावीर स्वामी मंदिर के कार्यक्रम में पधारनेवाले अतिथियों का परिचय



Vardhaman Infotech
A leading IT company in Jaipur
Rajasthan, India
E-mail: info@vardhamaninfotech.com

allvoices

Friday, January 5, 2018

कोलकाता के प्राचीन जैन मंदिर

कोलकाता के प्राचीन जैन मंदिर 

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता १९ वीं एवं वीसवीं सदी में जैन धर्मावलम्वियों का प्रमुख केंद्र रहा है. इस समय में यहाँ अनेकों भव्य कलात्मक जैन मंदिरों का निर्माण हुआ. मुग़ल काल में मुर्शिदाबाद बंगाल की राजधानी थी एवं यह जैन समाज का प्रमुख केंद्र था परन्तु अंग्रेजों ने कोलकाता को अपना केंद्र बनाया और ब्रिटिश काल में जैनों की वस्ति भी मुर्शिदाबाद से धीरे धीरे कोलकाता पहुंचने लगी.

१९वीं सदी में लखनऊ से आये हुए श्रीमालोन का कोलकाता में वर्चस्व रहा और उनलोगों ने ४ जिनमंदिरों का निर्माण करवाया. आज् से दो सौ साल पहले सर्वप्रथम बड़ाबाजार (कलाकार स्ट्रीट) में टांक परिवार ने श्री शांतिनाथ स्वामी के मंदिर का निर्माण करवाया. यह मंदिर तुलपट्टी पंचायती मंदिर के नाम से विख्यात है. इसके साथ ही मानिकतल्ला में एक दादाबाड़ी का भी निर्माण करवाया गया था. यह पंचायती है और इसके निर्माता एवं निर्माण का समय ज्ञात नहीं है.

सन १८६७ में प्रसिद्द जौहरी राय बद्रीदास बहादुर मुकीम ने मानिकतल्ला में श्री शीतलनाथ स्वामी के  विश्वप्रसिद्ध मंदिर का निर्माण कराया. यह पारसनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह पूरा मंदिर बेल्जियम कांच से बना हुआ है. इसके एक वर्ष बाद शीतलनाथ मंदिर के सामने एवं दादाबाड़ी के दाहिनी ओर सन १८६८ में सुखलाल जौहरी ने श्री महावीर स्वामी के विशाल मंदिर का निर्माण कराया. यह कोलकाता के सभी मंदिरों में सबसे बड़ा है इसलिए लगभग सभी बड़ी पुजाएँ यहीं पर होती है. इस मंदिर के रंगमंडप में ४०० से ५०० लोग बैठ सकते हैं.  इसी वर्ष २६ से २८ जनवरी तक इस मंदिर का सार्ध शताब्दी महोत्सव (१५० वर्ष)  मनाया जा रहा है.

महावीर स्वामी मंदिर के निर्माण के कुछ वर्ष बाद खारड़ परिवार ने श्री चंदाप्रभु स्वामी के मंदिर का निर्माण करवाया।  यह मंदिर भी भव्य एवं कलात्मक है.  मानिकतल्ला स्थित तीनों मंदिरों की विशेषता ये है की तीनो ही मंदिर काफी ऊंचाई पर बने हुए हैं और कई सीढ़ियां चढ़कर मंदिर में पंहुचा जा सकता है. तीनो हीहै. मंदिरों में परमात्मा की मनोहारी मूर्तियां है.

मुर्शिदाबाद से आये हुए शहरवाली समाज ने भी कोलकाता में मंदिरों का निर्माण करवाया. इंडियन मिरर स्ट्रीट, धर्मतल्ला में नाहर परिवार द्वारा निर्मित कुमार सिंह हॉल के मंदिर का १०० वर्ष अभी अभी पूरा हुआ है. दुगड़ परिवार का घर देहरासर धर्मतल्ला के ही क्रीक रो में अवस्थित है.

इन प्राचीन मंदिरों के अलावा कैनिंग स्ट्रीट एवं हेसम स्ट्रीट का जैन मंदिर भी लगभग ५० वर्ष पुराना है. उसके बाद कोलकाता में पिछले २०-२५ वर्षों में भी अनेकों जिन मन्दिर का निर्माण हुआ है.

Vardhaman Infotech
A leading IT company in Jaipur
Rajasthan, India
E-mail: info@vardhamaninfotech.com
allvoices

Wednesday, January 3, 2018

महावीर स्वामी मंदिर के कार्यक्रम में पधारनेवाले अतिथियों का परिचय

महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता के कार्यक्रम में पधारनेवाले अतिथियों का परिचय 

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का सार्ध शताब्दी (१५० वर्ष) महोत्सव दिनांक २६ जनवरी से २८ जनवरी, २०१८ तक धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस कार्यक्रम में देश मोदी के नजदीकी हैं. के अनेक गणमान्य व्यक्ति अतिथि के रूप में पधार रहे हैं. महोत्सव में पधारनेवाले अतिथियों का संक्षिप्त परिचय निम्नरूप है.

श्री साधन पाण्डे 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री साधन पाण्डे पश्चिम बंगाल सरकार में उपभोक्ता संरक्षण एवं स्वरोजगार मंत्रालय में कैबिनेट स्तर के मंत्री हैं.  वे लोकप्रिय जनता हैं एवं कोलकाता से कई बार विधायक रह चुके हैं.



श्री सुनील जी सिंघी 

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री सुनील जी सिंघी, अहमदाबाद कर रहे हैं. वे जैन समाज के गौरव हैं. गुजरात भाजपा में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके श्री सिंघी के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से घनिष्ठ सम्वन्ध है. राजनीति के अल्वा आप सामाजिक/ धार्मिक क्षेत्र में काफी सक्रीय रहे हैं. मूर्तिपूजक युवक महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष के रूप में आपने सराहनीय सेवाएं दी है.  केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग के माननीय सदस्य (केंद्रीय राज्यमंत्री का दर्ज़ा प्राप्त) श्री सिंघी प्रखर वक्ता के रूप में विख्यात हैं. 


Motilal Jhabak Raipur
श्री मोतीलाल जी झाबक 
विशिष्ट अतिथि श्री मोतीलाल जी झाबक वयोवृद्ध समाजसेवी एवं दानवीर हैं. अनेकों अस्पताल, एवं शिक्षण संस्थाएं उनके योगदान की ऋणी है. आपने अष्टापद तीर्थ (मालवा) में एक विशाल दादाबाड़ी का भी निर्माण करवाया है एवं वर्त्तमान में उस ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं. पालीताना में २ वर्ष पूर्व हुए खरतर गच्छ महासम्मेलन के आयोजन में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी. रायपुर निवासी सी झाबक जी अखिल भारतीय श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ प्रतिनिधि महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. प्रतिनिधि महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री श्री संतोष जी गोलेच्छा भी आपके साथ पधार कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे.  

Vimal Chand Surana Jaipur
श्री विमलचन्द जी सुराणा 
विशिष्ट अतिथि श्री विमलचन्द जी सुराणा वो नाम है जिसे भारतभर का जैन समाज जनता है. विलक्षण व्यापारिक प्रतिभा के धनी श्री सुराणा जी दानवीर एवं समाजसेवी होने के साथ ही विपश्यना ध्यान के वरिष्ठ आचार्य भी हैं. वे महावीर कैंसर हॉस्पिटल के मैनेजिंग ट्रस्टी, एस जे विद्यालय / महाविद्यालय समूह के संरक्षक हैं. खरतर गच्छ संघ, जयपुर एवं खरतर गच्छ महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रह चुके हैं. अन्य अनेक धार्मिक सामाजिक संस्थाओं के सञ्चालन में भी आपकी भूमिका रहती है. वर्त्तमान में वे राजस्थान प्रान्त से शेठ आनन्द जीकल्याणजी पेढ़ी के मानद प्रतिनिधि हैं. 


Surendra Bothra photograph by Brian Brazeal
श्री सुरेंद्र जी बोथरा 
विशिष्ट अतिथि श्री सुरेंद्र जी बोथरा जैन दर्शन के वरिष्ठतम विद्वानों में से हैं. आचारांग, भगवती, विपाक, उत्तराध्ययन, अनुयोगद्वार, नंदी जैसे अनेक आगमों का अंग्रेजी अनुवाद कर चुके हैं. इसके अतिरिक्त अनेक पुस्तकों का लेखन, सम्पादन, अनुवाद भी किया है. प्रचार प्रसार से दूर रहकर काम में डूबे रहनेवाले व्यक्ति श्री बोथरा जी अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वरिष्ठ विद्वान हैं. 

उपरोक्त अति विशिष्ट व्यक्तियों के अतिरिक्त चेन्नई के प्रसिद्द एस देवराज जैन परिवार के श्री गौतम जैन, प्रसिद्द जैन इतिहासकार एवं लेखक डा. शिवप्रसाद, वाराणसी, जयपुर के प्रसिद्द गायक श्री अनिल श्रीमाल, श्वेताम्बर जैन साप्ताहिक के संपादक श्री विजेंद्र सिंह लोढ़ा, आगरा, आदि अनेक गणमान्य व्यक्ति बाहर से पधार रहे हैं. इसके अतिरिक्त श्रीमद राजचन्द्र सत्संग मंडल, हम्पी, कर्णाटक के १२५ लोग भी महोत्सव में पधार कर अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे. कोलकाता के भी अनेक विशिष्ट व्यक्तित्व के धनी लोग कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे. 


श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का सार्ध शताब्दी महोत्सव


Vardhaman Infotech
A leading IT company in Jaipur
Rajasthan, India
E-mail: info@vardhamaninfotech.com
allvoices

Thursday, December 28, 2017

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का सार्ध शताब्दी महोत्सव


श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का सार्ध शताब्दी महोत्सव

महावीर स्वामी मंदिर का स्वर्णिम शिखर 
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मानिकतल्ला में स्थित जैन मंदिरों में श्री महावीर स्वामी मंदिर का अपना एक विशिष्ट स्थान है. इस मंदिर की वास्तुकला देखने लायक है और यह हज़ारों पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करती है. जैन धर्मावलम्बियों के लिए तो यह आस्था का केंद्र है ही.

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता का भव्य द्वार 
 इस भव्य मंदिर के निर्माण का १५० वर्ष पूर्ण होने जा रहा है और इस उपलक्ष्य में ३ दिवसीय कार्यक्रम (सार्ध शताब्दी महोत्सव) का भव्य आयोजन २६ से २८ जनवरी २०१८ को किया जा रहा है. एक वर्ष पहले जिस सार्ध शताब्दी वर्ष का शुभारम्भ किया गया था अब उसकी पूर्णाहुति होने जा रही है. इस सम्पूर्ण कार्यक्रम को निश्रा प्रदान करेंगी स्वर्गीया प्रवर्तिनी महोदया परम पूज्या श्री विचक्षण श्री जी महाराज की प्रशिष्या एवं स्वर्गीया प्रवर्तिनी महोदया परम पूज्या श्री चन्द्रप्रभा श्री जी महाराज की सुशिष्या परम पूज्या श्री रत्नानिधि श्री जी एवं पुण्यनिधि श्री जी महाराज.

Invitation Mahavira Swami temple Kolkata
आमन्त्रण पत्रिका 
इस उपलक्ष्य में २६ जनवरी सायंकाल वीर मंडल, कोलकाता एवं श्रीमद राजचन्द्र सत्संग मंडल, हम्पी (कर्णाटक) द्वारा भक्तिरस की सरिता बहाई जायेगी। २७ तारीख प्रातः ९ बजे से सत्रह भेदी पूजा पढाई जायेगी एवं विजय मुहूर्त में ध्वजारोहण होगा. श्री मुल्तान चन्द जी सुराणा सम्पूर्ण विधि विधान संपन्न करवाएंगे. साम साढ़े पांच बजे से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा।

इस कार्यक्रम में कुशल संस्कार कुञ्ज के बालक बालिकाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जायेगा. न्यूयोर्क, अमरीका के प्रसिद्द सितार वादक इंद्र रायचौधरी एवं तबला वादक उच्छल बनर्जी जुगलबंदी पेश करेंगे. रात्रि में श्री जिन दत्त सूरी महिला मंडल द्वारा भक्ति संगीत का कार्यक्रम रहेगा.

मंदिर के अंदर समवशरण का नयनाभिराम चित्र 
 कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार के माननीय मंत्री श्री साधन पण्डे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे. केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग के माननीय सदस्य (केंद्रीय राज्यमंत्री का दर्ज़ा प्राप्त) श्री सुनील जी सिंघी, अहमदाबाद  कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे.  अखिल भारतीय श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ प्रतिनिधि महासभा के अध्यक्ष श्री मोतीलाल जी झाबक, रायपुर; जैन आगमों के मर्मज्ञ विद्वान् (व अंग्रेजी अनुवादक) श्री सुरेंद्र जी बोथरा, व प्रसिद्द व्यवसायी एवं समाजसेवी श्री विमल चन्द जी सुराणा, जयपुर विशिष्ट अतिथि होंगे. इसके अतिरिक्त कोलकाता शहर एवं देश के विभिन्न भागों से अनेकों गणमान्य व्यक्ति भी इस कार्यक्रम में पधार कर जिनशासन की शोभा बढ़ायेंगे।

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता के अंदर कांच एवं टाइल्स का काम 
 २८ जनवरी प्रातःकाल ९ बजे से स्नात्र पूजा पढाई जाएगी एवं उसके बाद शांति स्नात्र का आयोजन रहेगा. इस सम्पूर्ण कार्यक्रम में सभी साधर्मी वन्धुओं की उपस्थिति सादर प्रार्थनीय है.

श्री महावीर स्वामी मंदिर, कोलकाता के बाग़ बगीचे 
Vardhaman Infotech
A leading IT company in Jaipur Rajasthan, India
E-mail: info@vardhamaninfotech.com
http://vardhamaninfotech.com/


allvoices

Monday, January 23, 2017

150 years celebration of Mahavira Swami temple, Kolkata

150 years celebration of Mahavira Swami temple, Kolkata

Mahavira Swami Shwetambar Jain temple is one of the oldest Jain temples in Kolkata, built by Sri Sukhlal Johri in the year 1868. There will be a year-long celebration of 150th year of the temple commencing from Monday, February 6, 2017.


There will be "Sri Mahavira Swami Mahapujan" on the establishment day, i.e Magh Shukla Dasami that falls this year on February 6. Dhwajarohan (Flag hoisting) will take place during the Mahapoojan followed by a Sadharmi Vatsalya (Lunch).

Samavasaran at Mahavira Swami temple, Kolkata

Wall painting at Mahavira Swami temple, Kolkata
The program will be organized under the auspices of Sadhvi Sri Sanyampurna Sri Ji, Chandanbala Sri Ji et al. Jyoti Kothari, Jaipur has planned and organized the Mahapoojan that is to occur first time ever. This is a distinguished Mahapoojan derived from the old Jain canons such as Sutrakritang, Samavayang, Upasagdasang and Dashashrutskandh. Sri Yashwant Golechha, Jaipur will perform all rituals.

Srimati Putul Kothari and Sri Pradip-Kuldip Mahamwal family will sponsor the whole program. This is worth mention that this is the first program of the year-long celebrations. You will be informed of about the next program in due course.

All of you are cordially invited to the celebration with your family and friends.

 श्री महावीर स्वामी मन्दिर, कोलकाता का सार्द्ध शताब्दी महोत्सव


क्या है महावीर स्वामी महापूजन?


Vardhaman Infotech 
A leading IT company in Jaipur
Rajasthan, India
E-mail: info@vardhamaninfotech.com
91-141-2601898
allvoices

Thursday, January 12, 2017

क्या है महावीर स्वामी महापूजन?

क्या है महावीर स्वामी महापूजन?

क्या है महावीर स्वामी महापूजन? यह प्रश्न मुझे कई लोग पूछ रहे हैं. अभी कुछ दिन पूर्व ही मैंने इस जैन एंड जैनिज़्म ब्लॉग में लिखा था की कोलकाता के महावीर स्वामी मंदिर के १५० वर्ष प्रारम्भ होने के उपलक्ष्य में ६ फरबरी, २०१७ को श्री महावीर स्वामी महापूजन पढ़ाई जाएगी। यह पूजा विश्व में पहली बार होने जा रही है इसलिए इसके बारे में जानने  की इच्छा होना स्वाभाविक ही है. मैंने उस ब्लॉग पोस्ट में यह भी लिखा था की यह पूजा जैन आगम ग्रन्थ सूयगडांग (सूत्रकृतांग) पर आधारित है.

कोलकाता के महावीर स्वामी मंदिर के १५० वर्ष प्रारम्भ होने के उपलक्ष्य में ६ फरबरी, २०१७ को श्री महावीर स्वामी महापूजन पढ़ाई जाएगी। यह पूजा विश्व में पहली बार होने जा रही है. यह पूजा आगम ग्रन्थ सूयगडांग (सूत्रकृतांग) सूत्र पर आधारित है. अवश्य पधारें. अवसर न चुकें।
महापूजन का एक दृश्य १ 

महापूजन का एक दृश्य 
यह पूजा अत्यंत विशिष्ट कोटि की है अतः श्रद्धालु गणों से निवेदन है की पूरी पूजा में बैठ कर इस का लाभ लें. पूजा में श्लोकों के साथ उसका विवेचन भी किया जाएगा जिससे आगंतुकों को विशेष लाभ होगा। पूजा की विस्तृत जानकारी तो पूजा में आने पर ही होगी लेकिन इसका संक्षिप्त स्वरुप यहाँ बताया जा रहा है.

सूयगडांग (सूत्रकृतांग) सूत्र के प्रथम श्रुतस्कंध के छठे अध्याय में प्रभु महावीर की स्तुति की गई है जिसमे लोगों के पूछे जाने पर गणधर श्री सुधर्मा स्वामी ने भगवान् महावीर के अतिशय युक्त जीवन के सम्वन्ध में बताया है. इन्ही सूत्रों के आधार पर सर्वप्रथम भगवान् महावीर की अष्टप्रकारी पूजा होगी। इसके बाद दशाश्रुतस्कन्ध नाम के आगम के आधार पर भगवान् के कल्याणकों की पूजा होगी. तत्पश्चात भगवान् के अष्ट प्रातिहार्य व अतिशयों की पूजा होगी जिसका आधार सूयगडांग (सूत्रकृतांग) सूत्र के प्रथम श्रुतस्कंध के बारहवें अध्याय "समवशरण"व समवायांग सूत्र (चौथा अंग) होगा।

इसके बाद स्थविरावली (कल्पसूत्र) एवं गणधरवाद (विशेषावश्यक भाष्य) के आधार से ग्यारह गणधरों की व साथ में प्रभु महावीर के चौदह हज़ार साधु व छतीस हज़ार साध्वी भगवंतों की पूजा होगी। तत्पश्चात उपासक दशांग सूत्र में वर्णित दस प्रतिमाधारी श्रावकों की व भगवान् के कुल एक लाख उनसठ हज़ार श्रावकों की व तीन लाख अठारह हज़ार श्राविकाओं की पूजा होगी।

इन सबके अतिरिक्त भगवान् महावीर के माता पिता, शासन देव-देवी, अष्ट मंगल, नवनिधि, नवग्रह, दस दिकपाल आदि का आह्वान पूजन आदि भी विधि विधान से संपन्न होगा। महावीर स्वामी महापूजन के साथ ही शिखर पर ध्वजारोहण भी विधि पूर्वक कराया जायेगा।

जैन आगमों की रूपरेखा एवं इतिहास
श्री महावीर स्वामी मन्दिर, कोलकाता का सार्द्ध शताब्दी महोत्सव

#महावीर #स्वामी #मंदिर #महापूजन #सूत्रकृतांग #सूयगडांग #ध्वजारोहण #कोलकाता






allvoices

Saturday, January 7, 2017

जैन आगमों की रूपरेखा एवं इतिहास


जैन धर्म तीर्थंकर भगवन महावीर के उपदेशों पर आधारित है और उनकी गणधरों द्वारा सुत्रवद्ध वाणी एवं  १४/१० पूर्वधरों द्वारा रचित शास्त्र आगम के रूप में जानी जाती है. यह सभी जानते हैं की तीर्थंकर जो उपदेश देते हैं उन्हें गणधर भगवंत संकलित एवं सुत्रवद्ध करते हैं. इन्हें आगम कहा जाता है और यह द्वादशांगी अर्थात बारह (१२) भागों में विभाजित है. इन्हें ही अंग सूत्र कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है की भगवान् महावीर के पंचम गणधर श्री सुधर्मा स्वामी ११ गणधरों में सबसे अंत में मोक्ष गए. उन्होंने अपने प्रमुख शिष्य जम्बू स्वामी को इन बारह अंगों का उपदेश दिया और उन्होंने इसे शिष्य परंपरा से आगे बढ़ाया।  इन १२ अंगों में से १२ वां दृष्टिवाद विलुप्त हो चूका है जिसका एक भाग चौदह (१४) पूर्व के रूप में विख्यात है. इस समय ग्यारह अंग उपलव्ध हैं.

जैन आगमों का अवलोकन करते हुए विदेशी विद्वान् 
यह ग्यारह अंग निम्न प्रकार हैं
१. आचारांग २. सूत्रकृतांग ३. स्थानांग ४. समवायांग ५. भगवती (व्याख्या प्रज्ञप्ति) ६. ज्ञाताधर्मकथा ७. उपासक दसांग ८. अंतकृत दसांग ९. प्रश्नव्याकरण १०. अनुत्तरोपपातिक ११.  विपाक

गणधर कृत एवं वर्त्तमान में उपलव्ध ११ अंगों के अलावा चौदह एवं दस पूर्वधर आचार्यों द्वारा लिखित सूत्र भी आगम माना जाता है. चौदह एवं दस पूर्वधर आचार्यों द्वारा लिखित या संकलित बारह उपांग, छह छेद, दस प्रकीर्णक, चार मूलसूत्र, अनुयोगद्वार और नंदी सूत्र इस प्रकार चउतीस और मिला कर कुल पैतालीस आगम वर्त्तमान में पाए जाते हैं.

भगवान् महावीर स्वामी के समय ये सभी सूत्र लिखे नहीं जाते थे और गुरु परंपरा से शिष्य इन्हें श्रुत रूप में प्राप्त करते थे. इसलिए इन आगमों के ज्ञान को श्रुत ज्ञान भी कहा जाता है।  कालक्रम से स्मृति शक्ति कमजोर होने पर इन्हें याद रखना कठिन हो गया तब भगवान् महावीर के निर्वाण के ९८० वर्ष बाद देवर्धिगणी क्षमाश्रमण ने इन्हें संकलित कर लिपिवद्ध करवाया तब से आगमों को लिखने की परंपरा प्रारम्भ हुई.

इन आगमों पर परवर्ती आचार्यों एवं विद्वान् मुनियों ने निर्युक्ति, चूर्णी, भाष्य एवं टीकाएँ लिखी। इन के माध्यम से उन्होंने आगमों के अर्थ को समझाया एवं उस पर विस्तृत विवेचन किया। मूल आगम, निर्युक्ति, चूर्णी, भाष्य एवं टीका (कुल पांच) मिलकर पंचांगी बनती है और इस पंचांगों को जैनागम कहा जाता है. मूर्तिपूजक परंपरा पैतालीस आगमों की पंचांगों को स्वीकार करती है जबकि स्थानकवासी एवं तेरापंथी परंपरा इनमे से ३२ आगमों को हिमान्याता देती है. स्वाभाविक रूप से जिन आगमों में मूर्तिपूजा का उल्लेख है उन्हें यह परंपराएं (मूर्ति एवं मंदिर का निषेध करने के कारण) मान्य नहीं करती।

वर्तमान में उपलव्ध सभी जैन शास्त्रों का आधार इन्ही ४५ आगमों को माना जाता है. भगवान् महावीर के बाद २५०० वर्षों से भी अधिक समय व्यतीत हो चूका है और इस अवधि में पूर्वाचार्यों,  विद्वान् संतों, यतियों, भट्टारकों, यहाँ तक की श्रावकों ने भी विपुल मात्रा में जैन आध्यात्मिक एवं धार्मिक साहित्य का सृजन किया है. ये ग्रन्थ जन- जन का मार्गदर्शन करते हैं एवं उनके ज्ञान में अभिवृद्धि करते हैं.

सूत्रकृतांग एवं अन्य अगम ग्रंथों पर आधारित महावीर स्वामी महापूजन का आयोजन ६ फरबरी, २०१७ को कोलकाता में होने जा रहा है. जानने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें


श्री महावीर स्वामी मन्दिर, कोलकाता का सार्द्ध शताब्दी महोत्सव


Vardhaman Infotech
A leading IT company in Jaipur
Rajasthan, India
E-mail: info@vardhamaninfotech.com /

#जैनागम #जैन #आगम  #निर्युक्ति #चूर्णी #भाष्य #टीका #भगवान #महावीर #गणधर #पंचांगी #इतिहास
Jain and Jainism,  Jain Agam, Jain Canon,
जैन आगमों की रूपरेखा एवं इतिहास
allvoices