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Wednesday, November 16, 2016

मेतारज पैदल यात्री संघ ने दिए तीन मंदिरों के लिए ज़मीन

 


मेतारज पैदल यात्री संघ  आज अपने दूसरे दिन में भी सुबह से ही भक्ति एवं आराधना में लग गया. प्रातःकाल जब सभी यात्री गैन प्रार्थना कर रहे थे उस समय पूज्य साध्वी श्री मणिप्रभा श्री जी महाराज मुल्तान मंदिर पधारीं जहाँ उन्होंने पूज्य गणिवर्य श्री मणिरत्नसागर जी को वंदना की एवं उपस्थित यात्री संघ को संबोधित किया। जिनदर्शन, पूजा, नाश्ता आदि के बाद पूज्य गणिवर्य श्री मणिरत्नसागर जी की निश्रा में धर्मसभा प्रारम्भ हुई जिसमे गणिवर्य श्री ने इस विशेष यात्रा संघ का महत्व बताया एवं तिम्मनगढ़ क्षेत्र में हो रहे जाटव एवं अन्य जैनेतर समाजों में संस्कार आरोपण की जानकारी दी।  


इसके बाद उस क्षेत्र से पधारे हुए तीन यत्रियों ने अपनी ज़मीन जैन मंदिर बनाने हेतु समर्पित की जिसे यात्रा के संयोजक श्री ज्योति कोठारी ने स्वीकार किया। सभा में आमंत्रित जयपुर नगरपालिका के पार्षद श्री विकास कोठारी, श्री ज्योति कोठारी एवं श्री विमल भंसाली का स्वागत मुल्तान संघ के अध्यक्ष डा. कमल चन्द जैन एवं मंत्री श्री नेमकुमार जैन ने किया। ज्योति कोठारी ने बताया की जैन धर्म जन्म से नहीं अपितु कर्म से किसी का ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शुद्र होना स्वीकार करता है. शुद्र कुल में उत्पन्न हरिकेशवल एवं मेटराज जैसे महामुनियों ने केवल ज्ञान प्राप्त कर मनुष्य जीवन को सफल बनाया। उन्होंने आगे बताया की चार वर्ष पूर्व इन जाटवों को खरतर गच्छ संघ, जयपुर के संघमंत्री के रूप में उन्होंने मेतारज गोत्र प्रदान कर इन्हें जैन समाज की मुख्य धारा में सम्मिलित किया था. 


पार्षद (वार्ड ६६) श्री विकास कोठारी ने जैन ध्वज दिखा कर पैदल यात्री संघ को रवाना किया एवं संघ वहां से चल कर श्री विजय गच्छ के मंदिर, जोहरी बाजार पंहुचा. वहां पर मंदिर के मंत्री श्री प्रकाश चन्द बांठिया ने संघ का स्वागत किया। तत्पश्चात संघ खरतर गच्छ के मुख्यालय शिवजीराम भवन पंहुचा जहाँ पर संघ मंत्री श्री अनूप पारख एवं अन्य ट्रस्टियों ने संघ का स्वागत एवं संघ पूजन किया। तत्पश्चात संघ ने आगरे वालों का मंदिर एवं श्री सुपार्श्वनाथ स्वामी के बड़े मंदिर एवं श्रीमालों के मंदिर का दर्शन कर  श्री सुमतिनाथ स्वामी के मंदिर पंहुचा जहाँ पर तपागच्छ के संघमंत्री राकेश मुणोत ने अन्य ट्रस्टियों के साथ संघ का बहुमान किया। 

मोहनबाड़ी में निर्माणाधीन विशाल जिन मंदिर 
जोहरी बाजार से निकल कर लगभग तीन किलोमीटर का सफर कर मेतारज पैदल यात्री संघ मोहनबाड़ी पंहुचा जहाँ पर श्री सांवलिया पारसनाथ भगवान् एवं दादाबाड़ी के दर्शन किये। यहाँ पर उन्हें नाश्ता कराया गया एवं धर्मसभा का आयोजन किया गया. अपने उद्बोधन में गणिवर्य श्री ने खरतर गच्छ संघ, जयपुर से आग्रह किया की वे अगले संघ का आयोजन करें जिसे संघ मंत्री श्री अनूप परख ने सहर्ष स्वीकार करते हुए कहा की ज्योति कोठारी से विचार विमर्श कर इसकी रूपरेखा तैयार कर ली जायेगी। 

यहाँ से रवाना हो कर मेतारज पैदल यात्री संघ महावीर साधना केंद्र, जवाहरनगर पंहुचा और वहां मंदिर एवं दादाबाड़ी के दर्शन किये। जवाहरनगर संघ के सहमंत्री श्री प्रवीण लोढा एवं अन्य ट्रस्टियों ने संघ का बहुमान किया एवं सुन्दर नाश्ते की व्यवस्था की. अंत में जनता कॉलोनी स्थित श्री सीमंधर स्वामी के मंदिर का दर्शन कर संघ अपने आवास स्थल मुल्तान मंदिर लौट आया जहाँ पर रात्रि भक्ति का आयोजन किया गया. कल प्रातः यह संघ स्टेशन मंदिर (पुंगलिया मंदिर) का दर्शन कर अपने स्थान को लौटेगा।

मेतारज पैदल यात्री संघ जयपुर के जैन मंदिरों में



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Tuesday, November 15, 2016

मेतारज पैदल यात्री संघ जयपुर के जैन मंदिरों में


 परम पूज्य गच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभसागर सूरीश्वर जी के आज्ञानुवर्ती गणिवर्य श्री मणिरत्नसागर जी एवं मलयरत्न सागर जी महाराज साहब की निश्रा में आज से जयपुर के सभी श्वेताम्बर जैन मंदिरों के दर्शन हेतु तीन दिवसीय पदयात्रा की शुरुआत हुई.

इस संघ ने सबसे पहले मीरा मार्ग स्थित श्वेताम्बर जैन मंदिर के दर्शन किये जहाँ पर मानसरोवर संघ द्वारा उनके लिए सुन्दर नाश्ते की व्यवस्था रखी गई. मंत्री श्री महेशचंद महमवाल एवं संघ के अन्य गणमान्य लोग वहां उपस्थित थे. इसके बाद महारानी फार्म स्थित योगाश्रम में भोजन ग्रहण कर यह पैदल संघ मालवीयनगर की ऒर रवाना हुआ जहाँ श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवन के मंदिर के दर्शन किये।  यहाँ भी मंत्री श्री विमल लालवानी, कोषाध्यक्ष श्री सुरेंद्र सिपानी आदि ने पैदल संघ की अगवानी की एवं चाय आदि से उनका सत्कार किया।

पैदल संघ को संबोधित करते हुए साध्वी श्री अतुलप्रभा श्री जी महाराज 
आगे बढ़ते हुए पैदल संघ श्री वासुपूज्य स्वामी के मंदिर पंहुचा जहाँ दर्शन के पश्चात् गणिवर्य श्री मणिरत्न सागर जी महाराज साहब एवं साध्वी श्री अतुलप्रभा श्री जी ने संघ को संबोधित किया। वहां से संघ श्री नाकोड़ा पारसनाथ मंदिर पंहुचा। प्राकृत भारती परिसर में एक सभा का आयोजन किया गया जिसे गणिवर्य श्री के अतिरिक्त SEBI के पूर्व अध्यक्ष पद्मविभूषण श्री देवेन्द्रराज मेहता, श्री श्यामसुंदर विस्सा, IAS एवं ओसवाल परिषद् के सचिव ज्योति कोठारी ने सभा को संबोधित किया।

 पद्मविभूषण श्री देवेन्द्रराज मेहता, श्यामसुंदर विस्सा एवं ज्योति कोठारी 
मालवीयनगर स्थित तीनो मंदिरों के दर्शन कर यह पैदल यात्री संघ मोती डूंगरी रोड की ऒर अग्रसर हुआ और लंबी दुरी तय कर दादाबाड़ी पंहुचा। यहां पर श्री पारसनाथ भगवान्, अष्टापद तीर्थ, व नंदीश्वर द्वीप के दर्शन कर यात्रियों ने अपने जन्म सफल किये। दादाबाड़ी में गुरु इकतीस का पाठ भी किया। गणिवर्य श्री ने उन्हें जिन भक्ति का महत्व बताया और मंदिर एवं मूर्तियों का परिचय कराया। वहां स्थित साध्वीवर्या श्री मृदुला श्री जी आदि थाना २ ने गणिवर्य श्री के दर्शन वंदन किये।  दादाबाड़ी पहुचने पर श्रीमाल सभा के मंत्री श्री अनिल श्रीमाल ने उनका स्वागत किया एवं सायंकालीन भोजन का आग्रह किया।

गणिवर्य श्री मणिरत्नसागर जी का दादाबाड़ी में उद्बोधन 
दादाबाड़ी से चल कर यह पैदल यात्री संघ श्री महावीर स्वामी मंदिर (मुल्तान मंदिर) आया जहाँ पर मंदिर एवं दादाबाड़ी के दर्शन के बाद सभी के रात्री विश्राम का कार्यक्रम रखा गया है. यहाँ भी मुल्तान संघ के मंत्री श्री नेमकुमार जी जैन उपस्थित थे.

गणिवर्य श्री मणिरत्नसागर जी ने प्रथम दादागुरुदेव श्री जिनदत्त सूरी की विचरण भूमि तिम्मनगढ़ क्षेत्र के जैनेतरों को संस्कारित कर, उन्हें मद्यमांसादि छुड़ा कर जैन धर्म के आचरण में रंग दिया। तिम्मनगढ़, हिंडौन, करौली आदि क्षेत्र के हज़ारों की संख्या में जैनेतर लोगों को संस्कारित करने का महान कार्य उन्होंने किया है. उस क्षेत्र में गत वर्ष १४ नवीन  जिनमंदिरों की प्रतिष्ठा भी करवाई. नव संस्कारित जैनों को मेतारज गोत्र भी प्रदान किया गया.

इन मेतारज गोत्रियों के संस्कारों को दृढ करने एवं उन्हें जैन समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए समय समय पर संघ यात्राओं का आयोजन किया जाता रहा है. अभी हाल ही में खरतरगच्छ सम्मलेन के दौरान भी लगभग ५०० लोगों का पैदल संघ पालीताना ले जाया गया था.

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Tuesday, October 18, 2016

जैन समाज का अपना ऑनलाइन बाजार जैन मार्केट



जैन मार्केट जैन समाज का अपना ऑनलाइन बाजार है. आज ऑनलाइन शॉपिंग की होड़ है और हज़ारों की तादाद में वेबसाइट इस काम के लिए उपलव्ध है, परंतु जैन समाज के लिए एक ऐसे ऑनलाइन पोर्टल की जरुरत थी जहाँ वे अपना सामान बेच सकें.



जैन समाज मूलतः एक व्यापारिक समाज है और इस समाज के लाखों लोग अपने व्यापर में संलग्न हैं. जैन व्यापारियों में परष्पर सहयोग आजकी प्रतियोगी दुनिया में बहुत आवश्यक है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए जैन मार्केट की शुरुआत की गई है. इसमें कोई भी जैन व्यापारी अथवा उत्पादक अपना सामान बेच सकते हैं. जैन व्यापारियों की साख को देखते हुए ऐसा लगता है की अन्य समाज के लोग यहाँ खरीददारी करने जरूर आएंगे.

जैन समाज में अनेक महिलाएं घरेलु उत्पाद जैसे खाद्य सामग्री, हस्तकला की वस्तुएं आदि बना कर छोटे स्टार पर व्यापर करतीं हैं. उनके लिए भी अपना सामान बेचने के लिए जैन मार्केट बड़ा उपयोगी सावित हो रहा है. इससे वे अपना सामान पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत कर सकती हैं.

जैन समाज अपने धार्मिक, सामाजिक कार्यों के लिए बखूबी जाना जाता है. इस कार्य से सामाजिक उत्तरदायित्वों की भी पूर्ति होती है. इस वेबसाइट में पंजीकृत होना एवं अपने सामान को जोड़ना भी बहुत सरल है. अतः आपसे निवेदन है की यदि आप उत्पादक या व्यापारी हैं तो अपने आपको या अपने प्रतिष्ठान को इसमें रजिस्टर करें और यदि आप सामान्य उपभोक्ता हैं तो इस साइट से सामान की खरीद करने के लिए पंजीकृत हों. आप सभी से यह भी निवेदन है की अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें. इस साइट में पंजीकरण निःशुल्क है.

जैन महिलाओं के लिए उपयोगी वेबसाईट जैन मार्केट


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Sunday, October 16, 2016

नेत्रदान के लिए जैन समाज आगे आये


नेत्रदान के लिए जैन समाज आगे आये और कोर्निया अंधत्व से भारत को मुक्ति दिलाये। भारत में नेत्रहीन व्यक्तियों की संख्या लगभग १.५  करोड़ है औरउसमें से लगभग ४० लाख लोग कोर्निया अंधत्व से पीड़ित हैं जिन्हें केवल मृत व्यक्तियों द्वारा दिए गए आँखों का ही सहारा है. आधुनिक तकनीक के कारण मृत व्यक्ति के शरीर से लिए गए एक आँख से तीन व्यक्तियों को रौशनी मिल सकती है अर्थात एक व्यक्ति की दो आँखें ६ व्यक्तियों का जीवन रोशन कर सकती है.
मानव नेत्र एवं कोर्निया 

जैन धर्म कर्मवाद में विश्वास रखता है और उसके अनुसार जो दिया जाता है वही मिलता है. इसलिए इस जीवन में नेत्रदान अगले भव में अच्छे नेत्र दिला सकता है फिर इस पुनीत काम में पीछे क्यों रहना? पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा नेत्र श्री लंका से प्राप्त होता है. श्री लंका में बौद्धों की संख्या अधिक है और बौद्ध भी जैनो की तरह कर्मफल में विश्वास रखते हैं. इसलिए वहां नेत्रदान की बहुत अच्छी परंपरा है और यह छोटा सा देश  जरूरतों को पूरा करने के बाद दुनिया भर में आँखें भेजता है - बिना किसी प्रतिदान के!!

जैन समाज भी इस काम में काफी आगे है परंतु इस भावना को और बढ़ने की आवश्यकता है. श्रीलंका की कुल जनसँख्या २ करोड़ है जो की भारत में जैनो की आवादी के बराबर है, यदि जैन लोग भी वहां के निवासियों की तरह समर्पण भाव के साथ आगे आएं तो भारत कोर्निया अन्धत्व से मुक्त हो सकता है. इसके लिए सामाजिक संगठनों  परम पूज्य आचार्य भगवंतों, साधु-साध्वी वृंदों को भी आगे आना होगा।

मुस्लिम समाज अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण नेत्रदान नहीं करता जबकि वृहत्तर हिन्दू  सनातनी समाज भी इस काम में ज्यादा आगे नहीं है. ऐसी स्थिति में जैन समाज इस काम में आगे आ कर एक मिसाल पेश कर सकता है.

इस वर्ष से कोर्निया अंधत्व मुक्त भारत अभियान (CAMBA)  प्रारम्भ किया गया है और इसमें २०१८ तक भारत को इस अभिशाप से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है. जैन समाज से प्रार्थना है की इस काम में पूरी शक्ति के साथ आगे आये, अपने धर्म का पालन करे और देश को नै रोशनी दे.


कोर्निया अंधत्व मुक्त भारत पर गोष्ठी


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Saturday, October 8, 2016

आज से नवपद ओली का प्रारम्भ



आज ८ अक्टूबर २०१६ से नवपद ओली (आश्विन) का प्रारम्भ हुआ और आज प्रथम पद देवाधिदेव श्री अरिहंत परमात्मा की आराधना की गई. पुरे भारत में ही नहीं विश्व के कोने कोने में जहाँ भी जैन लोग रहते हैं वहां पर पुरे उत्साह के साथ नवपद ओली की आराधना की जाती है. प्रतिवर्ष आश्विन एवं चैत्र मॉस की शुक्ल सप्तमी से पूर्णिमा तक ९ दिन ९ पदों की आराधना की जाती है.

नवपद, श्री नेमिनाथ स्वामी मंदिर, अजीमगंज 
जैन शास्त्रों के अनुसार श्रीपाल का कोढ़ रोग दूर करने के लिए मयनसुंदरी ने गुरुमुख से नवपद की महिमा सुन कर नवपद ओली की आराधना की थी. श्रीपाल-मैनासुन्दरी द्वारा सिद्धचक्र तंप करने से यह जगत में प्रसिद्द हुआ और तब से बड़ी संख्या में लोग नवपद ओली की आराधना ९ दिन आयंबिल कर करते आ रहे हैं.

इन ९ दिनों में अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, सम्यग दर्शन, ज्ञान, चारित्र एवं टप पद की आराधना की जाती है एवं इनके वर्णानुसार क्रमशः चावल, गेहूं, चना, मुंग, उडद एवं अंत के ४ दिन फिर से चावल की आयंबिल की जाती है एवं विधि पूर्वक नवपदों (सिद्धचक्र) की उपासना कर मोक्ष मार्ग को प्रशस्त किया जाता है.

अधिक जानने के लिए पढ़ें
The Navpad Oli (Ayambil) Festival of India's Jain Community 


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Tuesday, September 27, 2016

विश्वप्रसिद्ध श्री शीतलनाथ मंदिर कोलकाता का १५० वर्ष


श्री शीतलनाथ स्वामी, मूलनायक 
राय बद्रीदास बहादुर मुकीम द्वारा कोलकाता में सं १८६७ में निर्मित विश्वप्रसिद्ध श्री शीतलनाथ मंदिर का १५० वर्ष पूरा होने जा रहा है. इस अवसर पर तीन दिवसीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन दिनांक २६, २७, २८ फरबरी, २०१६ को किया जा रहा है.

शीतलनाथ स्वामी का भव्य मंदिर 
उल्लेखनीय है की यह भव्य मंदिर पूरी तरह कांच से बना हुआ है, और अपनी कलात्मकता के लिए विश्व में विख्यात है, यह मंदिर कोलकाता के पर्यटक मानचित्र में "पारसनाथ मंदिर" एवं "मुकीम जैन टेम्पल गार्डन" के रूप से अंकित है। इस मंदिर की प्रतिष्ठा लखनऊ गद्दी के श्रीपुज्य श्री कल्याण सूरी जी महाराज के कर कमलों द्वारा हुई थी. यह मंदिर श्रद्धालुओं के अतिरिक्त देशी-विदेशी पर्यटकों एवं कलाप्रेमियों के भी आकर्षण का केंद्र है. सं १९३५ में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा इस मंदिर पर एक डाक टिकट भी जारी किया गया था।

इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है, न सिर्फ मंदिर का अंदरूनी व बाहरी भाग बल्कि साथ का बगीचा भी कांच से बना हुआ है जो इसकी सुंदरता को चार चाँद लगाता है।  सुन्दर तालाब, फव्वारे, एवं अन्य सजावट ने इसे और भी निखारा है, तभी तो पर्यटकों की आँखें इसे निहारते हुए नहीं थकती।

मंदिर के सामने लगी राय बद्रीदास बहादुर की मूर्ति
सं १९०५ में प्रकाशित "The glimpses of Bengal" में लिखा गया है की राय बद्रीदास जी ने स्वयं इस मंदिर की वास्तुकला का डिज़ाइन किया था साथ ही इसमें कांच की कलाकारी का भी. राय बद्रीदास बहादुर को तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने "राय बहादुर" एवं "मुकीम" की उपाधि प्रदान की थी।  वे तत्कालीन वाइसराय के भी जोहरी थे.

महावीर स्वामी जैन मंदिर कोलकाता के १५० वर्ष


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Monday, September 26, 2016

Bharatiya Chikitsak Ratan award to Dr. S C Bhandari


Bharatiya Chikitsak Ratan award to Dr. S C Bhandari

Dr. S C Bhandari, a renowned eye specialist in Jaipur has received the Bharatiya Chikitsak Ratan award at constitution club, New Delhi for his outstanding performance and services to the mankind. Global Achievers Foundation has selected Dr. Bhandari  for the award and The Economic for Health and educational Growth organized the ceremony. Ramdas Bandu Athawale, The union minister was the Chief guest at the ceremony.

Dr. S C Bhandari Receiving award 
 Dr. Bhandari had been serving at Nanavati hospital, Mumbai as an eye specialist and also acting as official eye specialist for Indian cricket team. He left the prestigious jobs and started serving humankind free of cost. He joined Amar Jain Hospital at Jaipur, a charitable healthcare institute and is serving there till date for philanthropic causes.

Congratulations to Dr. Bhandari and his family for this felicitation.

Sourav Kothari is selected for Arjuna award


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